Thursday, March 12, 2026
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‘जीजू ने मुझे सपने में छेड़ा था…’, पहले पहुंचा दिया जेल, फिर 7 साल बाद बयान से पलट गई साली

‘जीजू ने मुझे सपने में छेड़ा था…’, पहले पहुंचा दिया जेल, फिर 7 साल बाद बयान से पलट गई साली

कानपुर में नाबालिग साली से छेड़छाड़ के आरोपी एयरफोर्स कर्मी को कोर्ट ने 7 साल बाद बरी कर दिया है. पीड़िता ने अदालत में बयान दिया कि उसे सपने में छेड़छाड़ का भ्रम हुआ था, हकीकत में कुछ नहीं हुआ. इस गलतफहमी के कारण बेगुनाह एयरफोर्स कर्मी को 19 दिन जेल में बिताने पड़े थे.

‘जीजू ने मुझे सपने में छेड़ा था…’, पहले पहुंचा दिया जेल, फिर 7 साल बाद बयान से पलट गई साली

क्या किसी का सपना किसी दूसरे की असल जिंदगी को सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है? कानपुर में एक ऐसा ही हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक एयरफोर्स कर्मी को अपनी नाबालिग साली से छेड़छाड़ के आरोप में 7 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी और 19 दिन जेल में भी गुजारने पड़े. शनिवार को कोर्ट ने उन्हें तब बरी किया, जब पीड़िता ने खुद स्वीकार किया कि वह सब महज एक सपना था.

बिठूर के रहने वाले और वर्तमान में पुणे में एयरफोर्स में कारपोरल पद पर तैनात युवक की शादी फरवरी 2019 में हुई थी. शादी के कुछ दिन बाद उसकी 15 वर्षीय नाबालिग साली भी उनके साथ रहने आई थी. 8 मार्च 2019 की रात अचानक किशोरी जोर-जोर से चिल्लाने लगी. उसने आरोप लगाया कि उसके जीजा ने सोते समय उसे दबोचा और उसके साथ गलत हरकत की. इस घटना के करीब पांच महीने बाद पीड़िता के पिता ने नौबस्ता थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

‘जीजू ने सच में नहीं, सपने में छेड़ा’

विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) की अदालत में जब सुनवाई शुरू हुई, तो पीड़िता के बयान ने सबको चौंका दिया. पीड़िता ने कोर्ट में कहा- उस रात 9 बजे मैंने एंटीबायोटिक दवा ली थी और सो रही थी. मुझे सपने में महसूस हुआ कि जीजू ने मुझे पकड़ लिया है, जिसके बाद मैं चिल्लाने लगी. वो सिर्फ एक सपना था, हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ था. इतना ही नहीं, पीड़िता के पिता और उसकी बड़ी बहन (आरोपी की पत्नी) ने भी कोर्ट में यह स्वीकार किया कि उन्होंने केवल भ्रम और गलतफहमी के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया था.

7 साल की जंग और 19 दिन की जेल

वरिष्ठ अधिवक्ता करीम अहमद सिद्दीकी ने बताया कि इस भ्रम की भारी कीमत एयरफोर्स कर्मी को चुकानी पड़ी. नवंबर 2019 में उन पर मारपीट, बदनामी और लैंगिक हमले जैसे गंभीर आरोपों में चार्ज तय किए गए थे. उन्हें 19 दिन जेल की सलाखों के पीछे भी रहना पड़ा. हालांकि, अब कोर्ट ने सभी गवाहों और पीड़िता के बयान के आधार पर उन्हें ससम्मान बरी कर दिया है.

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