चीन से लगी भारतीय सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए भारत ने अपनी तैयारियों को और तेज किया है. इसी कड़ी में भारततिब्बत सीमा पुलिस की नई ‘शौर्य’ कमांडो प्लाटून को खास ट्रेनिंग दी जा रही है. भारतीय सेना की ‘फायर एंड फ्यूरी कोर’ के साथ ये कमांडो ऊंचे पहाड़ी इलाकों में अभियान चलाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं. इस ट्रेनिंग में मॉर्डन हथियार चलाने, पहाड़ों पर मुश्किल सिचुएशन में आगे बढ़ने, ड्रोन का इस्तेमाल करने और बिना हथियारों के मुकाबला करने जैसे कौशल शामिल हैं.

अरुणाचल प्रदेश से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव बढ़ने की खबर है. ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने 22 अक्टूबर को बताया कि सीमा के कई स्थानों पर दोनों सेनाओं के बीच आमनासामना हुआ. उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के दौरान ITBP के नए ‘शौर्य कमांडो’ ने सक्रिय भूमिका निभाई.

स्पेशल तौर पर दी जा रही है ट्रेनिंग

शौर्य कमांडो को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि सीमा पर किसी भी आपात स्थिति में वो तेजी से कार्रवाई कर सकें. भारतीय सेना की फेमस ‘घातक’ प्लाटून की तर्ज पर हाल ही में इसे गठित किया गया है. हिमालय के कई इलाकों में बेहद कम तापमान, ऊंचाई और दुर्गम रास्ते सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती होते हैं. ऐसे में विशेष रूप से ट्रेन्ड कमांडो सीमा की निगरानी और घुसपैठ रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

सरकार ने की 400 करोड़ रुपये की फंडिंग

अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ कई जगहों पर जारी गतिरोध के दौरान ITBP के शौर्य कमांडो अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर चुके हैं. ITBP प्रमुख शत्रुजीत सिंह कपूर के मुताबिक, हर बॉर्डर बटालियन में कमांडो तैनात करने की योजना है. इसके जरिए चीन के साथ 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा व्यवस्था और युद्ध की तैयारियों को मजबूत किया जाएगा. उन्होंने आगे बताया कि ITBP को सरकार से 400 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली है. इसमें से 70 फीसदी राशि ड्रोन युद्ध क्षमता को मजबूत करने पर खर्च की जाएगी, ताकि निगरानी और सैन्य अभियानों में ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ाया जा सके.

घातक प्लाटून की तर्ज पर किया गया तैयार

‘शौर्य’ कमांडो को भारतीय सेना की ‘घातक’ प्लाटून की तर्ज पर ट्रेन किया जा रहा है, लेकिन दोनों की जिम्मेदारियां और काम करने का तरीका अलगअलग है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। सेना की घातक प्लाटून दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने, टोह लेने और विशेष सैन्य अभियानों में आगे रहने के लिए ट्रेन की जाती है. वहीं इसके अपोजिट, ITBP की शौर्य प्लाटून का मुख्य जोर चीन से लगी सीमा की सुरक्षा, घुसपैठ रोकने और अचानक पैदा होने वाले तनाव से निपटने पर है.

43 दिन का मुश्किल कमांडो कोर्स

घातक प्लाटून को 43 दिन का कमांडो कोर्स कराया जाता है, इसकी सबसे अहम बात यह है कि इसमें जवानों की ताकत, सहनशक्ति, मानसिक मजबूती और युद्ध के दौरान काम करने की क्षमता को परखा जाता है. 2020 की रिपोर्टों के मुताबिक, यह कोर्स कर्नाटक के बेलगावी स्थित भारतीय सेना के कमांडो ट्रेनिंग स्कूल में कराया जाता था. हालांकि, ITBP की ट्रेनिंक के लिए कोई पर्टीकुलर कोर्स की जानकारी नहीं मिली है.

शौर्य कमांडो की खास ट्रेनिंग में क्याक्या शामिल है?

  • मॉर्डन हथियार चलाने की प्रैक्टिस: जवानों को नए हथियारों के इस्तेमाल और कठिन परिस्थितियों में काम करने की ट्रेनिंग दी जाती है.
  • पहाड़ों पर लड़ने की तैयारी: ऊंचाई वाले इलाकों में चढ़ाई, कठिन रास्तों पर आगे बढ़ने और विपरीत मौसम में अभियान चलाने की प्रैक्टिस कराई जाती है.
  • ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग: निगरानी और अभियान के दौरान ड्रोन का इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाई जाती है.
  • बिना हथियार मुकाबला: आमनेसामने की झड़प या हाथापाई जैसी स्थिति से निपटने के लिए जवानों को विशेष अभ्यास कराया जाता है.
  • सेना के साथ तालमेल: ज्वॉइंट ट्रेनिंग का मकसद है कि जरूरत पड़ने पर ITBP और सेना एकदूसरे के साथ बेहतर तालमेल से काम कर सकें.

2020 के बाद क्यों महसूस हुई शौर्य कमांडो की जरूरत?

भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर लंबे समय से सीमा को लेकर तनाव रहा है. जून 2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इस घटना में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे. इसके बाद सीमा पर निगरानी, सैनिकों की तैनाती और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया.

दैनिक ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, शौर्य कमांडो प्लाटून का गठन ITBP का मॉर्जनाइजेशन अभियान का हिस्सा है. इसका मकसद ऐसे जवानों की स्पेशल ट्रूप तैयार करना है, जो ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तेजी से कार्रवाई कर सके. ये कमांडो ITBP की बटालियनों का हिस्सा हैं और जरूरत पड़ने पर सीमा पर पैदा होने वाली चुनौती का सामना करने में मदद करेंगे.

शौर्य कमांडो से जुड़ी खास बातें

  • चीन सीमा पर सीधे भूमिका: 23 अक्टूबर 2026 को ITBP के डायरेक्टर जनरल शत्रुजीत सिंह कपूर ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ कई जगहों पर आमनासामना हुआ है और शौर्य कमांडो टीमों ने इस दौरान अच्छा प्रदर्शन किया.
  • हर बटालियन में कमांडो टीम: ITBP प्रमुख के मुताबिक, हर बटालियन में शौर्य कमांडो टीम बनाई गई है. इसके अलावा, अतिरिक्त टीमें बनाने और कमांडो क्षमता बढ़ाने की योजना है.
  • सेना के साथ स्पेशल ट्रेनिंग: मार्च 2026 में इन कमांडो ने लद्दाख में भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर के साथ आधुनिक हथियारों, पर्वतारोहण, ड्रोन संचालन और बिना हथियार मुकाबले का प्रशिक्षण लिया.

ट्रेनिंग में 1520 तरह के फाइटिंग मूव्स शामिल

‘शौर्य’ कमांडो प्लाटून को स्पेशल ट्रेनिंग में जूडो, कराटे और क्राव मागा जैसी मार्शल आर्ट तकनीकों पर बेस्ड 15 से 20 तरह के फाइटिंग मूव्स शामिल हैं. इनमें मुक्का मारना, किक करना, विरोधी को पटकना, उसके जोड़ों को लॉक करना और उसे जमीन पर काबू करना जैसी तकनीकें सिखाई जाती हैं.

ITBP की कई चौकियां समुद्र तल से 9,000 से 18,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं, जहां ऑक्सीजन की कमी और खराब मौसम बड़ी चुनौती बनते हैं. सर्दियों में यहां तापमान माइनस 45 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है. ऐसे कठिन हालात में जवानों को हर चुनौती से निपटने के लिए शारीरिक रूप से मजबूत और पूरी तरह प्रशिक्षित रखना जरूरी है.

फायर एंड फ्यूरी कोर के साथ क्यों हो रही ट्रेनिंग?

भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर का मुख्यालय लेह में है. यह सेना की 14वीं कोर है और लद्दाख क्षेत्र में सैन्य अभियानों की जिम्मेदारी संभालती है. इसी कोर के साथ शौर्य कमांडो की ज्वॉइंट ट्रेनिंग कराई गई है. इस ट्रेनिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सेना और ITBP के जवान एकदूसरे के काम करने के तरीके को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे.

सीमा पर तनाव बढ़ने या अचानक किसी घटना के दौरान दोनों बलों के बीच बेहतर तालमेल से तुरंत कदम उठाने में मदद मिल सकती है. ITBP केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है. करीब 98,000 जवानों वाली ITBP को लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक फैली 3,488 किलोमीटर लंबी LAC की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

जानकारी के मुताबिक, 31 मार्च 2024 को ITBP में तैनात 90,491 जवानों में से 3,778 महिलाएं थीं. हालांकि, शौर्य कमांडों में भी महिलाएं हैं इसकी जानकारी नहीं है. लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक कई क्षेत्रों में ITBP और भारतीय सेना साथ तैनात रहती हैं. ऐसे में दोनों बलों के बीच तालमेल सीमा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है.

ITBP का गठन कब हुआ था?

भारततिब्बत सीमा पुलिस का मुख्यालय नई दिल्ली के लोधी रोड स्थित CGO कॉम्प्लेक्स में है. इसका नेतृत्व डायरेक्ट जनरल करते हैं, जो भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी होते हैं. ITBP का गठन 24 अक्टूबर 1962 को भारतचीन युद्ध के दौरान किया गया था. शुरुआत में इस बल में केवल चार बटालियन थीं और इसकी जिम्मेदारी पहाड़ी इलाकों में खुफिया जानकारी जुटाने, गुरिल्ला युद्ध तथा अन्य सैन्य अभियानों से जुड़ी गतिविधियों को अंजाम देना था.

समय के साथ ITBP एक नियमित सीमा सुरक्षा बल के रूप में विकसित हुआ और इसे चीन से लगी भारतीय सीमा की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई. केंद्रीय गृह मंत्रालय की 202425 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, उस समय ITBP में 62 सर्विस बटालियन और चार स्पेशल बटालियन थीं. MHA की रिपोर्ट के अनुसार, अकेले अप्रैल और दिसंबर 2024 के बीच, ITBP ने भारतचीन सीमा पर 4,503 पेट्रोलिंग की थी.