
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कब क्या फैसला ले लेंगे शायद उनको भी नहीं पता. अगर कहें कि ट्रंप के फैसले उनके ‘मूड स्विंग’ से प्रभावित होते हैं, तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. इसका ताजा उदाहरण है ग्लोबल टैरिफ को लेकर उनका एलान.ट्रंप ने शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह वैश्विक आयात पर लगाए जाने वाले प्रस्तावित टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करेंगे. एक दिन पहले ही उन्होंने 10 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की थी.
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह फैसला उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की गहन, विस्तृत और पूर्ण समीक्षा के आधार पर लिया है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘बेतुका, खराब ढंग से लिखा गया और असाधारण रूप से अमेरिका-विरोधी’ बताया. हालांकि, यह टैरिफ 150 दिनों के लिए ही प्रभावी रहेगा और इसे स्थायी बनाने के लिए ट्रंप प्रशासन को अमेरिकी कांग्रेस से कानून पास कराना होगा.
ट्रंप ने ईरान पर हमले का बना लिया प्लान?
ट्रंप के इस ताजा कदम से टैरिफ को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. पिछले साल भारत पर अमेरिका ने 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था. साथ ही रूस से तेल खरीदने के चलते उन्होंने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिससे कुल टैरिफ 50% प्रतिशत तक बढ़ा गया था. फरवरी 2026 में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क पर सहमति के बाद ट्रंप प्रशासन ने भारतीय आयात पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया था.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप द्वारा लगाए गए सभी टैरिफ निष्प्रभावी हो गए थे, जिससे ये संकेत मिले थे कि भारतीय आयात पर भी टैरिफ पुराने 3.5% के स्तर पर आ सकता है. लेकिन ट्रंप के 15 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाए जाने की घोषणा के बाद भारतीय आयात पर करीब 18.5% प्रतिशत टैरिफ रहेगा, रहेगी, हालिया 18 प्रतिशत से 0.5% अधिक है.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रंप की प्रतिक्रिया
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक (Sweeping) टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया. यह फैसला 6-3 के बहुमत से आया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA)- जो 1977 का एक कानून है और नेशनल इमरजेंसी की स्थिति में राष्ट्रपति को कुछ आर्थिक फैसले लेने की शक्तियां देता है- टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता. शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए टैरिफ निष्प्रभावी हो गए.
ट्रंप ने इस कानून के तहत राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर कई देशों (जैसे चीन, कनाडा, मैक्सिको, भारत आदि) पर ड्रग ट्रैफिकिंग और ट्रेड डेफिसिट के आधार पर टैरिफ लगाए थे. इनमें 10% से 25% तक के टैरिफ शामिल थे, जो लगभग सभी आयातों पर लागू थे. सुप्रीम कोर्ट ने इसे राष्ट्रपति की असीमित शक्ति मानते हुए खारिज किया, क्योंकि अमेरिकी संविधान में टैक्स और ड्यूटी (टैरिफ) लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास (बिना स्पष्ट कानूनी आधार के).





