
Gold Price Outlook: पेशे से सिविल इंजीनियर राहुल वर्मा ने पिछले दिनों सोने में तेजी को लेकर किये जा रहे दावों को पढ़ने के बाद निवेश कर दिया. लेकिन मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल अमेरिका की जंग के बीच भी सोने में सुस्ती देखी जा रही है. ऐसे में उनके मन में यही सवाल आ रहा है कि आने वाले समय में सोना ऊपर जाएगा या फिर इसके दाम में गिरावट आएगी. जंग के कारण मिडिल ईस्ट में टेंशन चरम पर है. होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आवागमन बंद होने के बाद तेल की कीमत में उछाल देखा जा रहा है.
इस सबके बीच भी सोने और चांदी के दाम में सुस्ती देखी जा रही है. आमतौर पर माना यही जाता है कि जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच निवेशक सेफ हेवन की तलाश में गोल्ड में इनवेस्ट करते हैं. इसका असर कीमत में तेजी के रूप में देखा जाता है. लेकिन इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में सोने पुराने लेवल के आसपास ही ट्रेड कर रहा है. जबकि जनवरी महीने में यह 1.92 लाख रुपये का रिकॉर्ड हाई बना चुका है. इसी तरह चांदी ने भी 4 लाख के पार जाकर रिकॉर्ड बनाया था.
एक लेवल पर ही क्यों बने हुए हैं सोने-चांदी के दाम?
राहुल और उनके जैसे तमाम लोगों ने तेजी की खबर देखकर सोने में जो निवेश किया था, फिलहाल वो निराश हो रहे हैं. इस तरह के निवेशकों की चिंता को लेकर हमने बात की पृथ्वी फिनमार्ट के डायरेक्टर मनोज कुमार जैन से. जी न्यूज से उनसे बातचीत में उन्होंने बताया कि पिछले दिनों रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचने वाले सोने-चांदी के दाम अब एक लेवल पर ही क्यों बने हुए हैं? उन्होंने दाम में सुस्ती का कारण बताने के साथ ही आने वाले दिनों की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा की.
सोने के दाम स्थिर रहने के 3 कारण
ग्लोबल स्पॉट गोल्ड 5100 से 5200 डॉलर प्रति औंस के करीब ट्रेड कर रहा है. कुछ दिन पहले इसका रेट 5400 डॉलर प्रति औंस के पार चला गया था. घरेलू बाजार में 24K गोल्ड का रेट 1.61 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब है. वहीं, चांदी 2.65 लाख रुपये प्रति किलो के करीब ट्रेड कर रही है. पृथ्वी फिनमार्ट के डायरेक्टर मनोज कुमार जैन ने सोने के दाम स्थिर रहने के 3 कारण बताएं-
मजबूत अमेरिकी डॉलर इंडेक्स
जब दुनिया के किसी भी देश में जंग होती है तो डॉलर मजबूत होता है, क्योंकि निवेशक डॉलर में कैश या यूएस ट्रेजरी की तरफ भागते हैं. मजबूत डॉलर से सोना-चांदी महंगे होते हैं (क्योंकि ये डॉलर में ट्रेड होते हैं), जिससे डिमांड घटती है. मार्च के महीने में ग्लोबल मार्केट में गोल्ड की कीमत नीचे आई है, जबकि US डॉलर इंडेक्स (DXY) मजबूत हो रहा है. 6 मार्च 2026 तक DXY करीब 98.99 पर पहुंचा, जो हाल के महीनों में काफी मजबूत है.
इंफ्लेशन फियर और रेट कट उम्मीद में कमी
ईरान की जंग से तेल की कीमत में 8-10% का उछाल आया है, जिससे इन्फ्लेशन दोबारा बढ़ने का डर है. फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दर में कटौती की बजाय पॉलिसी टाइट रख सकता है या कटौती में देरी कर सकता है. हाई इंटरेस्ट रेट से गोल्ड (जो कोई ब्याज नहीं देता) कम आकर्षक लगता है. बाजार अब रेट कटौती की संभावना को कम करके देख रहा है, इसलिए सेफ-हेवन डिमांड कमजोर पड़ रही है. यही कारण है कि सोने के दाम में सुस्ती देखी जा रही है.
प्रॉफिट बुकिंग और वोलेटिलिटी
सोने की कीमत में साल 2025 और 2026 में जबरदस्त उछाल देखा गया. फरवरी में रेट चढ़कर रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया. इसके बाद ट्रेडर्स ने प्रॉफिट बुकिंग शुरू कर दी. बाजार में शॉर्ट-टर्म करेक्शन देखा जा रहा है, लॉन्ग-टर्म में जियोपॉलिटिकल रिस्क सपोर्टिव है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है और यदि यह टेंशन जारी रही तो आने वाले समय में कीमत फिर उछल सकती है.
एक्सपर्ट की निवेश को लेकर सलाह
मनोज कुमार जैन ने सोने में लॉन्ग टर्म को ध्यान में रखकर निवेश को लेकर सलाह दी. उन्होंने कहा कि ईरान और इजरायल के बीच हालात सामान्य होने के बाद सोने में एक बार फिर से तेजी आएगी. ऐसे में आप अपने पोर्टफोलियो में सोने के निवेश को बरकरार रखें. पैनिक में किसी भी तरह की बिकवाली नहीं करें. आने वाले समय में सोने के रेट ऊपर ही जाएंगे. साल 2026 में सोने के रेट बढ़कर दो लाख रुपये के पार जाने की उम्मीद बरकरार है.



