
What is DINK: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में एक नया चलन देखने को मिल रहा है. दो लोग, दो कमाई और बिना बच्चे की खुशहाल जिंदगी. इसे लोग DINK (डबल इनकम, नो किड्स) कह रहे हैं. खासकर आज के जेन-जी इस ट्रेंड से बहुत ज्यादा प्रभावित नजर आ रहे हैं. युवा पेरेंट्स बच्चों की जिम्मेदारी उठाने से ज्यादा DINK को बेहतर विकल्प की तरह देख रहे हैं. लेकिन बढ़ते चलन के बीच, ये सवाल सबके मन में आ रहा है कि, भारत जैसे देश में जहां ‘परिवार का महत्व’ बच्चों की परवरिश का एक हिस्सा होता है, वहां युवाओं में इतना बड़ा बदलाव कैसे संभव है? पिछले कुछ सालों में ऐसा क्या हुआ कि लोग बच्चे से ज्यादा फ्रीडम पसंद करने लगे हैं? इस बारे में जब हमने साइकिएट्रिस्ट डॉ. भवनीत कौर से बात की, उन्होंने इसके पीछे की जेन-जी की मानसिकता बताई…
18% Gen-Z महिला नहीं चाहती बच्चा
हालिया सर्वे के अनुसार, युवा पेरेंट्स की सोच बदल रही है. नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी अवेयरनेस सर्वे में 18% जेन-जी महिलाओं ने बच्चा न चाहने की बात कही है. वहीं, यूगोव इंडिया के अनुसार, मेट्रो शहरों में 18% युवा कपल्स सिर्फ एक बच्चा चाहते हैं. इस बदलाव के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण हैं. बढ़ती महंगाई और परवरिश का खर्च युवाओं को सतर्क बना रहा है. साथ ही, वे अपनी मेंटल हेल्थ, पर्सनल फ्रीडम और करियर-सुकून के बीच बैलेंस को प्राथमिकता दे रहे हैं. वहींं, 9 टू 5 की भागदौड़ के बीच, युवा अब पेरेंट्हुड को जरूरत नहीं, बल्कि एक ऑप्शन मान रहे हैं.
स्लो लिविंग को फॉलो कर रहे जेन-जी
एक समय ऐसा था कि युवा ‘हसल कल्चर’ की ओर भाग रहे था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। लेकिन अब जेन-जी ने इस रेस को खत्म कर दिया है. हसल कल्चर के कारण हो रहे बर्नआउट और मेंटल तनाव से वे थक चुके हैं, ऐसे में आज के युवा स्लो लिविंग को फॉलो कर रहे हैं. वे अपनी खुशी, शांति और वर्क लाइफ बैलेंस को चुन रहे हैं. वे हर चीज अपनी शर्तों पर जी रहे हैं. ऐसे में बिना बच्चे वाली लाइफस्टाइल उन्हें प्रभावित कर रही है, जहां उन्हें बच्चे की जिम्मेदारी उठाने की टेंशन नहीं होती, बल्कि वे खुद के लिए समय और आजादी चुनते हैं. आज के समय में ये सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि जीने का एक नया नजरिया बन चुका है.




