पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में असम पुलिस की STF ने बिहार के दो युवकों को गिरफ्तार किया है. इनमें पूर्वी चंपारण का अभिषेक कुमार सिंह और बेगूसराय का रीतेश कुमार सिंह शामिल है.

Patna News: भारत की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान तक पहुंचाने के आरोप में असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बिहार के दो युवकों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पूर्वी चंपारण निवासी 31 वर्षीय अभिषेक कुमार सिंह और बेगूसराय निवासी 39 वर्षीय रीतेश कुमार सिंह के रूप में हुई है. पुलिस इस मामले में दोनों के पाकिस्तान कनेक्शन और जासूसी नेटवर्क की जांच कर रही है.
पूर्व सेना के जवान पर गंभीर आरोप
इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि मुख्य आरोपी बताए जा रहे अभिषेक कुमार सिंह का सेना से कनेक्शन रहा है. पुलिस के अनुसार, वह भारतीय सेना से जुड़ा रहा है और सेवानिवृत्ति के बाद अनुबंध के आधार पर दोबारा सेना से संबंधित काम कर रहा था. आरोप है कि इसी दौरान उसके पास मौजूद संवेदनशील सैन्य जानकारियां पाकिस्तान के एक इंटेलिजेंस ऑपरेटिव तक पहुंचाई गईं. हालांकि, इन आरोपों की पूरी पुष्टि जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी.
मिलिट्री इंटेलिजेंस के इनपुट पर शुरू हुई जांच
असम पुलिस के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत सेना की मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिले इनपुट के बाद हुई. जानकारी मिली थी कि गुवाहाटी में रहने वाला अभिषेक राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल है और पाकिस्तान के एक कथित खुफिया ऑपरेटिव के संपर्क में है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इनपुट मिलने के बाद असम पुलिस की STF ने मामले की जांच शुरू की. जांच के दौरान अभिषेक को गिरफ्तार किया गया.
अभिषेक के पास से मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड, पाकिस्तान से जुड़े कुछ दस्तावेज और अन्य संदिग्ध सामग्री मिली है. जब्त किए गए मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि संवेदनशील जानकारी किस तरह पाकिस्तान तक भेजी जाती थी.
अभिषेक की गिरफ्तारी के बाद रीतेश तक पहुंची पुलिस
अभिषेक की गिरफ्तारी के बाद STF ने मामले की जांच और तेज कर दी. पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस को दूसरे संदिग्ध के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद बेगूसराय निवासी रीतेश कुमार सिंह को गुवाहाटी के सतगांव थाना क्षेत्र के गांधीनगर इलाके में एक किराए के मकान से गिरफ्तार किया गया. पुलिस का आरोप है कि रीतेश भी पाकिस्तान के इंटेलिजेंस ऑपरेटिव के संपर्क में था और उसने अभिषेक की गतिविधियों में मदद की. अब दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन, सिम कार्ड, सोशल मीडिया अकाउंट और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की जा रही है.
हनीट्रैप का एंगल भी जांच के दायरे में
इस मामले में जांच एजेंसियां हनीट्रैप के एंगल की भी पड़ताल कर रही हैं. आशंका है कि पाकिस्तान से जुड़े हैंडलर्स सोशल मीडिया या दूसरे डिजिटल माध्यमों के जरिए भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े लोगों को अपने संपर्क में लाते थे. इसके बाद उनसे संवेदनशील जानकारियां हासिल करने की कोशिश की जाती थी. हालांकि, इस मामले में हनीट्रैप की भूमिका कितनी है और इसका इस्तेमाल किस तरह किया गया, यह जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा.
असम के मुख्यमंत्री ने भी गिरफ्तारी की पुष्टि की
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने भी दो लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी है. उनके मुताबिक, केंद्रीय एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर कार्रवाई की गई. गिरफ्तार लोगों में सेना का एक पूर्व जवान भी शामिल है, जो रिटायरमेंट के बाद अनुबंध के आधार पर फिर से सेना से जुड़े काम में लगा था.
वहीं, पूर्वी चंपारण के एसपी स्वर्ण प्रभात ने भी अभिषेक कुमार सिंह की गिरफ्तारी की जानकारी मिलने की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर आरोपी के परिवार और उसकी पृष्ठभूमि के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है.
कितने समय से पाकिस्तान के संपर्क में थे दोनों?
अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों आरोपी कितने समय से पाकिस्तान के संपर्क में थे और उन्होंने अब तक कितनी संवेदनशील जानकारी साझा की. जांच एजेंसियां उनके मोबाइल चैट, कॉल डिटेल, सोशल मीडिया अकाउंट, डिजिटल लेन-देन और दूसरे संपर्कों की जांच कर सकती हैं. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में उनके अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं.



