अमेरिका में भारतीय आमों की बिक्री ने इस वर्ष सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। जून के तीसरे सप्ताह तक भारतीय आमों का कुल निर्यात पिछले वर्ष के पूरे सीजन के निर्यात आंकड़ों को पार कर चुका है। अमेरिका में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के बीच अपनी जड़ों से जुड़े फलों की मांग हमेशा से अधिक रहती है, लेकिन इस बार यह मांग मुख्यधारा के अमेरिकी बाजारों तक पहुँच गई है। प्रसिद्ध रिटेल चेन कॉस्टको द्वारा पहली बार अपने स्टोरों में भारतीय आमों की बिक्री शुरू करने से इनकी पहुंच और लोकप्रियता में जबरदस्त इजाफा हुआ है।

भारतीय आमों की इस रिकॉर्ड तोड़ मांग का प्रमुख केंद्र न्यू जर्सी, डलास, शिकागो, लॉस एंजिलिस और वाशिंगटन डीसी जैसे शहर हैं, जहां भारतीय मूल की आबादी का घनत्व अधिक है। आयातकों ने अब फलों के वितरण में एक नया और व्यक्तिगत दृष्टिकोण अपनाया है। वे सीधे वैन के जरिए उन इलाकों में ताजे आम पहुंचा रहे हैं जहां भारतीय समुदाय की संख्या अधिक है। इन वैन के आने की सूचना ग्राहकों को व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से दी जाती है, जिससे लोगों में अपने पसंदीदा आम खरीदने के लिए होड़ मच जाती है। अल्फोंसो, केसर, बंगनपल्ली, रसालु और हिमायत जैसी प्रीमियम किस्मों की बाजार में सबसे अधिक मांग देखी जा रही है।
कीमतों की बात करें तो कॉस्टको जैसे बड़े स्टोर अब चार आमों वाले छोटे पैक पेश कर रहे हैं, जिनकी रिटेल कीमत 3 किलो के बॉक्स के लिए 45 से 55 डॉलर के बीच है। बाजार में भारतीय आमों की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए आयातकों की संख्या में भी बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। केवल न्यू जर्सी में ही लगभग 75 आयातक सक्रिय हैं, और पूरे अमेरिका में यह संख्या 250 तक पहुंच चुकी है।
निर्यात क्षेत्र के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन अभिषेक देव ने बताया कि ईरानइजराइल संघर्ष के कारण एयर फ्रेट की लागत में भारी वृद्धि हुई है। इसके बावजूद, इस सीजन में अमेरिका को भारत से आम का निर्यात सालाना आधार पर 30 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है। निर्यात विंडो के लंबे होने और जुलाई में उत्तर भारतीय किस्मों के बाजार में आने से यह सीजन कम से कम दो और सप्ताह तक जारी रहने की संभावना है। पिछले वर्ष अमेरिका को 2,188 मीट्रिक टन आम का निर्यात किया गया था, जिसका कुल मूल्य 9.6 मिलियन डॉलर था, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा जून के तीसरे सप्ताह में ही पार हो चुका है।



