
ईरान युद्ध से खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीयों की जिंदगी पर बन आई है. लोग सरकार से गुहार लगा रहे हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोर्चा संभाल लिया है. वे खुद इन देशों की टॉप लीडरशिप से बात कर रहे हैं. एक दिन पहले पीएम मोदी ने सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, जॉर्डन, इजरायल के नेताओं से बात की थी. कतर से भी बात हुई. मंगलवार को उन्होंने ओमान के किंग और कतर के क्राउन प्रिंस को कॉल किया. पीएम मोदी इन नेताओं से भरोसा ले रहे हैं कि वहां रह रहे भारतीयों को कुछ न होने पाए.
यह कोई सामान्य कूटनीतिक गतिविधि नहीं है. 48 घंटों के भीतर प्रधानमंत्री मोदी ने मिडिल ईस्ट के लगभग पूरे GCC यानी गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के नेतृत्व से बात कर डाली है. मंगलवार को उन्होंने ओमान के सुल्तान महामहिम सुल्तान हैथम बिन तारिक से बात की. इसके तुरंत बाद उन्होंने कुवैत के क्राउन प्रिंस महामहिम शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह के साथ फोन पर चर्चा की. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इन सभी कॉल्स का स्पष्ट संदेश था. पहला, भारत इन देशों की संप्रभुता पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करता है. दूसरा और सबसे अहम, इस मुश्किल वक्त में इन देशों में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण की जिम्मेदारी वहां की सरकारों की है.
| खाड़ी देशों में कहां रहते हैं कितने भारतीय |
| संयुक्त अरब अमीरात | 38 से 40 लाख |
| सऊदी अरब | 25 से 27 लाख |
| कुवैत | 11 से 12 लाख |
| ओमान | 8 से 9 लाख |
| कतर | 8 लाख |
| बहरीन | 4 लाख |
| स्रोत: विदेश मंत्रालय |
खाड़ी देशों में कितने भारतीय हैं?
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस समय खाड़ी देशों में लगभग 85 से 90 लाख भारतीय नागरिक काम कर रहे हैं. यह दुनिया में किसी भी क्षेत्र में रहने वाला भारत का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है.
खतरा क्या है?
यह सभी भारतीय केवल दफ्तरों में काम करने वाले लोग नहीं हैं. इनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा ब्लू-कॉलर वर्कर्स का है जो कंस्ट्रक्शन साइट्स, तेल के कुओं, रिफाइनरियों और घरों में काम करते हैं. ईरान द्वारा दागे गए ड्रोन्स और मिसाइलें यूएई, बहरीन और सऊदी अरब के आसमान से होकर गुजर रही हैं. अगर गलती से भी कोई मिसाइल रिहायशी या औद्योगिक इलाके में गिरती है, जैसा कि यूएई में हुआ जहां 3 लोगों की जान गई, तो यह भारत के लिए एक बहुत बड़ी मानवीय त्रासदी बन सकती है. इसके अलावा, युद्ध के कारण अगर फ्लाइट्स रुकती हैं और एयरपोर्ट बंद होते हैं, तो इतने बड़े समुदाय को सुरक्षित बाहर निकालना सबसे मुश्किल काम होगा.






