Himachal Se: उत्तर प्रदेश में जाति जनगणना का काम 22 मई से शुरू होगा, लेकिन सीएम योगी ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के सीटों की गिनती अभी से शुरू कर दी है। सीएम योगी अभी से यूपी की किलेबंदी कर रहे हैं। आज योगी ने अपनी टीम में 6 नए चेहरों को शामिल किया है। सबको एक किले की जिम्मेदारी मिली है।

जाट, पंडित, लोधी, पासी... CM योगी का हिंदू+जाति का खेल, UP में अभी से 2027 की किलेबंदी, जानिए पूरा समीकरण​
जाट, पंडित, लोधी, पासी… CM योगी का हिंदू+जाति का खेल, UP में अभी से 2027 की किलेबंदी, जानिए पूरा समीकरण​

अखिलेश यादव अभी तक यूपी में जाति गिन रहे थे, लेकिन अब जाति की गिनती भी सीएम योगी ने शुरू कर दी। सीएम योगी ने अपने हिंदू वोट के फॉर्मूले में पंडित, विश्वकर्मा, दलित, जाट और लोधी सबको जोड़ लिया है। सीएम योगी की गिनती से अखिलेश एंड कंपनी पैनिक मोड में आ गई है। सीएम योगी के 27 में होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति की फुल डिटेल इस रिपोर्ट में पढ़िये…

सीएम योही के हिंदू वोट का होगा टेस्ट

साल 2027 का सबसे बड़ा चुनाव उत्तर प्रदेश का होगा। इस चुनाव में टेस्ट सीएम योगी के हिंदू वोट का भी होगा। साथ ही इस दौरान अग्निपरीक्षा अखिलेश के PDA वाले फॉर्मूले की भी होगी। अखिलेश का यूपी के लिए फॉर्मूला यादव प्लस मुस्लिम प्लस सीट के हिसाब से जाति वोट बैंक है। वहीं, यूपी में योगी के पास धर्म, कर्म और मंत्रिमंडल है।

सीएम योगी की टीम के 6 नए चेहरे

सीएम योगी की टीम में रविवार को एक नहीं 6 नए चेहरे जुड़े हैं। भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडेय, कैलाश राजपूत, सुरेंद्र दिलेर, हंसराज विश्वकर्मा और कृष्णा पासवान को शामिल किया गया है। दो मंत्री अजित सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर का यूपी में प्रमोशन भी हुआ है। नए बनने वाले मंत्रियों में 1 ब्राह्मण, 3 ओबीसी और 2 दलित वर्ग से हैं।

यूपी में धर्म और सियासत एक साथ

मंत्रि पद की शपथ के दौरान भूपेंद्र चौधरी जयश्री राम वाला पटका पहनकर आए थे। कृष्णा पासवान राधेराधे वाला पटका गले में डालकर आई थी। कैलाश राजपूत राम नामी गमछा गले में सजाकर आए थे। इससे पता चलता है कि यूपी में धर्म और सियासत ऐसे एक साथ चलती है।

मंडल और कमंडल दोनों करता है काम

यूपी हिंदुस्तान का ऐसा इकलौता राज्य है। जहां मंडल और कमंडल दोनों काम करता है। यूपी की सियासत में जाति भी चलती है। यूपी की सियासत में धर्म की राजनीति भी चलती है। यूपी वो राज्य है, जहां पर 20 परसेंट मुस्लिम वोट से भी सरकार बनती और बिगड़ती है। इसलिए यूपी को जीतना सबसे मुश्किल होता है।

धर्म के ध्वजावाहक हैं सीएम योगी

यूपी में धर्म के सबसे बड़े ध्वजवाहक योगी आदित्यनाथ हैं। धर्म की पिच पर भगवाधारी योगी को अखिलेश तो क्या कोई भी विरोधी भी नेता चुनौती नहीं दे सकता है। अगर काम की बात करें तो सीएम योगी का ये नया उत्तर प्रदेश है, जहां योगी का ना कर्फ्यू…ना माफिया…ना दंगा…सब चंगा वाला नारा सबसे जोर से लगता है।

223 सीटों में हिंदू वोट ही निर्णायक

यूपी का चुनाव 80 20 का होता है। यूपी में 233 ऐसी सीट हैं, जिसमें हिंदू वोट ही निर्णायक है। भगवाधारी योगी की सबसे बड़ी ताकत हिंदू वोट है। यूपी में दो बार 60 फीसद से ज्यादा वोटिंग हुई। दोनों बार यूपी में भगवा लहराया। अगर बंगाल की तरह 90 फीसद हिंदू निकल आया तो सीएम योगी की जीत को नहीं रोक पाएगा।

धर्म + जाति + लॉ एंड ऑर्डर सबसे बड़ा मुद्दा

इसलिए अब सीएम योगी ने यूपी में जातियों को जोड़कर हिंदू वोट का सॉलिड वोट बैंक तैयार कर रहे हैं। जैसे बिहार में हुआ, जैसा बंगाल में हुआ। वही फॉर्मूला सीएम योगी यूपी में लगा रहे हैं। सीएम योगी धर्म + जाति + लॉ एंड ऑर्डर। सबको एक साथ जोड़ रहे हैं। हिंदू वोट का सॉलिड जोड़ बना रहे हैं।

27 में अखिलेश के पास आखिरी मौका

वहीं, 2027 में अखिलेश यादव की सियासत और विरासत दोनों दांव पर हैं। 2017 और 2022 हारने के बाद अखिलेश के पास ये आखिरी मौका है। अगर इस बार भी सपा की साइकिल पंचर हो गई तो यूपी में साइकिल दोबारा कभी नहीं दौड़ पाएगी। ये बात अखिलेश को भी अच्छे से पता है।

सोशल मीडिया पर खीझ मिटा रहे अखिलेश यादव

इसलिए अखिलेश यादव एक्स पर एक्टिव हो गए हैं। योगी मंत्रिमंडल के एक्सटेंशन पर दिल्ली से पर्ची वाला तंज कस रहे हैं। अगलबगल के नाम पर  सवाल उठा रहे हैं। तो कभी अखिलेश यादव एक्स पर समाचार सुना रहे हैं। जनता का नाम लेकर अपनी खीझ मिटा रहे हैं। अखिलेश यादव एक्स पर भी जाति ही ढूंढ रहे हैं। जाति वाले सवाल ही कर रहे हैं। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पिछले दिनों लखनऊ में कहा, ‘अखिलेश यादव हताशा में हैं। पश्चिम बंगाल में कमल खिलने के बाद, अब उन्हें 2047 तक इंतज़ार करना पड़ेगा।’ 

मुस्लिम मोल्लों पर अखिलेश यादव की नजर

अखिलेश यादव की नजर मुस्लिम मोहल्लों पर है, जहां से उनकी सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं। यूपी की 143 सीटों पर मुस्लिम अपना असर रखते हैं। 73 सीटें ऐसी हैं, जहां मुसलमान 30 प्रतिशत से ज्यादा हैं। 2024 में अखिलेश ने अपने MY वाले फॉर्मूले का एक्सटेंशन किया था। सीट पर जाति वोट के हिसाब से कैंडिडेंट सेलेक्ट किया था। अब वही फॉर्मूला अखिलेश फिर से रिपीट कर रहे हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अगर यूपी के 2027 को समझना है तो पहले 2022 को 2024 को समझना होगा।