Sunday, February 15, 2026
IndiaPoliticsTrending

क्या लिव-इन पार्टनर को दहेज के नाम पर फंसाया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब!..

क्या लिव-इन पार्टनर को दहेज के नाम पर फंसाया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब!..
क्या लिव-इन पार्टनर को दहेज के नाम पर फंसाया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब!..

डिजिटल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट इस समय एक बेहद महत्वपूर्ण और जटिल कानूनी प्रश्न पर विचार कर रहा है, जिसमें क्या एक विवाहित पुरुष के खिलाफ उसकी लिव-इन पार्टनर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (दहेज प्रताड़ना) के तहत मुकदमा दर्ज करा सकती है?

मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला कर्नाटक के एक हृदय रोग विशेषज्ञ, डॉक्टर लोकेश बीएच से जुड़ा है। लोकेश का विवाह साल 2000 में हुआ था, लेकिन एक अन्य महिला ने दावा किया कि उसका विवाह लोकेश से 2010 में हुआ और उसने उन पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने तथा जलाने के प्रयास का आरोप लगाया। लोकेश ने इन आरोपों को नकारते हुए तर्क दिया कि उनके और महिला के बीच कभी कोई वैध विवाह नहीं हुआ, इसलिए धारा 498A लागू ही नहीं होती।

हाई कोर्ट बनाम सुप्रीम कोर्ट
कर्नाटक हाई कोर्ट ने डॉक्टर की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि धारा 498A के प्रावधान लिव-इन रिलेशनशिप पर भी लागू हो सकते हैं। इस फैसले को चुनौती देते हुए डॉक्टर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उनके वकील का तर्क है कि कानून के स्पष्ट प्रावधानों के अनुसार, केवल ‘वैध पत्नी’ ही पति या उसके रिश्तेदारों के खिलाफ यह शिकायत दर्ज करा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट का क्या है रुख?
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने इस सवाल को ‘विचारणीय’ माना है। न्यायालय ने केंद्र सरकार से इस पर जवाब मांगा है और वरिष्ठ अधिवक्ता नीना नरिमन को ‘एमिकस क्यूरी’ (अदालती सलाहकार) नियुक्त किया है। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या “विवाह के समान” (Marriage-like) लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले पुरुष पर दहेज प्रताड़ना का मुकदमा चलाया जा सकता है या नहीं।

me.sumitji@gmail.com

Leave a Reply