India China Border: भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर चर्चा में है। भारततिब्बत सीमा पुलिस के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने पुष्टि की है कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमनेसामने की स्थिति बनी हुई है। उनके अनुसार, जुलाई 2026 से शुरू हुआ यह गतिरोध अब तक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत भी जारी है।

ITBP प्रमुख ने राजस्थान के अलवर में जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों के साथ आमनासामना हुआ है। उन्होंने इस दौरान ITBP की विशेष कमांडो टीमों की भूमिका की भी सराहना की, जिन्होंने ऐसी परिस्थितियों में अपनी क्षमता दिखाई है।
असफिला और तवांग क्षेत्र में सीमा पर तनाव
Arunachal बॉर्डर पर China से FaceOff अब भी जारी, ITBP DG Shatrujeet Kapoor का बड़ा बयान
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव के बीच आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीएलए सैनिकों के साथ जुलाई से चल रहे फेसऑफ… pic.twitter.com/XGqwdbtcsR
— Bansal News Official October 23, 2026
रिपोर्टों के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के तवांग सर्कल के बजाय तक्सिंग क्षेत्र के पास माजा बेस के आसपास जुलाई में भारतीय और चीनी गश्ती दल आमनेसामने आए थे। इसके बाद चीनी सैनिकों की ओर से इस इलाके में दोबारा तंबू लगाए जाने की जानकारी सामने आई। रिपोर्टों में दावा किया गया कि ये तंबू भारत की वास्तविक नियंत्रण रेखा की समझ के मुताबिक सीमा से करीब 6 से 7 किलोमीटर की दूरी पर थे। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं।
ITBP प्रमुख के बयान से स्पष्ट हुआ है कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, सीमा पर आमनेसामने आने की स्थिति और किसी क्षेत्र पर कब्जे के दावे अलगअलग बातें हैं। भारतीय सेना पहले कुछ रिपोर्टों में चीनी घुसपैठ और नए निर्माण से जुड़े आरोपों को खारिज कर चुकी है।
चीन से मुकाबले के लिए शौर्य कमांडो तैयार
ITBP प्रमुख ने बताया कि बल ने ‘शौर्य कमांडो’ नाम से विशेष लड़ाकू टीम तैयार की है। इन कमांडो को ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शौर्य कमांडो ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ जारी आमनेसामने की स्थितियों के दौरान अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। योजना के मुताबिक, इन कमांडो को ITBP की हर सीमा बटालियन में शामिल किया जाएगा। बल का लक्ष्य एक पूरी बटालियन के बराबर विशेष कमांडो तैयार करना है। इसके अलावा, गलवान जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए जवानों को विशेष प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
ड्रोन और एंटीड्रोन तकनीक पर जोर
ITBP प्रमुख ने कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और एंटीड्रोन तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ी है। रूसयूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े संघर्षों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अब केवल पारंपरिक सैन्य तरीकों के भरोसे रहना पर्याप्त नहीं है। चीन ने भी अपने सैन्य संसाधनों और तकनीक का आधुनिकीकरण किया है, इसलिए भारत को अपनी क्षमताएं लगातार बढ़ानी होंगी। उन्होंने बताया कि ITBP ने सीमावर्ती इकाइयों में ड्रोन प्लाटून तैयार की हैं। बल के आधुनिकीकरण के लिए मिलने वाले बजट का बड़ा हिस्सा ड्रोन तकनीक पर खर्च किया जा रहा है। इसके साथ ही ड्रोन संचालन और उनसे निपटने की क्षमताओं को बेहतर बनाने पर काम हो रहा है।
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सीमा पर भूमिगत बंकर बनाने की तैयारी
ITBP प्रमुख ने सीमावर्ती इलाकों में भूमिगत शेल्टर और बंकर बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध जैसी स्थिति में जमीन के ऊपर बने ढांचे निशाना बन सकते हैं, इसलिए जवानों की सुरक्षा के लिए भूमिगत सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं। भारत और चीन के बीच सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी है। इसके बावजूद अरुणाचल प्रदेश में आमनेसामने की स्थिति बने रहने की ITBP प्रमुख की पुष्टि ने सीमा सुरक्षा और सैन्य तैयारियों को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
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