“तुम्हारा पापा से विवाद है ना… देखो, मैं अभी अपना मंगलसूत्र निकालकर फेंक देती हूं! तुम्हारे पिता को छोड़ देती हूं, तुम्हारे साथ चलूंगी… हम दोनों साथ रहेंगे, लेकिन मुझे छोड़कर मत जाओ बेटा!” छत्रपति संभाजीनगर के खवड्या पहाड़ की चोटी पर हवा में गूंजती एक बेबस मां की ये आखिरी आर्त पुकार भी उसकी औलाद का दिल न पिघला सकी. पिता से अनबन और मोबाइल की किस्तों के तनाव में जान देने जा रहे 11वीं के होनहार बेटे को बचाने के लिए मां अपने सुहाग की सबसे बड़ी निशानी तक त्यागने को तैयार हो गई. लेकिन, जिद पर अड़े बेटे ने जैसे ही 200 फीट गहरी खाई में छलांग लगाई, उसे पकड़ने की अंधी दौड़ में मां और पिता भी खाई में जा गिरे. पल भर में पूरा परिवार खत्म हो गया.

मूल रूप से जालना के अंबड तालुका स्थित धनगर पिंपलवाड़ी गांव का रहने वाला चांदगुडे परिवार पिछले 18 सालों से शहर में रह रहा था. परिवार के 16 वर्षीय बेटे कुणाल ने हाल ही में 10वीं की परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और उसने 11वीं में दाखिला लिया था. कुणाल का सपना डॉक्टर बनने का था. लेकिन, बीते कुछ दिनों से कुणाल और उसके पिता के बीच पैसों और मोबाइल की ईएमआई को लेकर कड़वाहट बढ़ गई थी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। खर्च के पैसे न मिलने और महंगे आईफोन की किस्तों को लेकर कुणाल बेहद मानसिक तनाव में आ गया था.

गहनेiPhone फेंका और भागा पहाड़ की तरफ

शुक्रवार दोपहर तनाव इस कदर बढ़ा कि कुणाल ने अपने पास मौजूद आईफोन, हाथ की घड़ी और गले की चांदी की चेन निकालकर फेंक दी और सीधे खवड्या पहाड़ की तरफ दौड़ पड़ा. घबराए मातापिता भी उसके पीछे भागे. पहाड़ के खतरनाक ढलान पर खड़ा कुणाल जब छलांग लगाने की जिद करने लगा, तो उसकी मां का कलेजा कांप उठा. मां बिलखबिलख कर बेटे से पीछे हटने की भीख मांगती रही. कुणाल बोला “मां, मेरी कोई बात नहीं सुनता. मेरी जिंदगी में कोई दिलचस्पी नहीं है. अब कुछ नहीं हो सकता…”

मां ने अपनी ममता का वास्ता दिया, पति को छोड़ने और मंगलसूत्र उतार फेंकने तक का फैसला पल भर में सुना दिया ताकि बेटा रुक जाए. लेकिन अवसाद और गुस्से के अंधेरे में डूबे कुणाल ने खाई में छलांग लगा दी.

खाई में समा गया हंसताखेलता परिवार

जैसे ही कुणाल ने छलांग लगाई, किनारे पर खड़ी मां और पिता ने उसे हवा में पकड़ने की बदहवास कोशिश की. इस कोशिश में संतुलन बिगड़ा और दोनों भी बेटे के पीछे 150 से 200 फीट गहरी खाई में जा गिरे. मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीम ने जब तीनों के शवों को बाहर निकाला, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं. इस दिल दहला देने वाली त्रासदी ने आज की युवा पीढ़ी में कम होती सहनशीलता और पारिवारिक संवाद के अभाव पर एक गहरा और दर्दनाक सवाल छोड़ दिया है.