Himachal Se: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में विशेष पॉक्सो अदालत ने 9 साल की बच्ची से रेप की कोशिश मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. मासूम बच्ची के साथ चाकू के बल पर दुष्कर्म का प्रयास करने वाले आरोपी राजू हरिजन उर्फ रामनिवास को कड़ी सजा सुनाई है. अदालत ने दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही, दोषी पर 11 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

‘चलो टॉफी दूंगा…’ 9 साल की बच्ची को बहाने से ले जाकर की थी दरिंदगी की कोशिश; अब 20 साल जेल में रहेगा हैवान​
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यह शर्मनाक घटना करीब साढ़े चार साल पहले यानी 30 दिसंबर 2021 की शाम को रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र में घटित हुई थी. अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी राजू हरिजन ने शाम के समय घात लगाकर 9 वर्षीय मासूम बच्ची को बहलायाफुसलाया और अपने घर ले गया. वहां ले जाकर उसने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया.

रेप की कोशिश की थी

पीड़ित बच्ची के बयानों के मुताबिक, आरोपी ने उसे एक धारदार चाकू दिखाया और चिल्लाने या किसी को बताने पर जान से मारने की खौफनाक धमकी दी. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके बाद उसने मासूम के साथ जबरन दुष्कर्म करने का घिनौना प्रयास किया. हालांकि, बच्ची ने हिम्मत नहीं हारी और किसी तरह खुद को आरोपी के चंगुल से छुड़ाकर वहाँ से भाग निकली.

घर पहुंचकर उसने रोते हुए अपने परिजनों को पूरी आपबीती सुनाई, जिसके बाद पीड़िता की मां की तहरीर पर रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में आरोपी के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था.

घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया. अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद पीड़िता के बयान दर्ज किए. पुलिस जांच में पर्याप्त और पुख्ता सबूत मिलने के बाद आरोपी राजू हरिजन के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई.

यह पूरा मामला अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश ओमकार शुक्ला की अदालत में विचाराधीन था. मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनीं, सरकारी गवाहों के बयानों को परखा और पुलिस द्वारा पेश किए गए दस्तावेजी साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन किया.

अदालत का बड़ा फैसला

सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपी ने एक मासूम के बचपन और उसकी अस्मत पर हमला करने का अक्षम्य अपराध किया है. अदालत ने आरोपी राजू हरिजन को दोषी करार देते हुए 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई.

इसके अलावा, कोर्ट ने एक मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए यह भी आदेश दिया कि दोषी से वसूली जाने वाली 11 हजार रुपये की पूरी जुर्माना राशि पीड़ित बच्ची को मुआवजे के रूप में दी जाएगी. अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा जेल में पहले ही बिताई जा चुकी अवधि को उसकी मुख्य सजा में समाहित कर दिया जाएगा. इस फैसले के बाद पीड़िता के परिवार ने राहत की सांस ली है.