
Iran War Update: ईरान पर इजरायल के हमले के साथ ही मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की शुरुआत हो गई है. इजरायली मिसाइलों ने तेहरान को निशाना बनाया. 30 से ज्यादा जगहों पर मिसाइलें दागी गई. राष्ट्रपति के निवास, दफ्तर, इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट जैसे प्रमुख स्थलों, सरकारी भवनों, एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया है. इजरायली हमले के बाद ईरान में स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं, बिजली, फोन, इंटरनेट सब बंद कर दिए गए हैं. तेहरान में पूरी तरह से ब्लैकआउट है. ईरान का एयर स्पेस बंद कर दिया गया है. भारत से 2139 किलोमीटर छिड़ी इस जंग की आंच नई दिल्ली तक पहुंचेगी. मिडिल ईस्ट की जंग भारत में भी तापमान बढ़ाएगी.
ईरान पर इजरायल के हमले का क्या होगा असर ?
ईरान के पास 158 बिलियन बैरल कच्चा तेल है. वो मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, लेकिन अमेरिकी सैंक्शंस की वजह से वो पूरी क्षमता नहीं दिखा पाता. वित्त वर्ष 2024-25 में अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान का तेल निर्यात औसतन 1.5 से 1.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन (b/d) के बीच रहा. ईरान के प्रमुख खरीदारों की लिस्ट में भारत, चीन, अमेरिका, इराक, जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, यमन, कुवैत, यूएई, वेनेजुएला जैसे देश शामिल हैं. चीन ईरान का सबसे बड़ा तेल आयातक देश है. मिडिल ईस्ट में तनाव से पहले तक चीन ईरान से रोजाना 18 लाख बैरल तेल खरीदता रहा है. अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते ईरान तेल पर भारी भरकम डिस्काउंट देता है, जिसका फायदा सबसे ज्यादा चीन उठाता रहा है. भारत की बात करें तो ईरान, सऊदी अरब और यूएई समेत खाड़ी देशों से कच्चे तेल का आयात 40 फीसदी और एलएनजी का 50 फीसदी है. ईरान में जंग छिड़ने से कच्चे तेल के ग्लोबल सप्लाई पर संकट मंडराने लगा है. ट्रंप की ईरानी लीडरशिप को चुनौती- मिसाइल इंडस्ट्री करेंगे तबाह, सरेंडर करो; वर्ना खत्म कर देंगे
भारत में तेल का महासंकट
ईरान पर इजरायली हमले के बाद भारत को तेल संकट का सामना करना पड़ सकता है. भारत भले ही ईरानी तेल का विक्लप खोज ले, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य का विकल्प नहीं खोज सकता है. दरअसल होर्मुज के संकरे रास्ते को तेल का ‘लाइफलाइन’ कहा जाता है. इसी रास्ते से दुनिया के 20 फीसदी कच्चे तेल का आयात-निर्यात होता है. भारत के कुल तेल आयात का 50 फीसदी इसी रास्ते से होकर आता है. सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर जैसे देशों से तेल इसी हार्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों में पहुंचता है. यु्द्ध की वजह से अगर ये रास्ता बंद हुआ तो इन देशों को तेल के महासंकट से गुजरना पड़ सकता है. अगर 1980 की तरह ईरान ने इस रास्ते पर पाबंदी लगाई तो ग्लोबल चेन सप्लाई ठप पड़ सकता है. इसका सीधा असर भारत की तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. कॉमर्स डिपार्टमेंट की डेटा के मुताबिक, साल 2024-25 में भारत और ईरान के बीच लगभग 1.68 बिलियन अमेरिकी डॉलर का कारोबार हुआ. भारत ने 1.24 बिलियन डॉलर का सामान एक्सपोर्ट तो इम्पोर्ट 0.44 बिलियन डॉलर था.
भारत को कितना नुकसान, बढ़ सकती है तेल की कीमतें
‘होर्मुज की खाड़ी’ (Strait of Hormuz) बंद होने से भारत की मुश्किल बढ़ेगी. इस रास्ते के बंद होने से ऑयल सप्लाई में कमी, माल ढुलाई और बीमा लागत में बढ़ोतरी होगी. कच्चे तेल की कीमतों पर बोझ बढ़ेगा. भारत के लिए तेल आयात का बिल बढ़ेगा. वहीं युद्ध की वजह से तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल सकती है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ब्रोकरेज फर्म Equirus Securities की माने तो ईरान पर हमले की वजह से अगर तेल की सप्लाई रुकती है तो क्रूड ऑयल की कीमत 95 से 110 डॉलर प्रंति बैरल तक पहुंच सकती है. मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 73.19 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. ऑयल प्राइस सात महीने के हाई पर है. सिर्फ तेल ही नहीं केमिकल्स, पेंट, पेट्रोकेमिकल्स और सिंथेटिक कपड़ों से जुड़े सेक्टर्स पर असर पड़ेगा. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और बढ़ते आयात लागत का दबाव तेल कंपनियां बहुत दिन तक बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी. ऐसे में इसका असर आम जनता पर होगा. जानकारों की माने तो कच्चे तेल की कीमत और लागत बढ़ने से भारत में पेट्रोल की कीमतों में बड़ी तेजी आ सकती है.
सिर्फ तेल ही नहीं शेयर और सोना दोनों पर दिखेगा असर
ईरान पर हमले का असर सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रहने वाला है. ग्लोबल टेंशन का इफैक्ट शेयर बाजार को भी हिलाएगा. इजरायली मिसाइलें जो आज ईरान पर गिरी हैं, वो भारत के शेयर बाजार को भी घायल करेंगी. ग्लोबल टेंशन बढ़ने से बाजार का सेंटीमेंट बिगड़ेगा, जिसकी वजह से मार्केट क्रैश हो सकता है. वहीं सोना भी इस चोट से खुद को बचा नहीं पाएगा. जियो पॉलिटिकल टेंशन सोने को और मजबूत करेंगे. निवेशक बाजार की हलचल की वजह से पैसा निकालकर सोने में लगाएंगे. मांग बढ़ने से सेफ हैवन सोने का भाव बढ़ेगा. यानी ईरान पर हमले की वजह से सोना और महंगा हो सकता है. इतना ही नहीं ये जंग भारत में महंगाई का तूफान ला सकती है, वो तूफान , जिसे रोकना आसान नहीं होगा. रसोई से लेकर कार चलाने का बिल बढ़ेगा, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी तेजी आ सकती है. पेट्रोल-डीजल के दाम अर्थव्यवस्था पर असर डालते हैं.






