मशहूर अमेरिकी निवेशक पीटर लिंच ने ‘टेनबैगर’ शब्द को लोकप्रिय बनाया था. इसका मतलब उन शेयरों से है जो लंबी अवधि में 1000 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न देते हैं. लिंच ने अपनी ज्यादातर खोज वॉल स्ट्रीट तक सीमित रखी थी, लेकिन भारतीय निवेशकों को अब ऐसे शेयरों के लिए कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है. बीते पांच सालों में दलाल स्ट्रीट के 19 शेयरों ने निवेशकों को ऐसा ही छप्परफाड़ रिटर्न देकर मालामाल कर दिया है.

दलाल स्ट्रीट के सबसे शानदार विनर्स
बीते पांच सालों में भारतीय शेयर बाजार ने भारी उतारचढ़ाव देखे हैं. रिकॉर्ड तेजी के बाद बाजार में करेक्शन भी आया. बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 ने पांच साल में 46 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जबकि सेंसेक्स 38 प्रतिशत चढ़ा. पिछले एक साल में एआई से जुड़ी चिंताओं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथसाथ मध्य पूर्व के तनाव के कारण बाजार में गिरावट भी देखी गई. इसके बावजूद कुछ शेयरों ने कमाल कर दिया. निफ्टी 500 इंडेक्स में GE Vernova T&D सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला शेयर बना. इसने पांच साल में 3,013 प्रतिशत की शानदार उड़ान भरी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अगस्त 2021 में जो शेयर 134 रुपये का था, वो अब 4,180 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है. BSE के शेयरों ने भी 2,686 प्रतिशत की जबर्दस्त तेजी दिखाई. इसके अलावा अपार इंडस्ट्रीज, TARIL, जेन टेक्नोलॉजीज समेत मझगांव डॉक के शेयरों ने 2,000 प्रतिशत से ज्यादा का तगड़ा मुनाफा दिया.
कैसे खोजें अगला मल्टीबैगर शेयर
अगर आप इस रैली से चूक गए हैं, तो पीटर लिंच के नियम काम आ सकते हैं. उनका कहना है कि उन उत्पादों या ब्रांड्स पर ध्यान दें जिन्हें लोग पसंद करते हैं. जिस चीज को आप रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल करते हैं, उसमें निवेश के मौके खोजें. अपने कार्यकाल में लिंच ने फोर्ड मोटर, टैको बेल, डंकिन डोनट्स समेत सौ से ज्यादा ऐसे शेयर खरीदे थे. उनका मानना है कि बेवजह ट्रेडिंग करने के बजाय अपना ध्यान लंबी रेस के घोड़ों को खोजने पर लगाना चाहिए. अपनी किताब ‘वन अप ऑन वॉल स्ट्रीट’ में उन्होंने लिखा है कि जीवनभर के सफल निवेश के लिए आपको बस कुछ बड़े विनर्स की जरूरत होती है.
सिर्फ पसंद के आधार पर न लगाएं पैसा
लिंच का मानना है कि टेनबैगर शेयर वो नहीं होते जिनकी हर जगह चर्चा हो रही हो. ये अक्सर ऐसे छिपे हुए नगीने होते हैं जिन्हें निजी ऑब्जर्वेशन से खोजा जाता है. हालांकि, उनका स्पष्ट कहना है कि सिर्फ इसलिए किसी रेस्तरां या कपड़े के ब्रांड का शेयर न खरीदें क्योंकि वहां ग्राहकों की भारी भीड़ है. ये सिर्फ एक शुरुआत होनी चाहिए. इसके बाद कंपनी की बैलेंस शीट, मुनाफे के आंकड़े, भविष्य की योजनाओं को अच्छी तरह समझना बहुत जरूरी है. पूरी रिसर्च के बाद ही अपनी कमाई बाजार में लगानी चाहिए.
भावनाओं पर नियंत्रण है सबसे जरूरी
बाजार की भारी उठापटक अक्सर निवेशकों को डरा देती है. घबराहट में लोग ऐसे फैसले लेते हैं जिन पर बाद में उन्हें पछतावा होता है. पीटर लिंच के अनुसार शेयर बाजार में पैसा बनाने की कुंजी डर से दूर रहना है. बाजार नीचे जाते हैं, कई बार बहुत ज्यादा नीचे जाते हैं. अगर आप इसके लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं, तो आपको शेयर नहीं खरीदने चाहिए. निवेश का कोई भी फैसला दिमाग से लेना चाहिए, न कि भावनाओं में बहकर. जो निवेशक अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाते, उनके लिए बाजार में टिकना मुश्किल होता है.



