
Bank Vs UPI: अगर आप अपने बैंक खाते से ऑनलाइन, मोबाइल-इंटरनेट बैंकिंग के जरिए पैसे भेजते हैं तो बैंक आपसे सर्विस चार्ज वसूलती है. हर बैंक और ट्रांजेक्शन की रकम के हिसाब से ये अलग-अलग होती है. एक तरफ बैंक ऑनलाइन फंड ट्रांसफर (IMPS) पर सर्विस चार्ज लेती तो दूसरी ओर फोनपे (PhonePe), पेटीएम (Paytm), गूगलपे (Gpay) जैसे पेमेंट ऐप्स फ्री में फटाफट पेमेंट यानी UPI ट्रांजेक्शन की सुविधा देते हैं. चाहे आप सेम बैंक में (HDFC to HDFC) भेजे या फिर दूसरे बैंक (SBI to HDFC) में. इन पेमेंट ऐप्स की मदद से यूपीआई ट्रांजेक्शन यूजर्स के लिए बिल्कुल फ्री है. फिर मन में सवाल उठता है कि जब ये फ्री हैं तो ये पेमेंट कंपनियां कमाई कैसे करती हैं? फ्री पेमेंट की सुविधा देने के बावजूद ये कंपनियां अपना खर्चा-पानी कैसे चलाती हैं ?
आप मोबाइल की मदद से सेम बैंक या किसी दूसरे बैंक के खाते में पैसे भेज सकते हैं. ये ठीक वैसा ही है, जैसे आप UPI पेमेंट के जरिए ट्रांजेक्शन करते हैं, लेकिन इस सुविधा के बदले बैंक आपसे चार्ज लेती है. अगर आप इमीडिएट पेमेंट सर्विस यानी IMPS का ऑप्शन चुनते हैं तो आपको तय नियम के हिसाब से सर्विस चार्ज देना पड़ता है. देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) आईएमपीएस ट्रांजेक्शन के लिए 2 रुपये से लेकर 10 रुपये+ GST का चार्ज खाताधारकों से लेती है.
SBI का IMPS चार्ज
– 25,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक – 2 रुपये + GST
– 1 लाख रुपये से 2 लाख रुपये तक – 6 रुपये + GST
– 2 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक – 10 रुपये + GST
UPI से फंड ट्रांसफर बिल्कुल फ्री
अगर आप फोनपे, गूगलपे, पेटीएम जैसे पेमेंट ऐप्स की मदद से UPI करते हैं तो आपको कोई फीस, कोई चार्ज नहीं देना पड़ता है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। ग्राहकों के लिए ये फंड ट्रांसफर बिल्कुल फ्री है. सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए इसे फ्री रखने की हिदायत दी है. सवाल ये कि अगर ये सर्विस फ्री है तो फिर Google Pay, Paytm और PhonePe जैसी कंपनियां कमाई कैसे करती हैं ?
कैसे कमाई करती हैं पेमेंट ऐप्स ?
आपको फ्री ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की सुविधा देने वाले पेमेंट ऐप्स की बैलेंसशीट देखें तो भारत के सबसे बड़े पेमेंट ऐप फोनपे ने Q3 FY26 में 7115 करोड़ रुपये का रेवेन्यू अर्जित किया है. इसके बाद Paytm ने 2194 करोड़ रुपये और गूगल पे ने 1547 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल किया है.
फोनपे, पेटीएम, गूगलपे की कमाई
इन फिनटेक कंपनियों का बिजनेस मॉडल सिर्फ पेमेंट तक सीमित नहीं है. उन्होंने UPI की मदद से एक ऐसा डिजिटल इकोसिस्टम बनाया है, जिसमें आपके अलावा दुकानदार,ब्रांड और फाइनेंशियल सर्विसेज शामिल हैं, जो उनकी कमाई का असली जरिया है. कमीशन और मर्चेंट चार्जेस (MDR) के अलावा वॉयस-ऑपरेटेड स्पीकर्स को उन्होंने रेवेन्यू मॉडल में बदल दिया है. इस वॉयस स्पीकर के लिए दुकानदारों को रेंट चुकाना होता है. देशभर में 30 लाख से ज्यादा दुकानों तक इसकी पहुंच है. इससे इन पेमेंट ऐप्स को हर साल करोड़ों की कमाई होती है. 8th Pay Commission के इंतजार के बीच यहां DA में 10% की बंपर बढ़ोतरी, होली से पहले खत्म होगा केंद्रीय कर्मचारियों का इंतजार ? 5 सालों का पैटर्न देखिए
इसके अलावा स्क्रैच कार्ड और कैशबैक सिस्टम के जरिए वो आपको वाउचर्स के जरिए ब्रांड प्रमोशन का हिस्सा बनाते हैं. जिसके जरिए कंपनियों के विज्ञापन और ऑफर्स से उनकी मोटी कमाई होती है. पेमेंट ऐप्स यूपीआई से बने अपने भरोसे की बदौलत फाइनेंशियल सर्विसेस बेचती हैं, जैसे लोन, बीमा आदि. इससे भी उन्हें कमीशन के तौर पर कमाई होती हैं. कंपनियों को इन पेमेंट ऐप्स की मदद से करोड़ों लोगों तक पहुंच मिलती है, जिसके बदले वो इन प्लेटफॉर्म को मोटी रकम मुहैया कराती हैं.सिर्फ इतना ही नहीं फ्री होने की वजह से लोग इन पेमेंट ऐप्स से आसानी से जुड़ जाते हैं. इन सबसे कमाई कर वो आपको फ्री यूपीआई की सर्विस देती है. बनाने चले थे कुछ,बन गई ₹45,650,000,000,000 की कंपनी, कैसे




