Wednesday, March 18, 2026
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होर्मुज से डरकर 1000 मील दूर भाग खड़ा हुआ अमेरिकी जहाज, वहां भारत ने उतार दिया जंगी बेड़ा!..

होर्मुज से डरकर 1000 मील दूर भाग खड़ा हुआ अमेरिकी जहाज, वहां भारत ने उतार दिया जंगी बेड़ा!..
होर्मुज से डरकर 1000 मील दूर भाग खड़ा हुआ अमेरिकी जहाज, वहां भारत ने उतार दिया जंगी बेड़ा!..

नई दिल्ली: अमेरिका-ईरान की जंग अब तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है। अब भी हालात ये हैं कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट नहीं खुलवा पा रहा है, जहां के आसपास के समंदर में 1,000 से ज्यादा मालवाहक तेल-गैस के जहाजी टैंकर फंसे हुए हैं। अमेरिका की सारी ताकत होर्मुज के दरवाजे पर आकर फुस्स हो जा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ऑयल टैंकरों को होर्मुज में ईरान की समुद्री बारूदी सुरंगों से खतरा है। ऐसे में अमेरिकी नौसेना का माइनस्वीपर जहाज हजारों मील दूर जा खड़ा हुआ है, क्योंकि होर्मुज इतना संकरा है कि अमेरिका के बड़े जंगी जहाज वहां लड़ नहीं पा रहे हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। जबकि, भारत ने होर्मुज में अपने नौसैनिक युद्धपोतों को उतार दिया, ताकि वहां से भारत आने वाले शिवालिक और नंदा देवी जैसे जहाजों को सुरक्षा दी जा सके।

अमेरिका के माइनस्वीपर्स से लदा जहाज लौटा
द इंडिपेंडेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के पास फिलहाल माइनस्वीपर जहाज तो हैं, मगर वो इतने विशाल हैं कि वो होर्मुज के संकरे गलियारे (24 मील) में ईरान के खिलाफ जंग नहीं लड़ सकते हैं।

बीते सोमवार को एक विशाल कार्गो शिप M/V Seaway Hawk अमेरिका के फिलाडेल्फिया तट पर पहुंचते देखा गया। इसमें एवेंजर क्लास माइन काउंटरमेजर जहाज देखे गए, जो बहरीन में अमेरिका के पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर तैनात था। युद्ध के पहले ही ये जहाज वापस बुला लिया गया, जिसमें चार माइनस्वीपर्स पोत थे।

ईरान की माइनलेयर्स अमेरिकी जहाजों के लिए बड़ा खतरा
द गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज के दरवाजे पर ऑयल-गैस के 1,000 से ज्यादा जहाजी टैंकर फंसे हुए हैं, जो स्ट्रेट से गुजरने का इंतजार कर रहे हैं। ईरान ने छोटे-छोटे माइन बोट तैयार कर रखे हैं, जो होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगे बिछाती हैं।

होर्मुज के पास तक क्यों नहीं जा पा रहा अमेरिका
अमेरिकी सैन्य प्लानर्स यह बात अच्छी तरह से समझते हैं कि अगर होर्मुज के पास उनका कोई जहाज आया तो ईरान अपनी समुद्री सुरंगों और ड्रोंस से हमला कर सकता है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन इसका करारा जवाब नहीं दे पाएगा।
कुछ एनालिस्टों ने यह दांव लगाया था कि ईरान अपने तेल को निर्यात करने के लिए होर्मुज को खोलेगा, मगर तेहरान ने इससे भी ज्यादा सख्त अप्रोच अपनाया है।
अमेरिका के एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने भी बीते बृहस्पतिवार को कहा था कि अमेरिकी नौसेना जहाजों को एस्कॉर्ट नहीं कर पा रही है। हम इसके लिए तैयार नहीं हैं। हमारे सभी सैन्य जखीरे ईरान के सैन्य सोर्स को तबाह करने पर फोकस किए हुए हैं।

अमेरिकी नौसेना क्यों एस्कॉर्ट नहीं कर पा रही है
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नौसेना होर्मुज के पास फटक नहीं पा रही है, क्योंकि यमन के हूती विद्रोही भी ईरान का साथ दे रहे हैं। वो अमेरिका समर्थित जहाजों को निशाना बना सकते हैं। अमेरिका का पिछला अनुभव इस क्षेत्र में बेहद खराब था।
अमेरिका ईरान के बड़े नौसैनिक फोर्सेज को निशाना बना रहा है, मगर ईरान की छोटी और तेजी से हमला करने वाली बोट अमेरिकी जहाजों को नुकसान पहुंचा रही हैं। हाल के दिनों में वो माइन लेइंग का भी इस्तेमाल कर रही हैं।

2 मिनट से भी कम समय में अमेरिकी जहाजों पर हमले की ताकत
ईरान ने अपने तटों पर बड़ी संख्या में मिसाइलें और ड्रोंस की तैनाती कर रखी है। ईरानी ड्रोन और मिसाइलें 2 मिनट से कम समय में अमेरिकी जहाजों पर हमले कर सकती हैं।
ईरान ने इस जंग के दौरान विस्फोटक लदे रिमोट कंट्रोल से चलने वाले बोटों का भी इस्तेमाल किया है। हाल ही में उसने इराक के समंदर में एक क्रूड ऑयल टैंकर को इसी से तबाह किया था।

ईरान के पास समुद्री बारूदी सुरंगों और शोर बैटरी का जखीरा
ईरान के पास हर तरह की ताकतवर समुद्री बारूदी सुरंगें हैं। इन्हें समुद्र की तलहटी में बिछाया जा सकता हैं। इन्हें बिछाने वाले माइनलेयर्स यानी बोट सतह से 50 मीटर नीचे गहराई तक में छिपी रह सकती हैं।
इसके अलावा, ईरान ने समुद्री बारूदी सुरंगों के इस्तेमाल के लिए फिशिंग बोट्स और छोटी नौकाओं का भी इस्तेमाल किया है। वहीं, ईरान ने अपने समुद्री तटों पर बड़ी संख्या में सस्ते और प्रभावी ड्रोंस की तैनाती की है, जो तटों को सुरक्षित रखने में बेहद कारगर हैं।

भारतीय नौसेना ने कैसे खाड़ी में तैनात किए जहाज
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नौसेना के युद्धपोतों को खाड़ी क्षेत्र में ऑपरेशन संकल्प के तहत तैनात किया गया है। ये तैनाती तब हुई है, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कूटनीतिक बातचीत की और इसे आसान बनाया। जयशंकर ने हालांकि कहा है कि ये ब्लैंकेट अरेंजमेंट नहीं है। ये ईरान और नई दिल्ली के बीच बातचीत का नतीजा है।
नौसेना का एक और जहाज आईएनएस सूरत को भी ओमान की खाड़ी में तैनात किया गया है। आईएनएस सूरत एक मॉडर्न मिसाइल डिस्ट्रॉयर है, जिसमें लॉन्ग रेंज की सरफेस टू एयर मिसाइलें, टारपीडेा और कई तरह के हथियारों से लैस है।

होर्मुज के पास फंसे हैं 22 युद्धपोत और 611 नाविक
रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज के पश्चिम में भारत जाने वाले 22 पोत फंसे हुए हैं, जिन पर 611 नाविक सवार हैं। अभी शिवालिक, नंदा देवी जहाज खाड़ी से भारतीय नौसेना के युद्धपोत की निगरानी में भारतीय बंदरगाहों पर लौटे हैं। वहीं, एक और जहाज जाग लाडकी भी पहुंच गया है।
भारतीय नौसेना अदन की खाड़ी में एंटी पाइरेसी ऑपरेशन चला रही है, जहां तीन युद्धपोत तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, मालदीव और सेशल्स में भारतीय नौसेना के युद्धपोत तैनात हैं।

me.sumitji@gmail.com

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