कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया युद्ध के डर से आज शेयर बाजार धराशायी हो गया। सेंसेक्स और निफ्टी 10 महीने के निचले स्तर पर बंद हुए

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से बेंचमार्क सूचकांक आज फिसलकर करीब 10 महीने के निचले स्तर पर आ गए। पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच तेल में उबाल से निवेशकों को महंगाई बढ़ने, कंपनियों की कमाई तथा आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ने का डर सताने लगा।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स 3.2 फीसदी टूटकर 76,425 अंक के निचले स्तर तक पहुंच गया मगर बाद में नुकसान की थोड़ी भरपाई करते हुए 1.7 फीसदी या 1,353 अंक की गिरावट के साथ 77,566 पर बंद हुआ। अप्रैल 2025 के बाद सेंसेक्स का यह सबसे निचला बंद स्तर है। निफ्टी भी 422 अंक या 1.7 फीसदी के नुकसान के साथ 24,028 पर बंद हुआ, जो मई 2025 के बाद का निचला स्तर है। दोनों सूचकांक में बजट के बाद यह एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। पश्चिम एशिया में टकराव शुरू होने के बाद से बेंचमार्क सूचकांक में करीब 4.6 फीसदी की गिरावट आई है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 8.5 लाख करोड़ रुपये घटकर 441 लाख करोड़ रुपये रह गया।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से बेंचमार्क सूचकांक आज फिसलकर करीब 10 महीने के निचले स्तर पर आ गए। पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच तेल में उबाल से निवेशकों को महंगाई बढ़ने, कंपनियों की कमाई तथा आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ने का डर सताने लगा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 3.2 फीसदी टूटकर 76,425 अंक के निचले स्तर तक पहुंच गया मगर बाद में नुकसान की थोड़ी भरपाई करते हुए 1.7 फीसदी या 1,353 अंक की गिरावट के साथ 77,566 पर बंद हुआ। अप्रैल 2025 के बाद सेंसेक्स का यह सबसे निचला बंद स्तर है। निफ्टी भी 422 अंक के नुकसान के साथ 24,028 पर बंद हुआ, जो मई 2025 के बाद का निचला स्तर है।
दोनों सूचकांक में बजट के बाद यह एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। पश्चिम एशिया में टकराव शुरू होने के बाद से बेंचमार्क सूचकांक में करीब 4.6 फीसदी की गिरावट आई है। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 8.5 लाख करोड़ रुपये घटकर 441 लाख करोड़ रुपये रह गया।
अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के बढ़ते टकराव के बीच बड़े तेल उत्पादकों की ओर से आपूर्ति कम करने और शिपिंग में रुकावट के डर से कच्चा तेल उछल कर करीब 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद करने से तेल की आपूर्ति बाधित हुई है क्योंकि दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की आवाजाही इसी मार्ग के जरिये होती है। मोजतबा खामेनेई को ईरान का सुप्रीम लीडर बनाए जाने से भी निवेशक परेशान हैं क्योंकि इससे संकेत मिला कि तेहरान की सरकार शायद अमेरिका और इजरायल के साथ लड़ाई से जल्दी पीछे नहीं हटेगी।
अगस्त 2022 के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गया है लेकिन रणनीतिक तेल भंडार को समन्वित तरीके से जारी करने की खबर से कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिली और ब्रेंट क्रूड के दाम कम होकर 103 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए।
कच्चे तेल की ज्यादा कीमतें भारत के लिए खास तौर पर चिंता की बात है क्योंकि देश अपनी तेल की जरूरत का ज्यादातर हिस्सा बाहर से मंगाता है। तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई, चालू खाता घाटा बढ़ाती हैं और आर्थिक वृद्धि पर भी इसका असर पड़ता है।
अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट्ट ने कहा, ‘रूस-यूक्रेन युद्ध के उलट, यह दो देशों के बीच कोई झड़प नहीं है। आधा दर्जन दूसरे देशों पर बमबारी हुई है और होर्मुज स्ट्रेट बाधित होने से तेल की कीमतों पर बहुत ज्यादा असर पड़ा है। इसके अलावा अमेरिका इस लड़ाई में सीधे तौर पर शामिल है और दोनों पक्षों के जल्द ही बातचीत के लिए आगे आने के संकेत भी नहीं दिख रहे हैं।’
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 6,346 करोड़ रुपये की के शेयर बेचे। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 9,014 करोड़ रुपये की शुद्ध लिवाली की। बाजार में उठापटक मापने वाला सूचकांक इंडिया वीआईएक्स बढ़कर 23.36 पर पहुंच गया जो जून 2024 के बाद का सबसे उच्च स्तर है।
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