
आजकल साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए ऐसे-ऐसे पैंतरे आजमाते हैं, जिसने लोग बिल्कुल ही अंजान होते हैं. जब ठग उनका बैंक अकाउंट बिल्कुल ही खाली कर देते हैं तब जाकर लोगों को स्कैम का पता लगता है. Tv9 भारतवर्ष ने एक्सक्लूसिव पड़ताल में उस चेहरे को बेनकाब किया है, जो पुलिस की वर्दी पहनकर मासूम लोगों को ठग रहा था.
डिजिटल अरेस्ट की शुरुआत एक रिकॉर्डेड फोन कॉल से होती है. मोहित यादव नाम के एक युवक को कॉल आया कि उनके पते पर एक पार्सल आया है, जिसमें नशीले पदार्थ मिले हैं. इसके बाद कॉल को एक कॉल सेंटर जैसे सेटअप पर ट्रांसफर किया गया, जहां ठगों ने मोहित को डराना शुरू किया कि उनकी आईडी का गलत इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है.
नकली थाना और गूगल का झांसा
ठगों का आत्मविश्वास इतना है कि वे व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहनकर सामने आते हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। मोहित के मामले में ठग लोकमान्य तिलक थाना, मुंबई का अधिकारी बनकर बात कर रहा था. पीछे पुलिस का लोगो और फाइलें इस तरह सजी थीं कि कोई भी धोखा खा जाए. विश्वास जीतने के लिए ठग ने मोहित से कहा- गूगल पर जाकर थाने का लैंडलाइन नंबर चेक कर लो, हम वहीं से बोल रहे हैं.
साजिश के तीन घातक चरण
ठग ऐसे केस का नाम लेते हैं जो गूगल पर ट्रेंड कर रहा हो (जैसे मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग सिंडिकेट). पीड़ित को एक लिंक भेजा जाता है, जो हूबहू सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट जैसा दिखता है. वहां केस नंबर डालते ही आपके नाम का अरेस्ट वारंट दिखाई देता है. ठग आपसे बैंक बैलेंस का स्क्रीनशॉट मांगते हैं. अगर अकाउंट खाली है, तो वे कॉल काट देते हैं. लेकिन अगर पैसा है, तो केस रफा-दफा करने या प्रायोरिटी फीस के नाम पर लाखों की मांग की जाती है.
मोहित की सूझबूझ ने खोली पोल
मोहित ने हिम्मत नहीं हारी और जब ठग ने केस दबाने के लिए 80 हजार रुपये की मांग की, तो मोहित ने उन्हें अपनी बातों में घुमाया. जैसे ही मोहित ने ठग का वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू किया, पुलिस की वर्दी में बैठा अपराधी गालियां देते हुए कॉल काट गया.
Tv9 की अपील: सतर्क रहें! कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर आपको गिरफ्तार (डिजिटल अरेस्ट) नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है.





