मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब अमेरिका ने भी एक बड़ा कदम उठा लिया है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच वाशिंगटन ने अपने नागरिकों को उस क्षेत्र को छोड़ने का निर्देश दिया है। अमेरिका ने 12 से ज्यादा देशों के लिए यह एडवाइज़री जारी की। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने जिन देशों के लिए चेतावनी जारी की और जिन देशों से अमेरिकी नागरिकों को बाहर निकलने के लिए कहा उनमें बहरीन, मिस्र, ईरान, इराक, इजराइल, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, क़तर, सऊदी अरब, सीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल है। इन सभी जगहों पर मौजूद अमेरिकी नागरिकों से कहा गया है कि वह कमर्शियल फ्लाइट या उपलब्ध साधनों से तुरंत बाहर निकलें।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की काउंसिलर अफेयर्स की सहायक सचिव ने सोशल मीडिया पर डिपार्ट नाउ यानी अभी निकल जाए शब्दों का इस्तेमाल किया। यह शब्दावली आमतौर पर तब इस्तेमाल होती है जब सुरक्षा खतरा गंभीर स्तर पर पहुंच चुका हो। साथ ही 24 घंटे की हेल्पलाइन भी जारी की गई ताकि जरूरत पड़ने पर नागरिक तुरंत संपर्क कर सकें। उधर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी संकेत दिया कि हालात और बिगड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक जो हमले हुए हैं वह आखिरी नहीं है। आने वाले चरण में और भी घातक कारवाई संभव है। इसका सीधा मतलब है अमेरिका लंबे संघर्ष के लिए तैयार दिखाई दे रहा है और इसी वजह से वह अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए यह निर्देश दे रहा कि उस क्षेत्र से वह जल्द से जल्द बाहर निकल जाए।
ट्रंप प्रशासन पहले ही साफ कर चुका है कि अगर उसके रणनीतिक लक्ष्य पूरे नहीं होते तो सैन्य विकल्प खुले हैं। ऐसे में नागरिकों को पहले ही सुरक्षित निकाल लेना किसी बड़े ऑपरेशन से पहले की तैयारी मानी जा रही है। मिडिल ईस्ट पहले से ही अस्थिर क्षेत्र रहा है। लेकिन इस बार हालात ज्यादा जटिल है। कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। समुद्री मार्ग रणनीतिक है और क्षेत्रीय शक्तियां भी सक्रिय हैं। ऐसे में किसी भी बड़े हमले का असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहेगा। सीधी बात यह है कि अमेरिका ने अपने नागरिकों को जो निर्देश दिया है वो संकेत देते हैं कि हालात सामान्य नहीं है और अमेरिका आगे के लिए कुछ बड़ा प्लान कर रहा है। आने वाले दिन तय करेंगे लेकिन फिलहाल मिडिल ईस्ट में बेचैनी चरम पर है।
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