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Patna Crime News: बिहार के चर्चित और कुख्यात पेपर लीक माफिया संजीव मुखिया ने आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की रिमांड पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. बेऊर जेल से रिमांड पर लिए गए संजीव मुखिया से ईओयू की विशेष टीम ने कई घंटों तक गहन पूछताछ की, जिसमें उसने राज्य और देश भर की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की गोपनीयता भंग करने और पेपर लीक कराने की पूरी कार्यप्रणाली का खुलासा कर दिया है.

पूछताछ के दौरान संजीव मुखिया ने स्वीकार किया कि वर्ष 2017 की NEET परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक कराने की साजिश में उसके सिंडिकेट के किन-किन सदस्यों की मुख्य भूमिका थी. इसके साथ ही उसने बिहार में आयोजित सिपाही भर्ती परीक्षा (CSBC-2023) और बिहार शिक्षक बहाली परीक्षा (BPSC TRE-3) के पेपर लीक मामलों में भी अपनी सीधी संलिप्तता स्वीकार कर ली है. संजीव ने अपने पूरे ‘सॉल्वर गैंग’ नेटवर्क, पैसों के लेन-देन और गिरोह के मुख्य सहयोगियों के गुप्त ठिकानों की महत्वपूर्ण जानकारी अधिकारियों को दी है.

पत्रकार नगर थाने में दर्ज 2017 के केस से जुड़ा है मामला

यह पूरी कानूनी कार्रवाई मुख्य रूप से 7 जुलाई 2017 को पटना के पत्रकार नगर थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर से जुड़ी हुई है. इस केस में नालंदा जिले के नगरनौसा थाना स्थित शाहपुर बलवा निवासी संजीव मुखिया और उसके बेटे डॉ. शिव समेत कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. बाद में मामले की गंभीरता और व्यापक नेटवर्क को देखते हुए इसकी जांच आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को सौंप दी गई थी.

CBI दे चुकी है नीट-2024 में क्लीन चिट

विशेष बात यह है कि देश भर में सुर्खियों में रहे NEET-2024 परीक्षा पेपर लीक मामले में इसी वर्ष केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जांच के बाद संजीव मुखिया को क्लीन चिट दे दी थी. इसके बाद 31 अगस्त को सीबीआई की विशेष अदालत ने भी उसे इस मामले से दोषमुक्त कर दिया था. हालांकि, सीबीआई से मिली राहत के बावजूद ईओयू की इस नई और सख्त पूछताछ से उसके पुराने और नए कारनामों का पूरा सच अब बाहर आ रहा है.

गिरोह के अन्य सदस्यों को दबोचने के लिए छापेमारी तेज

संजीव मुखिया से मिले नए इनपुट्स और अहम सुरागों के आधार पर ईओयू की टीम अब पुराने मामलों, वित्तीय कड़ियों और सॉल्वर गैंग के बीच के आपसी तालमेल की गहराई से पड़ताल कर रही है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। पूछताछ में सामने आए नए मददगारों, बिचौलियों और नेटवर्क के सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार करने के लिए ईओयू ने कई जिलों में छापेमारी तेज कर दी है और जांच का दायरा बढ़ा दिया है.