पुलिस एडवाइजरी: मोबाइल अचानक धीमा पड़े तो रहें सतर्क, हो सकता है साइबर जोखिम का संकेत

शिमला; मोबाइल अचानक धीमा पड़ जाए, एप सामान्य तरीके से काम न करें या अनजान एप और पॉपअप दिखाई देने लगे तो इसे नजरअंदाज न करें। यह मालवेयर, संदिग्ध एप, बिना अनुमति मोबाइल तक पहुंच या अकाउंट सिंक्रोनाइजेशन में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। हालांकि, फोन का असामान्य व्यवहार दिखना अपने आप में वायरस या साइबर हमले का प्रमाण नहीं है। ऐसे में घबराने के बजाय सावधानी बरतते हुए मोबाइल को सुरक्षित करना जरूरी है। हिमाचल प्रदेश साइबर पुलिस के अनुसार मोबाइल का अचानक धीमा होना, अनजान एप का दिखना, बार-बार पॉप-अप आना, बैटरी या इंटरनेट डाटा का असामान्य रूप से अधिक इस्तेमाल होना अथवा ऑनलाइन खातों में बिना अनुमति गतिविधि दिखाई देना संभावित साइबर जोखिम की चेतावनी हो सकती है।

संदिग्ध गतिविधि महसूस होने पर ये करें
संदिग्ध गतिविधि महसूस होने पर तुरंत एयरप्लेन मोड ऑन करें और वाई-फाई व ब्लूटूथ बंद कर दें। इससे संभावित अनधिकृत नेटवर्क कनेक्शन को सीमित किया जा सकता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। फोन से कॉन्टेक्ट या अन्य जानकारी अचानक गायब दिखाई दे तो इसे तुरंत डाटा चोरी न मानें। गूगल अकाउंट या क्लाउड सिंक्रोनाइजेशन में गड़बड़ी के कारण भी ऐसा हो सकता है। पहले अकाउंट और सिंक्रोनाइजेशन सेटिंग की जांच करें। संदिग्ध एप हटाने से पहले स्क्रीनशॉट, संदेश, फोन नंबर, एप का नाम और लेनदेन से जुड़े विवरण जैसे डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें। वित्तीय ठगी होने पर तुरंत बैंक को सूचना दें और साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। समय पर सूचना देने से ठगी की रकम पर कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है।

अनजान के कहने पर एपीके फाइल न करें डाउनलोड
पुलिस ने लोगों को अनजान व्यक्ति के कहने पर एपीके फाइल, स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड न करने की सलाह दी है। ठग अकसर बैंक अधिकारी, तकनीकी सहायता कर्मचारी, पुलिस अधिकारी या किसी प्रतिष्ठित संस्था का प्रतिनिधि बनकर ऐसे एप डाउनलोड करवाते हैं। ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम या डेबिट कार्ड पिन, पासवर्ड और बैंकिंग संबंधी अन्य जानकारी किसी के साथ साझा न करें। तकनीकी या बैंकिंग मदद के लिए अनजान व्यक्ति के दिए नंबर या लिंक के बजाय संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से ही संपर्क करें।