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उत्तर प्रदेश में पिछले करीब एक महीने से स्कूलों की समस्याओं को लेकर जेन अल्फा छात्र लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं. कहीं छात्रों ने सड़क जाम की, कहीं कलेक्ट्रेट तक मार्च किया और कहीं हॉस्टल के कमरों में खुद को बंद कर कई घंटे तक विरोध किया. इन प्रदर्शनों में छात्रों की मांगें भी काफी बुनियादी रही हैं. छात्र ज्यादा शिक्षक, बेहतर खाना, पीने का साफ पानी, चलने वाले पंखे, साफ-सफाई और स्कूल की बेहतर सुविधाओं की मांग कर रहे हैं.

लखनऊ और उन्नाव के सर्वोदय आवासीय स्कूलों में कुछ ही दिनों के अंतर पर हुए तीन प्रदर्शनों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित सभी 103 सर्वोदय स्कूलों के निरीक्षण का आदेश दिया है.

उन्नाव में छात्र क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?

बुधवार सुबह उन्नाव के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के छात्र करीब 6:30 बजे मोहान चौराहे पर पहुंचे. छात्रों के हाथों में पोस्टर और बैनर थे. उन्होंने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ. छात्रों ने स्कूल में शिक्षकों की कमी, खराब गुणवत्ता वाले खाने, पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने, शिक्षकों के कथित अनुचित व्यवहार और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याओं की शिकायत की.

प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद पुलिस, समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने छात्रों से प्रदर्शन खत्म करने की अपील की. करीब आधे घंटे बाद छात्रों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया. अपर जिलाधिकारी सुशील कुमार गौर ने बताया कि छात्र कई मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे.

लखनऊ में छात्र क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन?

स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले लखनऊ के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के 100 से ज्यादा छात्रों ने मोहान रोड को जाम कर दिया था. छात्रों ने शिक्षकों की कमी, खराब खाना और दूसरी सुविधाओं की कमी को लेकर विरोध किया था. इसके तीन दिन बाद एक दूसरे सर्वोदय विद्यालय की करीब 200 छात्राओं ने भी लखनऊ-दुबग्गा बाईपास को जाम कर दिया. तेज बारिश के बीच छात्राओं ने भी शिक्षकों और दूसरी सुविधाओं से जुड़ी इसी तरह की शिकायतें उठाईं.

पहला प्रदर्शन तब खत्म हुआ, जब समाज कल्याण विभाग के मंत्री असीम अरुण का वाहन जाम में फंस गया और वह मौके पर पहुंचे. उन्होंने छात्रों की समस्याएं सुनने का भरोसा दिया. दूसरे प्रदर्शन के दौरान समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और छात्रों से बातचीत की.

शिक्षकों की कमी की वजह क्या बताई गई?

मंत्री असीम अरुण ने बाद में बताया कि शिक्षकों की कमी की एक वजह अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा कानूनी विवाद है. उनके मुताबिक, पिछले साल अतिथि शिक्षकों का चयन किया गया था, लेकिन लखनऊ स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच में चल रहे एक मामले की वजह से करीब एक साल तक इन शिक्षकों की सेवाएं नहीं ली जा सकीं.

फतेहपुर में में सड़कों पर क्यों प्रदर्शन?

28 जुलाई को फतेहपुर के किशनपुर कस्बे में स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज के कक्षा 6 से 12

तक के करीब 1,000 छात्र स्कूल के बाहर जमा हो गए. छात्रों के हाथों में पोस्टर, बैनर और बीआर अंबेडकर की तस्वीर थी. छात्रों की मांग थी कि उन्हें सुरक्षित पीने का पानी मिले, जर्जर कक्षाओं और टपकती छतों की मरम्मत कराई जाए, पंखे ठीक कराए जाएं और स्कूल में जरूरी फर्नीचर उपलब्ध कराया जाए. करीब चार घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद फतेहपुर के जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार छात्रों से मिलने पहुंचे. उन्होंने छात्रों को उनकी समस्याएं दूर करने का भरोसा दिया.

इसके बाद स्कूल में काम भी शुरू हुआ. कक्षाओं में पंखे लगाए गए और RO-फिल्टर वाले पीने के पानी की व्यवस्था की गई. छात्रों की ओर से उठाई गई दूसरी सुविधाओं से जुड़ी मांगों को भी पूरा किया गया. स्कूल के प्रिंसिपल लाल बहादुर सिंह ने बताया कि छात्रों ने खुद प्रदर्शन आयोजित किया था. उन्होंने कहा कि छात्रों की जरूरत के हिसाब से टेबल, कुर्सियां और पंखे उपलब्ध करा दिए गए हैं.

हमीरपुर में सड़कों पर क्यों उतरे छात्र?

छात्रों के प्रदर्शन सिर्फ स्कूल के अंदर की सुविधाओं तक सीमित नहीं रहे. 11 अगस्त को हमीरपुर में करीब 35-40 स्कूली छात्र अपने माता-पिता और अभिभावकों के साथ करीब 5 किलोमीटर पैदल चलकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे. छात्रों के हाथों में राष्ट्रीय ध्वज था. उनकी मांग स्कूल तक जाने वाली सड़क की मरम्मत कराने की थी.

करीब 1.8 किलोमीटर लंबी इस सड़क के 300 मीटर हिस्से की हालत मानसून के दौरान इतनी खराब हो गई थी कि वहां से वाहनों का गुजरना लगभग मुश्किल हो गया था. सड़क के बड़े हिस्से का काम भी लंबित था. इसके लिए वन विभाग की मंजूरी को एक बड़ी बाधा बताया गया था.

क्या हाई कोर्ट पहुंचा मामला?

हमीरपुर के छात्रों के इस प्रदर्शन ने जिले से बाहर भी ध्यान खींचा. घटना को लेकर अखबार में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले को जनहित याचिका यानी PIL के तौर पर दर्ज करने का निर्देश दिया.

चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किए.

हमीरपुर के जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने बताया कि स्थानीय लोगों ने जुलाई में सड़क को लेकर प्रशासन को ज्ञापन दिया था. उन्हें सड़क की मरम्मत के काम की प्रगति के बारे में जानकारी भी दी गई थी. लेकिन अगस्त में हुई भारी बारिश के कारण सड़क के एक हिस्से की स्थिति और खराब हो गई. इसके बाद स्थानीय लोग बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंच गए और इस समस्या को उठाया. अब पूरी सड़क की मरम्मत कर दी गई है.

कन्नौज में क्यों प्रदर्शन कर रहे छात्र?

14 अगस्त को कन्नौज के जवाहर नवोदय विद्यालय के करीब 100 छात्रों ने विरोध का अलग तरीका अपनाया. सुबह करीब 4 बजे आवासीय स्कूल के छात्रों ने खुद को हॉस्टल के कमरों में बंद कर लिया और कई घंटे तक बाहर आने से इनकार कर दिया. छात्रों ने मेस में मिलने वाले खाने की खराब गुणवत्ता, साफ-सफाई, पीने के पानी और स्कूल स्टाफ के कथित दुर्व्यवहार से जुड़ी शिकायतें उठाईं.

छात्रों ने नाश्ता और दोपहर का खाना भी नहीं खाया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उनका कहना था कि जब तक जिलाधिकारी खुद स्कूल आकर उनकी समस्याओं को दूर करने का भरोसा नहीं देंगे, तब तक वे कमरों के दरवाजे नहीं खोलेंगे. आखिरकार कन्नौज के जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री स्कूल पहुंचे. उन्होंने बताया कि कोई बड़ी समस्या नहीं थी. छात्रों को साफ-सफाई, खाने, फॉगिंग और पीने के पानी से जुड़ी कुछ परेशानियां थीं. इन समस्याओं को दूर कर दिया गया है और जरूरी जांच के बाद सुविधाएं बहाल कर दी गई हैं.

आखिर छात्रों के प्रदर्शन क्यों बढ़ रहे हैं?

जब अधिकारियों से छात्रों के लगातार हो रहे प्रदर्शनों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसे किसी बड़े आंदोलन या व्यापक ट्रेंड के रूप में देखने से इनकार किया. अधिकारियों के मुताबिक, छात्रों की शिकायतें वास्तविक हो सकती हैं, लेकिन एक घटना सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दूसरी जगह के छात्रों को भी प्रदर्शन का रास्ता अपनाने का तरीका मिल जाता है. जब उन्हें किसी प्रदर्शन के बाद अधिकारियों की ओर से तुरंत ध्यान दिए जाने की खबर मिलती है तो दूसरे छात्र भी अपनी मांगों को इसी तरह उठाने लगते हैं.

क्या होगी जांच?

सर्वोदय स्कूलों के छात्रों के लगातार प्रदर्शनों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी 103 सर्वोदय आवासीय स्कूलों का निरीक्षण कराने का फैसला किया है. समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि सभी जिलाधिकारियों और जिला स्तर के अधिकारियों से कहा गया है कि वे इन आवासीय स्कूलों का दौरा करें. अधिकारियों को छात्रों और शिक्षकों से बातचीत करने और स्थानीय स्तर पर हल होने वाली समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा, जिन समस्याओं के समाधान के लिए राज्य स्तर पर हस्तक्षेप की जरूरत है, उनकी रिपोर्ट भी सरकार को भेजने को कहा गया है.