Himachal Se: Health Benefits of Besan in Gujarati Diet: ढोकला, खांडवी, फाफड़ा या गाठिया जब भी गुजराती व्यंजनों का नाम आता है, तो जुबां पर स्वाद और जेहन में बेसन यानी चना दाल का आटा से बने लजीज स्नैक्स की तस्वीर उभर आती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि गुजरात के पारंपरिक खानपान में बेसन की इतनी अहमियत क्यों है? कुछ लोग इसे सिर्फ स्वाद से जोड़कर देखते हैं, तो कुछ रोजाना इसके सेवन को लेकर असमंजस में रहते हैं। गुजरात में बेसन से बने खाद्य पदार्थों की लोकप्रियता के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण यह है कि चना और उससे बनने वाला बेसन राज्य में लंबे समय से आसानी से उपलब्ध रहा है इसलिए बेसन स्थानीय भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। इसके अलावा, गुजरात में बड़ी संख्या में लोग शाकाहारी हैं, ऐसे में बेसन प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत है। बेसन से खमन, ढोकला, खांडवी, फाफड़ा, गाठिया और कढ़ी जैसे कई स्वादिष्ट व्यंजन आसानी से बनाए जा सकते हैं। यह लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है, किफायती होता है और विभिन्न मसालों के साथ आसानी से मेल खा जाता है। यही वजह है कि बेसन से बने व्यंजन गुजराती खानपान और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं।

Gujarati Diet: ढोकला से लेकर खांडवी तक, गुजराती खान-पान में क्यों छाया रहता है बेसन? एक्सपर्ट से जानिए इसके फायदे और नुकसान​
Gujarati Diet: ढोकला से लेकर खांडवी तक, गुजराती खान-पान में क्यों छाया रहता है बेसन? एक्सपर्ट से जानिए इसके फायदे और नुकसान​

आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. प्रताप चौहान के अनुसार, बेसन स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी खाद्य पदार्थों में से एक है। यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है और ग्लूटेनफ्री होने के कारण कई लोगों के लिए उपयुक्त विकल्प हो सकता है। उन्होंने बताया कि डायबिटीज और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल से जूझ रहे लोगों को भी सीमित मात्रा में बेसन का सेवन करने से फायदा होता है। बेसन में आयरन पाया जाता है, इसलिए यह खून की कमी वाले लोगों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा यह हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है और अच्छी नींद को भी सपोर्ट कर सकता है। बेसन का चीला जैसे व्यंजन इसके सेवन का आसान और पौष्टिक तरीका हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि बेसन का सेवन कैसे सेहत को फायदा पहुंचाता है और इसका कितना सेवन सेहत के लिए खतरा है?

बेसन कैसे सेहत के लिए फायदेमंद है?

प्रोटीन का अच्छा स्रोत

बेसन चने से तैयार किया जाता है और यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों की मरम्मत और निर्माण में मदद करता है। शाकाहारी लोगों के लिए बेसन प्रोटीन प्राप्त करने का आसान और किफायती विकल्प हो सकता है। इसलिए बेसन से बने चीला, ढोकला या अन्य व्यंजनों को संतुलित आहार में शामिल किया जा सकता है। चने और बेसन में कैल्शियम तथा फास्फोरस जैसे खनिज मौजूद होते हैं। ये दोनों पोषक तत्व हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से हड्डियों की सेहत दुरुस्त रहती है।

फाइबर से भरपूर

छिलके वाले चने और उससे बने बेसन में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद माना जाता है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखने में मदद करता है और नियमित मल त्याग को बढ़ावा देता है। यही कारण है कि फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को स्वस्थ आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

वजन कंट्रोल करने में मददगार

बेसन में मौजूद प्रोटीन और फाइबर लंबे समय तक तृप्ति का एहसास कराते हैं। इससे बारबार भूख लगने की संभावना कम हो सकती है और अनावश्यक स्नैकिंग से बचाव होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बेसन का सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए तो यह वजन कंट्रोल कर सकता है।

डायबिटीज रोगियों के लिए बेहतर विकल्प

बेसन का ग्लाइसेमिक प्रभाव सामान्य गेहूं के आटे की तुलना में अपेक्षाकृत कम माना जाता है। यही वजह है कि कई लोग रोटी के आटे में बेसन मिलाकर उपयोग करते हैं। इससे भोजन में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बढ़ सकती है, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मददगार हो सकता है।

कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में सहायक

बेसन में मौजूद फाइबर शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है। नियमित रूप से फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है और यह दिल से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को कम करने में योगदान दे सकता है।

कब्ज की समस्या से राहत

फाइबर पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बेसन और चने का सेवन आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, जिससे कब्ज की समस्या से राहत मिल सकती है। पर्याप्त पानी के साथ इसका सेवन करने से लाभ और बढ़ सकता है।

आयरन और फोलिक एसिड का स्रोत

चने और बेसन में आयरन तथा फोलिक एसिड जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है, जबकि फोलिक एसिड नई कोशिकाओं के निर्माण और ब्लड सर्कुलेशन के लिए आवश्यक माना जाता है। इसलिए यह खून की कमी से बचाव में मददगार हो सकता है।

लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद

बेसन में मौजूद फाइबर और प्रोटीन भोजन के बाद लंबे समय तक तृप्ति का एहसास बनाए रखते हैं। यही कारण है कि बेसन से बने व्यंजन नाश्ते या हल्के भोजन के रूप में अच्छे विकल्प माने जाते हैं। इससे बारबार खाने की आदत पर भी कंट्रोल किया जा सकता है।

कई तरह से किया जा सकता है सेवन

बेसन का उपयोग चीला, ढोकला, कढ़ी, पकोड़े और अन्य कई पारंपरिक व्यंजनों में किया जाता है। वहीं उबले या भुने चने में टमाटर, खीरा, प्याज और हरी सब्जियां मिलाकर पौष्टिक नाश्ता तैयार किया जा सकता है। इससे स्वाद के साथसाथ पोषण भी मिलता है।

बेसन खाने का सही समय और मात्रा

बेसन का सेवन सुबह के नाश्ते में बेसन का चीला या ढोकला बनाकर कर सकते हैं। दोपहर के भोजन में कढ़ीचावल के रूप में कर सकते हैं। दिन के समय बेसन का सेवन करने का उचित समय माना जाता है। इस समय हमारा मेटाबॉलिज्म तेज होता है और इसे पचाना आसान होता है। रोजाना के संतुलित आहार में एक से दो ढोकले के टुकड़े या एक मध्यम आकार का चीला पर्याप्त है। इसके साथ प्रचुर मात्रा में हरी सब्जियां शामिल करना इसकी पोषण क्षमता को दोगुना कर देता है।

बेसन का ज्यादा सेवन कैसे हानिकारक है?

हालांकि बेसन पोषक तत्वों से भरपूर होता है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन कुछ लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ज्यादा मात्रा में बेसन खाने से पेट में भारीपन, गैस, ब्लोटिंग और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं, खासकर उन लोगों में जिनका पाचन तंत्र संवेदनशील होता है। अधिक मात्रा में बेसन से बनी तलीभुनी चीजें खाने पर कैलोरी और वसा का सेवन भी बढ़ सकता है, जिससे वजन बढ़ने का खतरा रहता है। कुछ लोगों को चने या बेसन से एलर्जी भी हो सकती है। इसलिए बेसन का सेवन संतुलित मात्रा में, पर्याप्त पानी और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों के साथ करना बेहतर माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी प्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. प्रताप चौहान के विचारों और सामान्य पोषण संबंधी जागरूकता पर आधारित है। बेसन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, लेकिन इसका अत्यधिक या तलाभुना सेवन हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति के अनुसार अलग प्रभाव डाल सकता है। अपने खानपान में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।