भारत ने लगभग एक ही समय में चार रणनीतिक और आर्थिक रूप से अहम साझेदारों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत किया है. इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की बीजिंग यात्रा, विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मॉस्को यात्रा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की कनाडाअमेरिका यात्रा और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का जापान दौरा शामिल है. इन सभी यात्राओं में सीमा प्रबंधन, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे मुद्दे प्राथमिकता पर रहे हैं. इनका समय भी काफी अहम है. भारत 1213 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का आना तय है, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी शामिल होने की उम्मीद है.

चीन के साथ, अब सीमा विवाद पर बातचीत के साथसाथ निवेश पर भी चर्चा हो रही है. रूस के साथ बातचीत में ऊर्जा, फर्टिलाइजर और बढ़ते व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दे शामिल हैं. जापान में, गोयल ने निवेश और मैन्युफैक्चरिंग में साझेदारी की कोशिश की, जबकि सीतारमण कनाडा में निवेशकों और फाइनेंशियल कंपनियों से मुलाकात कर रही हैं. इस समय दो ऐसे पहलू भारत के सुरक्षा संबंध और उसके आर्थिक हित भी एक साथ आ रहे हैं जिन्हें अक्सर अलगअलग देखा जाता रहा है. आइए इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं…

चीन के साथ बॉर्डर और इंवेस्टमेंट पर चर्चा

डोभाल की 2425 अगस्त की बीजिंग यात्रा भारतचीन सीमा विवाद पर केंद्रित थी. स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स की बातचीत के 25वें दौर में, दोनों पक्ष सीमा के निर्धारण और मैनेजमेंट पर काम जारी रखने और बॉर्डर पर स्थितियों से निपटने के लिए डिप्लोमैटिक और मिलिट्री चैनलों का इस्तेमाल करने पर सहमत हुए. भारत और चीन पूर्वी और मध्य सेक्टर में मीटिंग पॉइंट्स और मिलिट्री हॉटलाइन जोड़ने पर भी सहमत हुए.

भारत ने चीन को बॉर्डर पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व के बारे में भी बताया. दोनों पक्ष सीमा के मुद्दे के पॉलिटिकल समाधान की दिशा में प्रयास जारी रखने पर सहमत हुए. सुरक्षा पर बातचीत अब बिजनेस और इन्वेस्टमेंट पर बातचीत के साथसाथ हो रही है. ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, बदले हुए नियमों के तहत चीन से जुड़ा 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा का इन्वेस्टमेंट पहले ही भारत में आ चुका है.

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और चीन बिजनेसटूबिजनेस एक्सचेंज और इन्वेस्टमेंट के लिए एक नए फ्रेमवर्क पर विचार कर रहे हैं. चर्चाओं में चीनी इन्वेस्टमेंट के फ्लो को तेज करने और नॉनस्ट्रेटेजिक सेक्टर में इन्वेस्टमेंट के लिए मंजूरी के प्रोसेस को आसान बनाने के तरीके शामिल हैं. रिपोर्ट के अनुसार, शी की संभावित ब्रिक्स यात्रा के दौरान बीजिंग इन्वेस्टमेंट पैकेज की घोषणा भी कर सकता है. चर्चा के तहत प्रस्तावों में स्पेशल इकोनॉमिक जोन और एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन में इन्वेस्टमेंट शामिल है, लेकिन किसी भी कमिटमेंट की पुष्टि नहीं हुई है.

चर्चा के तहत इन्वेस्टमेंट प्रस्तावों की भी सीमाएं हैं. रिपोर्ट के अनुसार, लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल और डिफेन्स से जुड़े प्रोजेक्ट्स सहित संवेदनशील क्षेत्र ऐसे इन्वेस्टमेंट के दायरे से बाहर हैं. भारत चीनी टेक्नोलॉजी और जरूरी रॉ मटीरियल तक ज्यादा एक्सेस भी चाहता है और ट्रेड डेफिसिट को कम करने में मदद के लिए भारत से ज्यादा चीनी इम्पोर्ट चाहता है.

रूस: एनर्जी सप्लाई और बढ़ता ट्रेड गैप

जयशंकर की 2324 अगस्त की मॉस्को यात्रा ने एनर्जी सिक्योरिटी और ट्रेड, दोनों पर जोर दिया है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। जयशंकर ने 27वीं भारतरूस अंतरसरकारी आयोग की बैठक में कहा कि भारतरूस के बीच सामान का व्यापार पांच सालों में चार गुना बढ़ गया है 202122 में लगभग 13 बिलियन डॉलर से बढ़कर 202526 में लगभग 60 बिलियन डॉलर हो गया है. लेकिन रूस के साथ भारत का ट्रेड डेफिसिट भी 6.6 बिलियन डॉलर से बढ़कर 50 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है.

जयशंकर ने कहा था कि इस असंतुलन को ठीक करना आज हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है. भारत और रूस ने 2030 तक आपसी व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है. जयशंकर ने इस लक्ष्य को पाने की दिशा में काम करते हुए मार्केट तक बेहतर पहुंच और व्यापार की बाधाओं को दूर करने जैसे उपायों के बारे में बताया है.

नई दिल्ली अब रूसी बाजार में भारतीय सामानों के लिए ज्यादा पहुंच चाहती है क्योंकि दोनों पक्ष 100 बिलियन डॉलर के टारगेट की दिशा में काम कर रहे हैं. एनर्जी और फर्टिलाइजर भी इस रिश्ते का एक अहम हिस्सा हैं. जयशंकर के साथ बैठक के दौरान, पुतिन ने पश्चिम एशिया संकट के कारण आई रुकावटों के बावजूद भारत को एनर्जी और फर्टिलाइजर की बिना रुकावट सप्लाई का भरोसा दिलाया.

रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, पुतिन ने कहा कि हम भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरी तरह से पूरा करने, इन सप्लाई को बढ़ाने और ऐसा करना जारी रखने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं.

जापान: इन्वेस्टमेंट, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग

गोयल की 2427 अगस्त की जापान यात्रा ट्रेड, इन्वेस्टमेंट और मैन्युफैक्चरिंग पर केंद्रित थी. उन्होंने 200 सदस्यों वाले बिजनेस डेलिगेशन का नेतृत्व किया, जो जापान जाने वाला भारत का अब तक का सबसे बड़ा बिजनेस डेलिगेशन था. इसमें सेमीकंडक्टर, कंपोनेंट और मैन्युफैक्चरिंग पर चर्चा हुई ये सभी भारत के 2047 मिशन के लिए बहुत जरूरी हैं.

गोयल ने कहा कि भारत फार्मास्यूटिकल्स और जहाज बनाने के क्षेत्र में जापानी कंपनियों के साथ जॉइंट वेंचर बनाना चाहता है. उनकी चर्चाओं में सेमीकंडक्टर, कंपोनेंट, एल्युमीनियम, पेंट और कोटिंग, और स्पोर्ट्सवियर व फुटवियर में इन्वेस्टमेंट के मौकों पर भी बात हुई.

सेमीकंडक्टर और कंपोनेंट पर चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब भारत हाईटेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरर्स के लिए देश में काम करना आसान बनाना चाहता है. गोयल ने कहा है कि सरकार सेमीकंडक्टर और ऑटोकंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए मंजू के प्रोसेस को आसान बनाने के लिए नियमों में बदलाव करेगी.

कनाडा: निवेशकों को लुभाना

सीतारमण की कनाडा यात्रा का मुख्य फोकस निवेश और फाइनेंशियल सेक्टर में सहयोग पर रहा है. वित्त मंत्री 25 अगस्त से 2 सितंबर तक कनाडा और अमेरिका के दौरे पर हैं, जहां वे ग्लोबल निवेशकों और कॉर्पोरेट अधिकारियों से मिल रही हैं और G20 वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक गवर्नर्स की बैठक में हिस्सा ले रही हैं.

कनाडा में, सीतारमण ने निवेशकों को भारत की ग्रोथ स्टोरी में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है और देश के बड़े पैमाने, खपत, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल मार्केट की खूबियां बताई हैं. उन्होंने फिनटेक, पेमेंट और फाइनेंशियल सर्विस के सेक्टर्स में मौजूद मौकों का भी जिक्र किया है.

बुधवार को सीतारमण ने कहा कि भारतीय और कनाडाई बैंकों, फिनटेक कंपनियों और रेगुलेटर्स के बीच सहयोग के मौके हैं, जिसमें पेमेंट और डिजिटल फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल हैं. उन्होंने भारत के डिजिटल इकोसिस्टम और इंश्योरेंस सेक्टर में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति देने के बारे में भी बताया.

इस बीच, भारत और कनाडा एक कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर बातचीत कर रहे हैं, और दोनों पक्ष 2026 के आखिर तक इस समझौते को पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं.

ब्रिक्स समिट से पहले

ये चारों मुलाकातें भले ही अलगअलग हों, लेकिन इनका मकसद एक ही है. भारत अलगअलग जगहों से निवेश जुटाने, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट बढ़ाने, और एनर्जी, टेक्नोलॉजी व जरूरी इनपुट हासिल करने की कोशिश कर रहा है. हर रिश्ते की अपनी प्रकृति होती है, जो यह तय करती है कि किस बारे में बात हो रही है और बातचीत कितनी तेजी से आगे बढ़ सकती है.

इस संपर्क का समय बहुत अहम है क्योंकि भारत 1213 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है. पुतिन इसमें शामिल होंगे, जबकि शी के भी समिट के लिए भारत आने की उम्मीद है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पुतिन और शी ने शंघाई सहयोग संगठन समिट से पहले 1 सितंबर, 2025 को तियानजिन में रूसभारतचीन की एक अनौपचारिक बैठक की थी. आने वाला ब्रिक्स समिट एक बार फिर चीन और रूस के साथ भारत के रिश्तों को एक ही डिप्लोमैटिक दायरे में लाएगा, जबकि नई दिल्ली दूसरे ब्रिक्स मेंबर्स के साथ भी अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है.