Himachal Se: Religious Event Akola News: श्रीमद् भागवत शाश्वत सुख का सार है। भागवत का प्रतिदिन श्रवण करने से शाश्वत सुख की प्राप्ति होती है। भक्तों को इसका सतत श्रवण, मनन और चिंतन कर प्रभु की प्राप्ति का मार्ग सुगम करना चाहिए। माहेश्वरी महिला मंडल के आयोजन में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर स्थानीय माहेश्वरी भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में उन्होंने प्रथम पुष्प समर्पित किया। मानव को मार्ग दिखाती भागवतउन्होंने कहा कि भागवत कथा प्राचीन होने के बावजूद अपने मधुरता और प्रभाव से आज भी मानव को मार्ग दिखाती है। जीवन में सब कुछ क्षणभंगुर है, केवल मृत्यु और भगवान ही शाश्वत हैं।

नैमिषारण्य से इस भागवत की शुरुआत हुई और सुत महाराजों ने भागवत की अधिष्ठात्री भगवान श्रीकृष्ण को इसी माध्यम से प्रकट किया। बाक्सभगवान देते भक्तों को प्रसादभगवान का स्वरूप सद्चितआनंद है। सद् अर्थात् अविनाशी तत्व है कृष्ण अविनाशी हैं। चित अर्थात तेजोमय प्रकाश है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। भगवंत हमेशा भक्तों को प्रकाश देते हैं और वे आनंद के स्वरूप हैं। आनंद का कोई विलोम नहीं हो सकता आनंद भगवान का परिचायक शब्द है।
संसार में विषयानंद अधिक
संसार में सच्चा आनंद नहीं, बल्कि विषयानंद अधिक है। यह आनंदरूपी हास्य केवल मनुष्य ही अनुभव कर सकता है। पशुओं को यह सम्भव नहीं। भगवंत ने मनुष्य को पाँच कोश दिए हैं जबकि प्राणियों को चार पाँचवा कोश आनंदमयी हास्य है जो प्राणियों को उपलब्ध नहीं है।
भागवत ही शाश्वत सुख की कुंजी: राजेश कृष्णा महाराज प्रतिपादन
अपने प्रथम सत्र में उन्होंने धुंदकारी और गोकर्ण की संगीतमय कथा प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन और वक्ता परिचय शोभा बियाणी व आरती जाजू ने किया। निकली भव्य शोभायात्राकथा के आरंभ में बैंडबाजे के साथ भागवत की निकाली गई। इस अवसर पर कथा के मुख्य यजमानों में मीना व उमेश टावरी, कृष्णा व किशोर लाहोटी, पोथी यजमान लीला व रमेश मालपाणी, रमा व डॉ। अमरीश खटोड़, अनुराधा व आशीष बाहेती, निधि व पंकज कोठारी, अनुसया व कुंजबिहारी जाजू ने भागवत ग्रंथ सिर पर रखकर सहभागिता की।
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महाराज का स्वागत विजयकुमार तोष्णीवाल, वंदना हेडा, प्रवीण हेडा, शोभा भाला आदि ने किया। 27 मई को प्रल्हाद चरित्र व वामन अवतार पर कथा होगी तथा शाम 6 बजे आर्कि पवन बंग के आयोजन में राम रक्षा का कार्यक्रम होगा।



