भारत और नेपाल के बीच चाय व्यापार को लेकर उत्पन्न हुए गतिरोध को समाप्त करते हुए भारत ने आयात नियमों में महत्वपूर्ण ढील दी है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए नए दिशानिर्देशों के बाद अब नेपाली चाय के निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। पिछले कुछ समय से चाय निर्यात में आ रही तकनीकी बाधाओं के कारण सीमा पर भारी मात्रा में चाय की खेप फंस गई थी, जिससे नेपाल के चाय उद्योग पर संकट के बादल मंडराने लगे थे।

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत जून महीने की शुरुआत में हुई थी, जब भारत ने नेपाल से आयात की जाने वाली चाय के प्रत्येक कंसाइनमेंट के लिए अनिवार्य क्वालिटी टेस्टिंग का नियम लागू किया था। इस कड़े नियम के चलते नेपाल के गोदामों में लगभग 1500 टन चाय का स्टॉक फंस गया था और कई नेपाली चाय फैक्ट्रियों को अपना उत्पादन आंशिक रूप से बंद करने पर मजबूर होना पड़ा था। इस स्थिति को लेकर नेपाल ने उच्च स्तरीय चिंता व्यक्त की थी और समस्या के समाधान के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन भी किया था।
नेपाल सरकार द्वारा भारत के साथ उच्च स्तर पर इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद, 16 जून को भारत के वाणिज्य सचिव की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में भारत ने नेपाल से आयात की जाने वाली चाय के लिए जांच की एक नई और सरल व्यवस्था को मंजूरी दी। FSSAI के हालिया सर्कुलर के अनुसार, भारत ने घरेलू खपत के लिए आयातित चाय हेतु ‘रिस्कबेस्ड टेस्टिंग सिस्टम’ को अपनाने का निर्णय लिया है।
इस नई व्यवस्था के तहत, अब प्रत्येक खेप की जांच करने के बजाय, कुल कंसाइनमेंट का केवल 20 प्रतिशत हिस्सा ही रैंडम तरीके से जांच के लिए चुना जाएगा। यानी सरल शब्दों में कहें तो, अब आमतौर पर पांच में से केवल एक कंसाइनमेंट को ही टेस्टिंग के लिए रोका जाएगा। बाकी सभी खेपों को सामान्य कस्टम और आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करने के बाद तेजी से फूडसेफ्टी मंजूरी मिल सकेगी। यह नियम भारत के उन सभी प्रवेश बिंदुओं पर तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जहां पहले से FSSAI के स्थायी कर्मचारी तैनात नहीं थे।
नेपाली अधिकारियों के अनुसार, भारत का यह निर्णय न केवल सीमा पर होने वाली देरी को कम करेगा, बल्कि एक्सपोर्टर्स के लिए स्टोरेज शुल्क और व्यापारिक अनिश्चितता जैसी समस्याओं में भी कमी लाएगा। जो एक्सपोर्टर्स FSSAI के मानकों का पूर्ण पालन कर रहे हैं, उन्हें अब भारतीय बाजारों तक अपनी पहुंच बनाने में अधिक आसानी होगी। हालांकि, नेपाली चाय उद्योग के कुछ वर्गों में इस नई छूट की निरंतरता को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है, लेकिन वर्तमान में यह निर्णय दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को सुगम बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस कदम से नेपाल के चाय उत्पादकों को अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने और भारतीय बाजार में अपनी उपस्थिति को फिर से मजबूत करने का अवसर मिलेगा।



