कोविड के बाद से शेयर बाजार की चकाचौंध में हर कोई आया. खासकर देश का जेन जी. बीते पांच से 6 बरस में शेयर बाजार निवेशकों की संख्या करीब करीब दोगुनी हो गई. इस दौरान क्या सरकारी और क्या प्राइवेट तमाम कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला. वहीं दूसरी ओर देश के सबसे बड़े इंडेक्स की कहानी थोड़ी अलग देखने को मिल रही है. बीते 5 बरस में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख सूचकांक निफ्टी ने कोई खास रिटर्न नहीं दिया है. अगर सितंबर 2021 से लेकर अगस्त 2026 के डाटा को देखें तो निफ्टी में करीब 34 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले 13 शेयरों ने नेगेटिव रिटर्न दिया है. जोकि भले ही मामूली क्यों ना हो. जबकि इस दौरान निफ्टी का रिटर्न 7 फीसदी देखने को मिला. अगर इन 13 शेयरों में बाहर कर दिया जाए तो निफ्टी का रिटर्न एक झटके में 11 फीसदी हो जाएगा. आइए इसके बारे में विस्तार से बात करते हैं. साथ ही निफ्टी के उन निकम्मे 13 शेयरों की भी जानकारी देते हैं, जिन्होंने निफ्टी के रिटर्न को बीते 5 बरस में काफी मामूली कर दिया है.

13 शेयरों ने डुबाई निफ्टी की नैया

निफ़्टी का लगभग एकतिहाई हिस्सा बनाने वाले 13 शेयरों ने पिछले पांच सालों में बेंचमार्क के परफॉर्मेंस पर बुरा असर डाला है. 360 वन वेल्थ की स्टडी के अनुसार, इंडेक्स में 33.7 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले इन शेयरों ने सितंबर 2021 और अगस्त 2026 के बीच 0.8 फीसदी का सालाना रिटर्न दिया. फर्म के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर वरुण सिक्का ने स्टडी में कहा कि इस दौरान निफ्टी ने सालाना 7.1% का रिटर्न दिया, लेकिन अगर इन 13 पिछड़ने वाले शेयरों को हटा दिया जाए, तो रिटर्न 11% होता. में कही गई है.

निफ्टी 50 के पिछड़ने वाले शेयर

स्टॉक निफ्टी वेटेज 5 साल का CAGR रिटर्न क्या गड़बड़ रही
HDFC बैंक 9.9 1.3 मर्जर के बाद NIM रिकॉर्डलो 3.26% पर. FI होल्डिंग घटकर 4.1% हुई. गवर्नेंस से जुड़ी चिंताएं
रिलायंस इंडस्ट्रीज 8 4.5 भारी कैपेक्स वाला नया एनर्जी बिजनेस. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। O2C मार्जिन में उतारचढ़ाव. अनलिस्टेड सब्सिडियरी में वैल्यू फंसी हुई है.
इन्फोसिस 3.7 8.1 AI की वजह से ह्यूमनआवर बिलिंग में कमी. US में खर्च में कमी. FI की बिकवाली
कोटक महिंद्रा बैंक 2.8 3.0 2024 में RBI की डिजिटल पाबंदी से ग्रोथ पर असर. लीडरशिप में बदलाव. प्रीमियम मल्टीपल से डीरेटिंग.
TCS 2.2 8.7 ग्रुप में सबसे कमजोर. अगस्त26 में 5 साल के निचले स्तर पर. बड़े डील कन्वर्जन में सुस्ती
हिंदुस्तान यूनिलीवर 1.6 5.1 वॉल्यूम ग्रोथ 5%; पाम ऑयल/क्रूडडेरिवेटिव इनपुट की महंगाई; 24अगस्त26 को 52हफ्ते के निचले स्तर पर
HCL टेक्नोलॉजीज 1.3 1.0 उसी सेक्टर की चुनौतियां; ER&D और सॉफ्टवेयर के जरिए बेहतर परफॉर्मेंस
एशियन पेंट्स 1.1 2.8 बिड़ला ओपस का 10% शेयर, JSW डुलक्स की एंट्री; क्रूड से जुड़े रॉ मटीरियल; मल्टीपल में कमी
टेक महिंद्रा 0.9 4.0 नए मैनेजमेंट के तहत सुधार की उम्मीद का असर पहले ही दिख चुका है; टेलीकॉम वर्टिकल अभी भी कमजोर
डॉ. रेड्डीज 0.7 3.8 रेवलिमिड पेटेंट खत्म होने का असर; US में जेनेरिक दवाओं की कीमतों में गिरावट
टाटा मोटर्स PV 0.6 0.2 डीमर्जर के बाद PV/JLR एंटिटी; JLR टैरिफ और डिमांड का रिस्क; EV कॉम्पिटिशन
HDFC लाइफ 0.5 3.8 IRDAI के सरेंडरवैल्यू नियम, कमीशन/खर्च की सीमा, टैक्स में बदलाव से मार्जिन पर दबाव
विप्रो 0.5 10.5 इंडेक्स में 5 साल का सबसे खराब एब्सोल्यूट रिटर्न; अपने साथियों के मुकाबले लगातार धीमी ग्रोथ
बास्केट 33.7 0.8 मौजूदा इंडेक्स वेट के आधार पर
निफ्टी 50 100 7.1

इन शेयरों का भी दिखा घटिया परफॉर्मेंस

इन शेयरों में सबसे ज्यादा वेटेज वाले शेयर HDFC बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज़, इंफोसिस, कोटक महिंद्रा बैंक और टीसीएस हैं, जो मिलकर इंडेक्स का लगभग 27 फीसदी हिस्सा बनाते हैं. इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा और विप्रो जैसी IT सर्विस कंपनियों जो मिलकर निफ्टी का 8.5% हिस्सा बनाती हैं पर AIबेस्ड प्रेशर और बिलेबल आवर्स वाले मॉडल से जुड़ी चुनौतियों का असर पड़ा. मर्जर के बाद HDFC बैंक को मार्जिन के दबाव का सामना करना पड़ा, जबकि रेगुलेटरी बदलावों का असर HDFC लाइफ पर पड़ा. हिंदुस्तान यूनिलीवर और एशियन पेंट्स जैसी कंज्यूमर कंपनियों को बढ़ती इनपुट कॉस्ट और बढ़ते कॉम्पिटिशन के दबाव का सामना करना पड़ा.

म्यूचुअल फंड्स के परफॉर्मेंस पर भी असर

कुछ बड़े शेयरों के इस खराब परफॉर्मेंस ने एक्टिव म्यूचुअल फंड्स को इंडेक्स से बेहतर परफ़ॉर्म करने में भी मदद की, क्योंकि उनमें से कई का इन पिछड़ने वाले शेयरों में कम एक्सपोज़र था. 360 वन वेल्थ के अनुसार, जहां इस दौरान निफ़्टी 50 इंडेक्स फ़ंड्स ने सालाना 8.32 फीसदी का रिटर्न दिया, वहीं लार्जकैप फंड्स ने औसतन 11.41 फीसदी, फ्लेक्सी कैप फंड्स ने 12.23 फीसदी और मल्टीकैप फंड्स ने 16.30% का रिटर्न दिया. स्टडी से पता चला कि आम एक्टिव स्कीमों ने अपने पोर्टफ़ोलियो का 1522% हिस्सा इन 13 शेयरों में निवेश किया था, जबकि इंडेक्स में यह हिस्सा लगभग 34 फीसदी था. अकेले इसी कम निवेश की वजह से उनके बेहतर परफॉर्मेंस में लगभग 1.52 प्रतिशत अंकों का योगदान मिला.