आजकल कई बच्चों की दिनचर्या पहले जैसी नहीं रही है. देर रात तक मोबाइल, टीवी या दूसरे स्क्रीन देखने, पढ़ाई का दबाव और गलत समय पर सोने की आदत की वजह से उनकी नींद प्रभावित हो रही है. कई बार मातापिता इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक नींद पूरी न होने का असर बच्चों की सेहत और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है. इसलिए बच्चों की नींद को लेकर शुरुआत से ही सावधानी बरतना जरूरी है.

बच्चों के अच्छे विकास के लिए पूरी लेना उतना ही जरूरी है, जितना सही खाना और रोजाना शारीरिक एक्टिविटी करना.अच्छी नींद से शरीर को आराम मिलता है और दिमाग भी बेहतर तरीके से काम करता है. वहीं, लगातार कम नींद लेने से बच्चा थका हुआ, चिड़चिड़ा या सुस्त महसूस कर सकता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इससे पढ़ाई, खेलकूद और रोजमर्रा की एक्टिविटी पर भी असर पड़ सकता है. अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान दिया जाए, तो बच्चों का स्लीप रूटीन आसानी से सुधारा जा सकता है. आइए जानते हैं उम्र के हिसाब से बच्चों के लिए कितनी नींद जरूरी है और उनका स्लीप रूटीन कैसे बेहतर बनाया जा सकता है.
उम्र के अनुसार बच्चों को कितनी नींद चाहिए?
के मुताबिक, बच्चों की उम्र के साथ उनकी नींद की जरूरत भी बदलती रहती है. नवजात शिशु को हर दिन 14 से 17 घंटे की नींद की जरूरत होती है. 4 से 12 महीने के बच्चों के लिए 12 से 16 घंटे, 1 से 2 साल के बच्चों के लिए 11 से 14 घंटे और 3 से 5 साल के बच्चों के लिए 10 से 13 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है.
वहीं, 6 से 12 साल के बच्चों को रोज 9 से 12 घंटे और 13 से 18 साल के टीनेजर बच्चों को 8 से 10 घंटे की नींद लेनी चाहिए. पर्याप्त नींद लेने से बच्चों का शरीर और दिमाग बेहतर तरीके से काम करता है. अगर बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से पूरी नींद नहीं लेता, तो उसकी सेहत, पढ़ाई और रोजमर्रा की एक्टिविटी पर असर पड़ सकता है.
बच्चों का स्लीप रूटीन कैसे सुधारें?
बच्चों का स्लीप रूटीन सुधारने के लिए उन्हें रोज एक ही समय पर सुलाने और सुबह लगभग एक ही समय पर उठाने की आदत डालें. सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, टीवी और टैबलेट का इस्तेमाल बंद कर दें. बच्चे के कमरे का माहौल शांत और आरामदायक रखें, ताकि उसे आसानी से नींद आ सके.
दिन में खेलकूद और शारीरिक एक्टिविटी के लिए समय जरूर दें. रात में बहुत भारी या ज्यादा मीठा खाना देने से बचें. सोने से पहले कहानी सुनाना या हल्का संगीत सुनाना भी बच्चे को आराम महसूस कराने में मदद कर सकता है.
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
अगर बच्चा लंबे समय से ठीक से नहीं सो पा रहा है, रात में बारबार जाग जाता है या दिनभर बहुत ज्यादा थका और सुस्त रहता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. अगर सोते समय तेज खर्राटे आते हैं, सांस लेने में परेशानी होती है या बच्चा नींद में बारबार घबराकर उठ जाता है, तो भी इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में बच्चों के डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है. सही समय पर इलाज और सलाह मिलने से बच्चे की नींद और उसकी सेहत, दोनों में सुधार हो सकता है.



