नई दिल्‍ली: कच्‍चे तेल (क्रूड) की कीमतें शुक्रवार को लगातार पांचवें सत्र में बढ़ीं। मिडिल ईस्‍ट में बढ़ते तनाव और सप्‍लाई में रुकावट के नए डर ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया।

बाजार ईरान से जुड़े एक बड़े संघर्ष के जोखिम को अपनी कीमतों में शामिल कर रहे हैं। विश्लेषक अब खुले तौर पर ऐसे सिनेरियो पर चर्चा करने लगे हैं जिनमें अगर स्थिति यही बनी रहती है तो क्रूड की कीमतें 110 डॉलर से लेकर 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। भारत के लिए इसके बहुत ज्‍यादा मायने हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यही वजह है कि ताजा घटनाक्रमों को लेकर सतर्क है।

क्रूड मार्केट में मची है खलबली
1.07 GMT तक ब्रेंट क्रूड वायदा 1.23 डॉलर यानी 1.17% बढ़कर 106.3 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1.07 डॉलर यानी 1.12% बढ़कर 96.92 डॉलर पर पहुंच गया।
पिछले सत्र में ही दोनों बेंचमार्क 3% से अधिक बढ़ गए थे।

तेहरान को लेकर हवाई रक्षा गतिविधियों की रिपोर्ट और ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष के गहराने के संकेतों के बाद कीमतों में लगभग 5 डॉलर प्रति बैरल की तेजी आई।

क्‍यों बढ़ने लगी है टेंशन?
कीमतों में यह ताजा उछाल तब आया जब ईरान ने एक फुटेज जारी किया। इसमें कमांडो होर्मुज स्‍ट्रेट में एक मालवाहक जहाज पर चढ़ते हुए दिखाई दे रहे थे। तेहरान ने यह भी दावा किया कि उसके हवाई रक्षा प्रणालियों ने ‘दुश्मन के ठिकानों’ को निशाना बनाया था। इससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल ट्रांजिट रूटों में से एक की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाजार की घबराहट को और बढ़ा दिया। यह कहते हुए कि ईरान ने हो सकता है कि दो सप्ताह के सीजफायर के दौरान अपने हथियारों का जखीरा ‘थोड़ा-बहुत’ बढ़ा लिया हो। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिकी सेनाएं इसे एक दिन के भीतर ही खत्म कर सकती हैं।

होर्मुज के जोखिमों के चलते बिगड़ी स्थिति
टकराव अब तेजी से समंदर की ओर बढ़ गया है। इसमें वॉशिंगटन और तेहरान दोनों ही नौसैनिक शक्ति प्रदर्शन के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि होर्मुज स्‍ट्रेट से गुजरने से पहले जहाज उसकी अनुमति लें। वहीं, ट्रंप ने दावा किया है कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर अमेरिका का पूरा कंट्रोल है।

इस बीच, अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों और जहाजों को निशाना बनाते हुए अपनी नाकेबंदी जारी रखी है। अनिश्चितता की एक और परत जोड़ते हुए इजरायल के रक्षा मंत्री ने कहा कि यरुशलम ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू करने और ‘खामेनेई वंश को पूरी तरह खत्म करने’ के लिए अमेरिका की मंजूरी मिलने के इंतजार में है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि व्हाइट हाउस में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद इजरायल और लेबनान अपने संघर्ष विराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं।

$110, $130, $150: डरा रही हैं बढ़ती कीमतें
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा सीजफायर सिर्फ एक अस्थायी रुकावट हो सकता है। रॉयटर्स ने हैटोंग फ्यूचर्स के एक नोट के हवाले से बताया कि यह संघर्ष-विराम आगे और तनाव बढ़ने की तैयारी का जरिया बनता दिख रहा है।

ब्रोकरेज फर्म ने चेतावनी दी है कि अगर अप्रैल के आखिर तक अमेरिका-ईरान बातचीत से कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता है तो इस साल कच्चे तेल की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं।

मैक्‍वायर को उम्मीद है कि कम समय के लिए कच्चे तेल की कीमतें 85-90 डॉलर की सीमा में बनी रहेंगी। जैसे-जैसे सप्‍लाई की स्थिति बिगड़ेगी, कीमतें धीरे-धीरे 110 डॉलर की ओर बढ़ेंगी। फर्म ने यह भी चेतावनी दी कि अगर यह रुकावट लंबे समय तक जारी रही तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।

नुवामा इंस्‍टीट्यूशनल इक्विटीज ने भी इन्हीं चिंताओं को दोहराते हुए कहा कि होर्मुज स्‍ट्रेट अगर लंबे समय तक बंद रहता है तो कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर से 150 डॉलर की सीमा में पहुंच सकती हैं। स्‍ट्रेट से हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही होती है।