कुल्लू। हिमाचल प्रदेश का अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा इस बार आस्था, लोक संस्कृति और आधुनिक तकनीक के संगम के रूप में नजर आने वाला है। 21 से 27 अक्टूबर तक चलने वाले इस उत्सव में इस बार 347 देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजे जाने की जानकारी है। वहीं, ग्लोबल डांस, विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियां और 500 ड्रोन के लाइट शो जैसी योजनाएं इस बार के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं।

347 देवी-देवताओं को न्योता, पिछले साल से बढ़ी संख्या
कुल्लू दशहरा की पहचान देवी-देवताओं के महा समागम से है। पिछले साल 332 देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया था। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। जबकि, इस बार 15 नए देवी-देवताओं को भी निमंत्रण भेजे गए हैं। यह महा समागम कुल्लू की सदियों पुरानी देव-संस्कृति और जन-आस्था का जीवंत प्रतीक है।
दूर-दराज के गांवों से देवी-देवताओं की पालकियां पारंपरिक साज-बाज और श्रद्धालुओं के साथ ढालपुर मैदान पहुंचती हैं। देवी-देवताओं को आधिकारिक निमंत्रण देने की परंपरा में उनके ऐतिहासिक महत्व और पारंपरिक मान्यता की अहम भूमिका रहती है।
पहली बार ग्लोबल डांस, 12 देशों के कलाकार दिखाएंगे हुनर
इस बार दशहरा उत्सव के लिए कई तरह के खास इंतजाम भी किए गए हैं। इस साल ग्लोबल डांस कार्यक्रम के जरिए विभिन्न देशों की सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच पर लाने की तैयारी है। इसमें विदेशी कलाकारों के साथ हिमाचल के लोक कलाकार भी प्रस्तुति देंगे। थाईलैंड, इजिप्ट, उज्बेकिस्तान, रूस, कजाकिस्तान और अमेरिका सहित कई देशों के कलाकारों की भागीदारी की जानकारी सामने आई है। इससे उत्सव में अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक रंग देखने को मिलेगा।
500 ड्रोन और लेजर शो की तैयारी
इस बार के उत्सव में आधुनिक तकनीक भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। आयोजन समिति ने 500 ड्रोन के लाइट शो और लेज़र शो की तैयारियां की हैं। इनके जरिए आसमान में रोशनी और आकर्षक आकृतियों का प्रदर्शन करने की योजना है। लेज़र शो से संबंधित संशोधित टेंडर में रामायण की कथा को थीम के रूप में शामिल किया गया है। ऐसे में दर्शकों को आधुनिक तकनीक के जरिए रामायण से जुड़े प्रसंग देखने को मिल सकते हैं।
1,265 पुलिस और होमगार्ड जवान संभालेंगे सुरक्षा
इस सात दिवसीय उत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और होमगार्ड के कुल 1,265 जवान तैनात किए गए हैं। इनमें 1,125 पुलिस कर्मी और 140 होमगार्ड जवान शामिल हैं। पूरे मेला क्षेत्र को छह सेक्टरों में बांटा गया है, जिनकी निगरानी डीएसपी रैंक के आठ अधिकारी करेंगे। भीड़ पर नजर रखने के लिए 155 सीसीटीवी कैमरों और 5 ड्रोन कैमरों की मदद ली जाएगी। इसके लिए केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से निगरानी की व्यवस्था की गई है।
17वीं सदी से जुड़ा है इतिहास
कुल्लू दशहरा का इतिहास 17वीं सदी से जुड़ा है। मान्यता के अनुसार, राजा जगत सिंह अयोध्या से भगवान रघुनाथ की मूर्ति कुल्लू लाए थे और उन्हें राज्य का इष्टदेव स्वीकार किया था। तभी से भगवान रघुनाथ को कुल्लू घाटी का प्रमुख आराध्य देव माना जाता है। इसी परंपरा के तहत हर साल दशहरे के दौरान घाटी के अलग-अलग क्षेत्रों से सैकड़ों देवी-देवता अपनी पालकियों और पारंपरिक साज-बाज के साथ कुल्लू पहुंचते हैं।
यहां वे भगवान रघुनाथ से मिलने और उन्हें नमन करने के बाद सात दिवसीय उत्सव में शामिल होते हैं। देश के कई हिस्सों में विजयादशमी पर दशहरा समाप्त हो जाता है, जबकि कुल्लू में इसी दिन उत्सव की शुरुआत होती है। यहां रावण दहन की जगह भगवान रघुनाथ की रथयात्रा और देवी-देवताओं का महा समागम उत्सव के प्रमुख आकर्षण होते हैं।
कला केंद्र का नवीनीकरण, स्थानीय संस्कृति पर भी जोर
इस साल लाल चंद प्रार्थी कला केंद्र का नवीनीकरण भी किया गया है। यह केंद्र सांस्कृतिक संध्याओं का प्रमुख स्थल है, जहां विभिन्न क्षेत्रों के कलाकार प्रस्तुतियां देते हैं। उत्सव के दौरान लोक नृत्य, संगीत, खेल प्रतियोगिताओं और नशामुक्ति अभियान जैसी गतिविधियों पर भी जोर रहेगा।
इसके अलावा, जिला प्रशासन ने अलग-अलग स्थानों पर LED स्क्रीन और कार्यक्रमों के लाइव प्रसारण के लिए भी टेंडर जारी किए हैं। स्थानीय उत्पादों और हस्तशिल्प के स्टॉल के माध्यम से क्षेत्र के कारोबार और कारीगरों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
21 अक्टूबर से शुरू होगा सात दिवसीय उत्सव
अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा 21 अक्टूबर को शुरू होकर 27 अक्टूबर तक चलेगा। राज्यपाल कविंदर गुप्ता उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे, जबकि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू समापन समारोह में शिरकत करेंगे। इस बार बढ़ती देव सहभागिता, अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आधुनिक तकनीक से जुड़े आकर्षणों के चलते उत्सव पर लोगों की खास नजर रहेगी।



