भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस का हिस्सा बनने के बाद पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान एक बार फिर 978 वर्ग मीटर के विवादित प्लॉट को लेकर चर्चा में हैं. तांदलजा इलाके में वडोदरा नगर निगम की जमीन के आवंटन का प्रस्ताव अब आगे बढ़ने की तैयारी में है. इस प्लॉट की कीमत करीब 20.53 करोड़ रुपये आंकी गई है. यूसुफ पठान ने 2012 में इस जमीन को आवंटित करने की मांग की थी.

हालांकि, 2014 में गुजरात सरकार ने बिना सार्वजनिक नीलामी के प्लॉट आवंटित करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था. इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और जमीन पर कब्जे को लेकर भी विवाद हुआ. यूसुफ पठान ने 3 मार्च 2012 को वडोदरा नगर निगम से अपने बंगले के पास स्थित इस प्लॉट को आवंटित करने का अनुरोध किया था. उन्होंने सुरक्षा और परिवार की सुविधा को इसका कारण बताया था.
नगर निगम स्तर पर प्रस्ताव आगे बढ़ा, लेकिन राज्य सरकार की मंजूरी नहीं मिली. 9 जून 2014 को राज्य सरकार ने बिना सार्वजनिक नीलामी के 99 साल की लीज पर जमीन देने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. इसके बावजूद जमीन पर कब्जे को लेकर विवाद जारी रहा.
हाईकोर्ट ने कब्जे को अतिक्रमण माना था
जून 2024 में वडोदरा नगर निगम ने यूसुफ पठान को जमीन से अतिक्रमण हटाने का नोटिस दिया. पठान ने इसके खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया. 21 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि जमीन का आवंटन नहीं हुआ था और बिना भुगतान या आवंटन आदेश के उस पर कब्जा करना अतिक्रमण था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके बाद अगस्त 2026 में पठान ने हाईकोर्ट में अपनी अपील वापस ले ली.
अब सरकार की मंजूरी के बाद नई प्रक्रिया
यूसुफ पठान के वकील ने अदालत को बताया था कि जमीन का मामला राज्य सरकार की नीति के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है. गुजरात सरकार ने प्लॉट आवंटन को मंजूरी दी है. प्रस्ताव के अनुसार, 978 वर्ग मीटर जमीन में से 500 वर्ग मीटर आवासीय इस्तेमाल के लिए उपहार के रूप में और शेष 478 वर्ग मीटर जमीन निर्धारित मूल्यांकन के 55 प्रतिशत पर देने की व्यवस्था है. अब नगर निगम की स्थायी समिति में प्रस्ताव रखे जाने की तैयारी है.
राजनीतिक समय को लेकर भी चर्चा
यह मामला ऐसे समय में आगे बढ़ रहा है, जब यूसुफ पठान जून 2026 में उन 20 TMC सांसदों में शामिल थे जिन्होंने पार्टी से अलग होकर NCPI में विलय के जरिए NDA खेमे में जाने का कदम उठाया. इसके करीब दो महीने बाद जमीन आवंटन का सरकारी प्रस्ताव सामने आया. इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं.



