Deportation Policy: अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई के बीच भारतीय नागरिकों के डिपोर्टेशन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अगस्त के शुरुआती 15 दिनों में 5,200 से ज्यादा भारतीयों को अमेरिका से डिपोर्ट किए जाने का दावा किया गया है। इस कार्रवाई में अवैध प्रवासियों के साथ कुछ ऐसे भारतीय भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो H1B, O1 और स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका पहुंचे थे।

रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अमेरिका से भारतीयों को वापस भेजने के लिए नियमित रूप से डिपोर्टेशन फ्लाइट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, डिपोर्टेशन के आंकड़ों और अलगअलग मामलों की परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक रिकॉर्ड और रिपोर्टों की पुष्टि जरूरी है।
2025 में 3,567 भारतीय हुए थे डिपोर्ट
भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 2025 में 3,567 भारतीय नागरिकों को अमेरिका से डिपोर्ट किया गया था। जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक 1,076 भारतीयों को वापस भेजे जाने की जानकारी दी गई थी।
5 फरवरी 2025 को अमेरिका ने पहली बार सैन्य विमान से 104 भारतीयों को अमृतसर भेजा था। उस दौरान कुछ डिपोर्ट किए गए लोगों के हाथों में हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां लगाए जाने की तस्वीरें सामने आई थीं, जिसके बाद भारत में इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद भी हुआ था।
वीजा नियमों के उल्लंघन पर भी कार्रवाई
रिपोर्टों में कुछ ऐसे मामलों का भी जिक्र है, जिनमें वैध वीजा पर अमेरिका पहुंचे भारतीयों के खिलाफ वीजा शर्तों के कथित उल्लंघन पर कार्रवाई की गई। इनमें नौकरी जाने के बाद वीजा नियमों से जुड़ी स्थिति, बिना अनुमति काम करने और अन्य इमिग्रेशन उल्लंघनों के मामले शामिल बताए गए हैं।
कुछ मामलों में सोशल मीडिया गतिविधियों और स्थानीय कानूनों के उल्लंघन को लेकर भी कार्रवाई के दावे सामने आए हैं। हालांकि, हर मामले में डिपोर्टेशन के कारण अलग हो सकते हैं और किसी व्यक्ति को सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट या मामूली ट्रैफिक उल्लंघन के आधार पर डिपोर्ट किए जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
रिमूवल ऑर्डर का मतलब तुरंत डिपोर्टेशन नहीं
अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों के अनुसार, किसी व्यक्ति के खिलाफ रिमूवल ऑर्डर जारी होना और तत्काल डिपोर्टेशन होना एक ही बात नहीं है। संबंधित व्यक्ति के पास कई मामलों में कानूनी अपील का विकल्प हो सकता है या वह स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ सकता है।
अमेरिकी प्रशासन ने इमिग्रेशन नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई तेज करने का संकेत दिया है। इससे अमेरिका में रह रहे भारतीय छात्रों, प्रोफेशनल्स और अन्य प्रवासियों के बीच चिंता बढ़ी है।
कनाडा में भी भारतीय छात्रों पर संकट
अमेरिका के बाद कनाडा में भी भारतीय छात्रों को लेकर चिंता सामने आई है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अल्बर्टा में पोस्टग्रेजुएशन वर्क परमिट से जुड़े बदलावों के कारण करीब 1,500 भारतीय छात्रों के सामने अनिश्चितता पैदा हुई है।
इन छात्रों में ऐसे लोग शामिल हैं, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद कनाडा में काम कर रहे थे। परमिट से जुड़ी स्थिति बदलने के बाद कुछ छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी किया है और सरकार से राहत की मांग की है।
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बिना वैध वीजा या परमिट के रहना मुश्किल
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि जिन छात्रों के पास कनाडा में रहने का वैध वीजा या वर्क परमिट नहीं है, उन्हें देश छोड़ना होगा। अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने भी कहा है कि स्टडी वीजा अस्थायी दस्तावेज है और इसके आधार पर कोई विदेशी नागरिक स्थायी रूप से कनाडा में रहने का अधिकार नहीं पा सकता।
इस तरह अमेरिका और कनाडा में इमिग्रेशन नियमों को सख्त किए जाने से भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स के सामने अपने वीजा, वर्क परमिट और इमिग्रेशन स्टेटस को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
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