
क्या दो लोगों की ज़िद की सबसे बड़ी सज़ा एक मासूम बचपन को मिलनी चाहिए?
ग्वालियर के भितरवार से आई ये तस्वीरें सिर्फ़ एक खबर नहीं हैं, बल्कि उन टूटे हुए सपनों की चीख हैं जो एक घर के बिखरने से पैदा हुई। तलाक के कागज़ों पर दस्तखत करना तो शायद फिर भी आसान होता है, लेकिन एक बच्चे की दुनिया को दो हिस्सों में बांटना सबसे मुश्किल काम है।
पिछले 8 दिनों से लापता सोमप्रीत कौर जब पंजाब के एक गुरुद्वारे में मिलीं, तो लगा था कि परिवार फिर से जुड़ जाएगा… मगर किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। ![]()
जब समझौतों की मेज़ सजी और उस मासूम की कस्टडी का आखिरी फैसला हुआ, तो वहाँ मौजूद हर इंसान का कलेजा जैसे फटने को आ गया। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अपने पोते को खुद से दूर जाते देख उन दादाजी का फूट-फूट कर रोना, मानो उनकी बरसों की मेहनत और यादें एक पल में आँखों के रास्ते बह गई हों।
पास खड़ा वो पिता पत्थर बन चुका था, पूरी तरह निशब्द और सुन्न… अपनी ही औलाद को अपनी आँखों के सामने पराया होते देखना किसी मौत से कम नहीं। और वो नन्हा बच्चा? वह तो बस सबकी भीगी हुई आँखों को ताक रहा था, उसे तो ये भी नहीं पता था कि आज से उसकी हँसी दो अलग घरों में बंटने वाली है।
बड़े तो अलग होकर अपनी नई राहें चुन लेते हैं और अपनी लड़ाइयां जीत लेते हैं, मगर हारता हमेशा वही मासूम है जिसे ये भी नहीं पता कि उसका कसूर क्या है।






