Himachal Se: Padmini Ekadashi Ke Niyam: इस साल 27 मई को अधिकमास की पहली एकादशी यानी पद्मिनी एकादशी मनाई जा रही है।धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, पद्मिनी एकादशी का व्रत रखने से यज्ञों के समान पुण्य फल मिलता है और भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है।

Padmini Ekadashi Rules : अधिकमास की पद्मिनी एकादशी के दिन बिल्कुल न करें ये गलतियां, पड़ेगा बहुत भारी​
Padmini Ekadashi Rules : अधिकमास की पद्मिनी एकादशी के दिन बिल्कुल न करें ये गलतियां, पड़ेगा बहुत भारी​

चूंकि, यह एकादशी तीन साल में एक बार आती है, इसलिए इसके नियम और सावधानियां भी बहुत विशेष होती है। पद्मिनी एकादशी के दिन अनजाने में की गई गलतियां आपके व्रत और पूजा के पुण्य को कम कर सकती है।

पद्मिनी एकादशी के दिन क्या नही करना चाहिए?

  • तामसिक भोजन का सेवन

ज्योतिष एवं लोक मान्यता के अनुसार,पद्मिनी एकादशी के दिन गलती से भी मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ यानी शराब, तंबाकू आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

  • बाल और नाखून काटना मना

कहते है एकादशी तिथि पर सिर्फ तामसिक भोजन सेवन करने की मनाही नहीं होती है। बल्कि बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना और नाखून काटने की पूरी तरह मनाही होती है। यहां तक कि इस दिन कपड़े धोने और साबुन का अत्यधिक प्रयोग करने से भी बचना चाहिए।

  • पेड़पौधों की पत्तियां तोड़ना  मना

शास्त्रों के अनुसार,एकादशी के दिन पूजा के लिए भी तुलसी के पत्ते या अन्य पौधों की पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए. तुलसी दल एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। ताकि पूजा के दिन आपको कोई परेशानी न हो।

  • लड़ाई झगड़े से दूर रहे

एकादशी का व्रत मानसिक पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन किसी पर गुस्सा न करें, न ही घर में कलह या वादविवाद का माहौल बनने दे।

  • ब्रह्मचर्य का पालन न करना

पद्मिनी एकादशी के दिन शारीरिक और मानसिक रूप से ब्रह्मचर्य का पूरी तरह पालन करना अनिवार्य है।

  • चावल का सेवन मना

अन्य एकादशियों की तरह पद्मिनी एकादशी पर भी घर के किसी भी सदस्य को नहीं करना चाहिए। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चावल खाने से रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म मिलता है। इसलिए इस दिन चावल खाने की भूल न करें।

पद्मिनी एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व

ज्येष्ठ अधिक मास में पड़ने वाली व्रत बहुत फलदायी और विशेष मानी जाती है। यह एकादशी प्रत्येक वर्ष नहीं बल्कि तीन वर्षों में एक बार मलमास या पुरुषोत्तम मास में आती है। इन्हीं कारणों से इस एकादशी का महत्व धार्मिक दृष्टि से काफी बढ़ जाता है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। साथ ही यह एकादशी व्रत अश्वमेध यज्ञ और समस्त तीर्थों के दर्शन के समान पुण्य फल दिलाने वाला माना जाता है।