मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक सैन्य अधिकारी के आवास पर नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने कानूनी और सामाजिक हलकों में गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। शादी के महज 99 दिन बाद हुई इस घटना के बाद मृतक महिला के पिता ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। याचिका में दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए इस पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराने की मांग की गई है, ताकि मामले की तह तक जाकर सच्चाई सामने लाई जा सके।

याचिकाकर्ता और तमिलनाडु निवासी पी. दक्षिणामूर्ति ने अदालत को बताया कि उनकी 28 वर्षीय पुत्री कविता, जो पेशे से एक अधिवक्ता थीं, का विवाह 2 मार्च 2025 को मेजर ओम नागार्जुन से हुआ था। पिता का आरोप है कि उन्होंने विवाह के समय अपनी सामर्थ्य से अधिक उपहार दिए थे, जिसमें 100 तोला सोना, हीरे का हार, एक एसयूवी कार और 15 लाख रुपये नकद शामिल थे। याचिका के अनुसार, विवाह के कुछ समय पश्चात ही पति और उनके परिजनों द्वारा एक नया अस्पताल खोलने के लिए दो करोड़ रुपये के अतिरिक्त दहेज की मांग की जाने लगी थी।

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब 9 जुलाई 2025 की रात कविता की संदिग्ध मौत हुई। पति के दावों के अनुसार, कविता ऑफिसर गेस्ट हाउस के बाथरूम में गिर गई थी, जिसके बाद उसे मिलिट्री अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मनीष वर्मा ने अदालत में तर्क दिया कि मेस और अस्पताल के बीच की दूरी महज पांच मिनट है, फिर भी मृतका को देर रात 12:39 बजे भर्ती कराया गया। पति स्वयं एक आर्मी डॉक्टर होने के बावजूद तीन घंटे की देरी से अस्पताल पहुंचना और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोट होने के बावजूद मौत का कारण ‘कार्डियक अरेस्ट’ बताया जाना मामले को अत्यधिक संदिग्ध बनाता है।

न्यायिक रिकॉर्ड और पुलिस की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लगे हैं। कानून के प्रावधानों के अनुसार, विवाह के सात वर्षों के भीतर हुई संदिग्ध मौत की जांच किसी राजपत्रित अधिकारी द्वारा की जानी चाहिए थी, जिसका कथित रूप से पालन नहीं किया गया। इसके अतिरिक्त, पुलिस द्वारा जिला न्यायालय में प्रस्तुत किए गए डॉक्टरों के बयानों और मिलिट्री अस्पताल के रिकॉर्ड के समय में भारी विसंगतियां पाई गई हैं। पीड़ित पिता का स्पष्ट आरोप है कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है और स्थानीय पुलिस आरोपियों को संरक्षण देने का प्रयास कर रही है। अब सभी की निगाहें उच्च न्यायालय के फैसले पर टिकी हैं, जो इस दर्दनाक घटना की जांच की दिशा तय करेगा।