Thursday, March 5, 2026
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IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड में बड़ा’ खुलासा: सरकारी अफसर बना ‘मिडिलमैन’, SUV और परिवार तक पहुंचे करोड़ों

IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड में बड़ा’ खुलासा: सरकारी अफसर बना ‘मिडिलमैन’, SUV और परिवार तक पहुंचे करोड़ों

590 करोड़ रुपये के IDFC First Bank घोटाले में हरियाणा के सुपरिंटेंडेंट नरेश भुवानी को “मिडिलमैन” की भूमिका में गिरफ्तार किया गया है. सिर्फ 14 दिनों में 1.25 करोड़ रुपये ट्रांसफर, जिनमें SUV खरीद और बेटी के खाते में रकम भेजने का खुलासा हुआ है.

IDFC फर्स्ट बैंक फ्रॉड में बड़ा’ खुलासा: सरकारी अफसर बना ‘मिडिलमैन’, SUV और परिवार तक पहुंचे करोड़ों

590 करोड़ रुपये के IDFC First Bank घोटाले की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. हरियाणा विकास एवं पंचायत विभाग के एक सुपरिंटेंडेंट नरेश भुवानी को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर “मिडिलमैन” की भूमिका निभाने का आरोप है.

इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV & ACB) ने बताया, 13 नवंबर 2025 से 27 नवंबर 2025 के बीच सिर्फ 14 दिनों में भुवानी को 1.25 करोड़ रुपये “गैरकानूनी तरीके” से ट्रांसफर किए गए. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इनमें से 10 लाख रुपये उनकी बेटी के बैंक खाते में भेजे गए, जबकि 25 लाख रुपये एक फॉर्च्यूनर SUV खरीदने के लिए इस्तेमाल किए गए.

300 करोड़ रुपये एक निजी कंपनी में डायवर्ट

जांच एजेंसियों के अनुसार, करीब 300 करोड़ रुपये स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स नामक कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए गए. यह कंपनी स्वाति सिंगला और उनके भाई अभिषेक सिंगला के स्वामित्व में बताई जा रही है. इस मामले में पहले ही IDFC फर्स्ट बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर ऋभाव ऋषि और पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार को गिरफ्तार किया जा चुका है. अभय कुमार की पत्नी स्वाति सिंगला और उनके भाई अभिषेक सिंगला भी पुलिस रिमांड पर हैं.

कौन-कौन है इस साजिश में शामिल?

पंचकूला कोर्ट में पेशी के दौरान SV & ACB ने कहा कि नरेश भुवानी ने न सिर्फ स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स से सीधे पैसे लिए, बल्कि सरकारी अधिकारियों और सह-आरोपियों के बीच मध्यस्थ की अहम भूमिका भी निभाई. एजेंसी के मुताबिक, भुवानी लगातार ऋषि और अभय के संपर्क में थे और कथित तौर पर कंपनी की स्थापना में भी भूमिका निभाई.

कितना बड़ा है साजिश का नेटवर्क?

एजेंसी ने अदालत से छह दिन की पुलिस रिमांड मांगी है, ताकि पूरे “मोडस ऑपरेंडी” यानी धन के हेरफेर के तरीके, लाभार्थियों की पहचान और इस साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सके. जांचकर्ताओं का कहना है कि अपराध की कमाई से खरीदी गई चल-अचल संपत्तियों के दस्तावेज जुटाए जाएंगे. आरोप है कि इस नेटवर्क में पब्लिक सर्वेंट, बैंक अधिकारी और निजी व्यक्ति शामिल हैं, जिनके बीच गहरी साजिश रची गई.

क्या है आगे?

यह मामला सिर्फ बैंक फ्रॉड नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र और बैंकिंग सिस्टम के गठजोड़ की संभावित बड़ी साजिश के रूप में देखा जा रहा है. आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और संपत्तियों की जब्ती की कार्रवाई भी तेज हो सकती है.

me.sumitji@gmail.com

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