Vodafone Idea Share: वोडाफोन आइडिया के निवेशकों के लिए एक अहम खबर सामने आई है. दरअसल, विदेशी ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी ने वीआई को लेकर एक नई रिपोर्ट जारी की है. ये रिपोर्ट उन लोगों की धड़कनें बढ़ा सकती है, जिनके पोर्टफोलियो में वीआई के शेयर शामिल हैं. ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के शेयर में मौजूदा लेवल से लगभग 47 फीसदी की बड़ी गिरावट आ सकती है. वोडाफोन आइडिया शेयर 15.60 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहे हैं. पिछले एक साल में शेयरों में करीब 115 फीसदी की बढ़त हुई है.

‘रिड्यूस’ रेटिंग का मतलब
एचएसबीसी ने शेयर को ‘रिड्यूस’ रेटिंग दी है. शेयर बाजार की भाषा में इसका सीधा अर्थ है कि निवेशकों को इस शेयर में अपना निवेश कम रखना चाहिए. ये सीधे तौर पर शेयर बेचने की सलाह नहीं है, लेकिन ये साफ इशारा है कि आगे रिस्क ज्यादा है. ब्रोकरेज ने शेयर का टारगेट प्राइस 8.25 रुपये तय किया है. अगर आपने शेयर को ऊंचे भाव पर खरीदा है, तो ये आपके लिए चिंता का विषय हो सकता है. कंपनी के ऑपरेशनल आंकड़े सुधर जरूर रहे हैं, लेकिन असली दिक्कत कहीं और छिपी है.
भारी भरकम कर्ज की सबसे बड़ी टेंशन
कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती कमाई की नहीं, बल्कि भारी भरकम खर्चों की है. वित्त वर्ष 202829 में स्पेक्ट्रम पेमेंट की एक बड़ी देनदारी सामने खड़ी है. आसान शब्दों में समझें तो स्पेक्ट्रम वो एयरवेव है जिसके जरिए हम फोन पर बात करते हैं या इंटरनेट चलाते हैं. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सरकार को इसके एवज में भारी रकम चुकानी होती है. मार्च 2026 तक कंपनी पर करीब 1.27 लाख करोड़ रुपये की स्पेक्ट्रम देनदारी थी. अगले तीन सालों में वीआई को लगभग 49,000 करोड़ रुपये की स्पेक्ट्रम किस्तें चुकानी हैं. इतने बड़े खर्च को पूरा करने के लिए कंपनी के पास मौजूद कैश फ्लो काफी नहीं है.
कमाई को तीन गुना करने की चुनौती
अगर आने वाले समय में मोबाइल रिचार्ज महंगे होते हैं, तब भी बात पूरी तरह नहीं बनेगी. रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी को अपना ऑपरेटिंग कैश फ्लो अगले तीन सालों में कम से कम तीन गुना बढ़ाना होगा. ये ठीक वैसा ही है जैसे आपकी सैलरी 30,000 रुपये हो लेकिन घर का जरूरी खर्च अचानक 90,000 रुपये हो जाए. कंपनी मैनेजमेंट भी इस बात को समझता है. उनका अनुमान है कि अगले कुछ सालों में 60,000 करोड़ रुपये का कैश एबिटा जनरेट किया जा सकता है. लेकिन ये प्लान बिना किसी रुकावट के कैसे पूरा होगा, ये एक बड़ा सवाल है.
निवेशकों को क्या करना चाहिए
अब सवाल उठता है कि शेयरधारकों को क्या करना चाहिए. फिलहाल डर कर फैसला लेने की जरूरत नहीं है. लेकिन ये शेयर अब कम रिस्क वाला नहीं रह गया है. ये एक हाई रिस्क दांव है. कंपनी अपने नेटवर्क पर 45,000 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है. इससे मौजूदा ग्राहक जुड़े रहेंगे, लेकिन नए ग्राहकों को एयरटेल या जियो से तोड़कर लाना आसान नहीं होगा. साल 2030 के बाद कंपनी को फिर से स्पेक्ट्रम रिन्यूअल के लिए पैसों की जरूरत पड़ेगी. इसके लिए अगर कंपनी नए शेयर जारी करती है, तो मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी कम हो जाएगी. इसलिए सिर्फ शेयर का भाव सस्ता देखकर पैसा लगाने से बचें. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.



