उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में लंबे समय तक चर्चा में रहे 2005 बैच के सिक्किम कैडर के IAS अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह की यूपी में 11 साल लंबी प्रतिनियुक्ति अब खत्म हो गई है. सात बार सेवा विस्तार हासिल करने वाले आंजनेय सिंह को इस बार आठवां एक्सटेंशन नहीं मिला. इसके साथ ही मुरादाबाद मंडल के मंडलायुक्त के तौर पर उनकी पारी भी खत्म हो गई और अब उनके मूल कैडर सिक्किम लौटने की स्थिति बन गई है.

2015 में यूपी आए, लगातार बढ़ता गया कार्यकाल

आंजनेय सिंह साल 2015 में सिक्किम कैडर से प्रतिनियुक्ति पर उत्तर प्रदेश आए थे. शुरुआती तौर पर उनकी प्रतिनियुक्ति पांच साल के लिए थी, लेकिन यूपी सरकार की जरूरत और अनुरोध पर उनका कार्यकाल लगातार बढ़ता गया. साल 2020 से 2025 के बीच उन्हें कुल सात बार सेवा विस्तार मिला.

उनके एक्सटेंशन का सिलसिला भी खासा असामान्य रहा. 2020, 2021, 2022 और 2023 में एकएक साल का विस्तार मिला, जबकि 2024 में दो बार 66 महीने और 2025 में एक साल का विस्तार दिया गया. यह अवधि 14 अगस्त 2026 को समाप्त हो गई.

रामपुर में आजम खान से टकराव से मिली बड़ी पहचान

आंजनेय कुमार सिंह को सबसे ज्यादा चर्चा रामपुर के जिलाधिकारी रहते मिली. वर्ष 2019 में रामपुर डीएम के तौर पर उनकी तैनाती के दौरान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई हुई. इसी दौर में आंजनेय सिंह और आजम खान के बीच टकराव ने उन्हें यूपी की राजनीति और नौकरशाही में चर्चित चेहरा बना दिया.

इसके बाद मार्च 2021 में उन्हें मुरादाबाद मंडल का मंडलायुक्त बनाया गया. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। वह करीब 5 साल 5 महीने तक इस पद पर रहे और 14 अगस्त 2026 तक मुरादाबाद मंडल की जिम्मेदारी संभाली.

आखिर आठवां एक्सटेंशन क्यों नहीं मिला?

यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल है. उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में अभी तक आठवां एक्सटेंशन नहीं मिलने की कोई स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं की गई है. लेकिन माना जा रहा है लंबे समय तक उत्तर प्रदेश में डेपुटेशन पर तैनात है. फैसला केंद्र सरकार को करना था इस बार केंद्र सरकार ने डेपुटेशन पर अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं लगे इसीलिए उनको उत्तर प्रदेश से कार्य मुक्त कर दिया गया.

हालांकि, जो अंजनी कुमार सिंह आजम खान के लिए कॉल बनाकर रामपुर डीएम के तौर पर शुरू हुई थी वहीं अंजनी कुमार ने जब जौहर विश्वविद्यालय गिरने की बारी आई तो सुनवाई के दौरान रोग लगा दिए. अभी भी कमिश्नर के कोर्ट में मुकदमा चल रहा है इसके अलावा मुरादाबाद में कुछ और विवादों की वजह से चर्चा में रहे यही कारण है कि चुनावी साल में उनको एक्सटेंशन नहीं मिल पाया. हालांकि इसे किसी राजनीतिक कारण या सरकार की नाराजगी से जोड़ना फिलहाल जल्दबाजी होगी.

हालांकि, आंजनेय सिंह का मामला सामान्य तबादले से अलग था. वह मूल रूप से सिक्किम कैडर के अधिकारी हैं और यूपी में इंटरकैडर डेपुटेशन पर लगातार 11 साल रह चुके थे. सात लगातार एक्सटेंशन मिलना ही अपने आप में बेहद असामान्य था. आठवें विस्तार के लिए केंद्र स्तर पर भी मंजूरी की प्रक्रिया जरूरी थी.

चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक बदलाव

आंजनेय सिंह की विदाई ऐसे समय हुई है जब यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक स्तर पर बड़े फेरबदल चल रहे हैं। 24 अगस्त को सरकार ने 17 IAS अधिकारियों के तबादले किए। इसी फेरबदल में अलीगढ़ की मंडलायुक्त रहीं संगीता सिंह को मुरादाबाद का नया मंडलायुक्त बनाया गया है.

आंजनेय सिंह की प्रतिनियुक्ति अवधि खत्म होने के बाद उन्होंने मुरादाबाद मंडलायुक्त का प्रभार डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया को सौंप दिया था और दो महीने की छुट्टी पर चले गए थे. अब ताजा प्रशासनिक फेरबदल के बाद यूपी में उनकी वापसी की संभावना फिलहाल खत्म होती दिख रही है.

11 साल की पारी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

यूपी में अपने कार्यकाल के दौरान आंजनेय सिंह ने बुलंदशहर, फतेहपुर और रामपुर के जिलाधिकारी समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं. रामपुर और मुरादाबाद में उनके कार्यकाल को लेकर वह लगातार सुर्खियों में रहे. खास तौर पर आजम खान से जुड़े मामलों में उनकी सख्त प्रशासनिक छवि चर्चा का विषय बनी.

अब सवाल ये है कि सात बार जिस अधिकारी के कार्यकाल को बढ़ाया गया, उसे आठवीं बार क्यों नहीं बढ़ाया गया? फिलहाल, इसका कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है. इतना जरूर स्पष्ट है कि 14 अगस्त को सातवें एक्सटेंशन की अवधि पूरी होने के बाद इस बार केंद्र से नया विस्तार नहीं मिला और 11 साल बाद आंजनेय सिंह की यूपी में प्रतिनियुक्ति का अध्याय समाप्त हो गया.