बिहार में रेल कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने की तैयारी तेज हो गई है. राज्य में रेल यातायात का दबाव कम करने, ट्रेनों की आवाजाही बढ़ाने और यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए रेलवे कई बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है. इसी कड़ी में भोजपुर जिले के कोइलवर में सोन नदी पर बनने वाला चार लेन का नया रेल पुल बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. रेलवे बोर्ड ने इस पुल के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसके निर्माण पर करीब 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.

यह पुल मौजूदा कोइलवर रेल पुल के समानांतर बनाया जाएगा. इसके बनने से हावड़ापटनाडीडीयू रेल मार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही की क्षमता बढ़ेगी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इस परियोजना को बिहार के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. सितंबर 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार, पूर्व मध्य रेलवे ने परियोजना की रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेज दी है. इसके बाद प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया प्रस्तावित है.
400 किलोमीटर का मेगा रेल प्रोजेक्ट
कोइलवर रेल पुल के साथ ही बिहार में डीडीयू यानी पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से झाझा तक करीब 400 किलोमीटर लंबे रेलखंड की क्षमता बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है. इस परियोजना पर लगभग 17 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
इस योजना के तहत डीडीयू से किऊल तक तीसरी और चौथी रेल लाइन तथा किऊल से झाझा तक तीसरी रेल लाइन का निर्माण किया जाना है. पूरी परियोजना को छह चरणों में बांटा गया है, ताकि अलगअलग रेलखंडों पर चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य कराया जा सके.
परियोजना के छह प्रमुख रेलखंड हैं:
- डीडीयू से दानापुर
- दानापुर से फतुहा
- फतुहा से बख्तियारपुर
- बख्तियारपुर से पुनारख
- पुनारख से किऊल
- किऊल से झाझा
पहले चरण में डीडीयू से दानापुर तक 203 किलोमीटर का विस्तार
योजना के पहले प्रमुख चरण में डीडीयू से दानापुर के बीच लगभग 203 किलोमीटर रेलखंड की क्षमता बढ़ाने की तैयारी है. इसी रेलखंड के अंतर्गत कोइलवर में सोन नदी पर नए चार लेन के रेल पुल का निर्माण प्रस्तावित है. इसके अलावा दानापुरफतुहा, फतुहाबख्तियारपुर, बख्तियारपुरपुनारख और पुनारखकिऊल रेलखंडों में अतिरिक्त रेल लाइनें बिछाई जाएंगी. रेलवे की योजना है कि अलगअलग खंडों के निर्माण और पुलों के काम को समन्वित तरीके से आगे बढ़ाया जाए.
कई रेलखंडों पर स्वीकृति और टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ी
परियोजना के विभिन्न हिस्सों पर स्वीकृति और निर्माण की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है. किऊलझाझा के बीच 54 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन के लिए मई 2026 में 962 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी. इस हिस्से में महत्वपूर्ण रेल पुलों के निर्माण के लिए भी टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है. वहीं दानापुरफतुहा, फतुहाबख्तियारपुर और बख्तियारपुरपुनारख जैसे रेलखंडों पर भी अलगअलग स्तर पर निर्माण और स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है.
क्यों जरूरी है यह परियोजना?
दरअसल, डीडीयूपटनाकिऊलझाझा रेल मार्ग हावड़ादिल्ली जैसे व्यस्त रेल कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस रूट पर यात्री ट्रेनों के साथसाथ मालगाड़ियों का भी काफी दबाव रहता है. मौजूदा रेल लाइनों पर ट्रेनों की संख्या बढ़ने से कई बार परिचालन प्रभावित होता है. व्यस्त समय में ट्रेनों को रास्ते में रोकना पड़ता है, जिससे यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ता है.
अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से ट्रेनों को एकदूसरे के लिए रास्ता खाली करने का इंतजार कम करना पड़ेगा. यात्री और मालगाड़ियों के परिचालन के लिए अधिक क्षमता उपलब्ध होगी. इससे ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने और भविष्य में नई ट्रेनों के संचालन का रास्ता भी खुल सकता है.
बिहार के उद्योग और व्यापार को भी मिलेगा फायदा
इस मेगा प्रोजेक्ट का फायदा केवल रेल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा. अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से मालगाड़ियों की आवाजाही भी अधिक सुगम हो सकेगी. इससे उद्योगों तक कच्चा माल पहुंचाने और तैयार उत्पादों को दूसरे राज्यों के बाजारों तक भेजने में सुविधा मिलेगी.
खासकर पटना, भोजपुर, बक्सर, आरा, लखीसराय, मुंगेर और जमुई जैसे क्षेत्रों को बेहतर रेल परिचालन का लाभ मिल सकता है. इसके साथ ही निर्माण कार्यों के दौरान रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा. कोइलवर में सोन नदी पर नया चार लेन का रेल पुल और डीडीयू से झाझा तक अतिरिक्त रेल लाइनों का निर्माण बिहार के रेल नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल है.



