इस्तीफा दे चुके इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा का महाभियोग वाला चैप्टर लोकसभा से क्लोज हो सकता है. दरअसल, लोकसभा में यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी थी. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता में एक रिपोर्ट भी तैयार करवाई गई थी, लेकिन अब लोकसभा में इस प्रस्ताव को नहीं लाया जाएगा. टाइम्स ऑफ इंडिया ने सूत्रों के हवाले से यह रिपोर्ट प्रकाशित की है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक, इस्तीफा देने की वजह से जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग नहीं लाया जाएगा. पहले प्रस्ताव लाने की कोशिश थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। संसद के अगले सत्र में इसे औपचारिक रूप से क्लोज किया जा सकता है. इसे यशवंत वर्मा के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है. वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर 200 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे.
महाभियोग नहीं लाना फायदेमंद कैसे?
महाभियोग लाने की कवायद के बीचर यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि, इसके बावजूद उनके खिलाफ संसद में महाभियोग लाने की थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है. महाभियोग के तहत अगर वर्मा नहीं हटाए जाते हैं तो उन्हें रिटायर जजों की तरह पेंशन और अन्य रिटायरमेंट सुविधाएं मिलती रहेगी.
उन्हें सरकारी आवास भी मिलेगा और सिक्योरिटी भी. इसके अलावा अगर संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाता तो यशवंत वर्मा को लेकर कई और खुलासे हो सकते थे, लेकिन प्रस्ताव के नहीं आने से इसकी गुंजाइश खत्म हो जाएगी.
यह भी डेटा सामने नहीं आ पाएगा कि यशवंत वर्मा के घर पर कितने पैसे थे और ये पैसे कहां से आए थे?
वर्मा के खिलाफ FIR नहीं, उठे सवाल
अगस्त में संसद ने उस रिपोर्ट को पब्लिक डोमेन में रख दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता में तैयार किया गया था. कमेटी की रिपोर्ट में वर्मा पर आरोप साबित हुए थे. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पैसे के बारे में यशवंत वर्मा को जानकारी थी.
अगस्त में सुप्रीम कोर्ट में इसको लेकर याचिका दाखिल की गई. याचिका में वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की अनुमति देने के लिए कहा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका सुनने से इनकार कर दिया. सितंबर 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी वर्मा के खिलाफ एफआईआर की याचिका खारिज कर दी.
यानी पूरे मामले में यशवंत वर्मा के खिलाफ फिलहाल इस मामले को लेकर कोई एफआईआर दर्ज नहीं है.
एक कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने इसको लेकर सवाल भी उठाया. उन्होंने कहा कि अगर किसी मंत्री के घर पर ऐसा होता तो क्या उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जाती?
वर्मा के घर मिला था बेहिसाब कैश
1415 मार्च 2025 की रात को यशवंत वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम में आग लगने की खबर दमकल कर्मियों को मिली. आग बुझाने के दौरान दमकल और पुलिस के अधिकारियों ने स्टोररूम में 500 रुपये के जले, अधजले, गीले और बिखरे हुए नोट देखे थे.
इसके बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया. लोकसभा स्पीकर ने 3 सदस्यी जांच कमेटी गठित की. कमेटी ने 9 गवाहों और 14 सबूतों के आधार पर वर्मा को मामले में क्लिनचिट देने से इनकार कर दिया. कमेटी ने वर्मा को इसके लिए दोषी ठहराया.
वर्मा के खिलाफ कमेटी की रिपोर्ट की अहम बातें
1. जस्टिस वर्मा का कहना था कि जिस स्टोररूम में पैसे थे, उससे उनका कोई लेनादेना नहीं है. कमेटी की जांच रिपोर्ट में कहा गया कि स्टोररूम मुख्य रहने वाले हिस्से से अलग जरूर था, लेकिन वह 30, तुगलक क्रिसेंट, नई दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के आधिकारिक आवासीय परिसर के अंदर था. वर्मा को उसके लॉकर खराब की भी जानकारी थी.
2. दूसरी अहम बात सबूतों को सुरक्षित रखने से जुड़ी है. रिपोर्ट में कहा गया कि करेंसी को जब्त नहीं किया गया, इन्वेंट्री नहीं बनाई गई, पंचनामा नहीं हुआ और स्टोररूम को तुरंत सील नहीं किया गया. इसके बाद वहां सफाई हुई और बाद में नोट उपलब्ध नहीं रहे. समिति ने इसे मैटेरियल लैप्स माना.


