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दांतों से लेकर स्किन तक, फिटकरी के हैं कई आयुर्वेदिक लाभ, पर इस्तेमाल से पहले जान लें ये जरूरी सावधानियां

आयुर्वेदिक डॉक्टर दीपक कुमार के मुताबिक सीमित मात्रा और सही तरीके से फिटकरी का इस्तेमाल किया जाए तो फिटकरी कई रोगों में फायदा पहुंचा सकती है।

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(Photo source-chatgpt)
आमतौर पर फिटकरी (Alum) को लोग शेविंग के बाद एंटीसेप्टिक के रूप में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन आयुर्वेद में फिटकरी का उपयोग कई स्वास्थ्य समस्याओं में किया जाता रहा है। आयुर्वेदिक डॉक्टर दीपक कुमार के मुताबिक सीमित मात्रा और सही तरीके से फिटकरी का इस्तेमाल किया जाए तो फिटकरी कई रोगों में फायदा पहुंचा सकती है। फिटकरी स्किन से लेकर ओरल हेल्थ तक सुधारने में असरदार साबित होती है। मेडिकल साइंस के मुताबिक फिटकरी में Astringent गुण मौजूद होते हैं जो घाव को सिकोड़कर तेज़ उपचार करते हैं। फिटकरी में Antibacterial गुण मौजूद होते हैं जो बैक्टीरिया का विकास रोकते हैं। फिटकरी सूजन को कम करती है और घाव को जल्दी ठीक करती है। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि आयुर्वेद के मुताबिक फिटकरी का सेवन कैसे सेहत के लिए फायदेमंद साबित होता है।

मुंह के बैक्टीरिया को मारती है फिटकरी

फिटकरी में aluminum sulfate और potassium sulfate जैसे  यौगिक होते हैं जो बैक्टीरिया के विकास को रोकते हैं। इसे पानी में मिलाकर गरारे करने से मुंह के छालों का इलाज होता है।

चेहरे की झुर्रियों और स्किन टाइटनिंग में है उपयोगी

पानी में थोड़ी सी फिटकरी मिलाकर चेहरे पर हल्के हाथों से मसाज करने से स्किन टाइट होती है और झुर्रियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं। यह उपाय ऑयली, ड्राई और नॉर्मल सभी तरह की स्किन के लिए उपयुक्त माना जाता है।

शरीर की दुर्गंध दूर करने में मददगार

शरीर से ज्यादा बदबू आने की समस्या पसीने, बैक्टीरिया या सफाई की कमी के कारण हो सकती है। ऐसे में नहाने के पानी में आधा से एक ग्राम फिटकरी मिलाकर नहाने से बॉडी ओडर धीरे-धीरे कम होने लगता है। गुनगुने पानी में फिटकरी जल्दी घुल जाती है।

दांतों, मसूड़ों और टॉन्सिल्स की समस्या में मिलती है राहत

जिन लोगों को मसूड़ों से खून आना, पायरिया, दांतों की जड़ कमजोर होना या टॉन्सिल्स की समस्या रहती है उनके लिए फिटकरी वाले पानी से कुल्ला करना असरदार साबित होता है। इससे बैक्टीरिया कम होते हैं और मुंह की बदबू में भी राहत मिलती है।

फेफड़ों में बलगम और खांसी में मिलती है राहत

आयुर्वेद में फिटकरी को भूनकर उसकी भस्म तैयार की जाती है, जिसे अन्य औषधियों के साथ सीमित मात्रा में लेने से बलगम बाहर निकालने में मदद मिलती है। यह प्रयोग ब्रोंकाइटिस और अस्थमा जैसी स्थितियों में असरदार माना जाता है।

बार-बार होने वाले बुखार की है आयुर्वेदिक दवा

फिटकरी भस्म, गोदंती भस्म, स्वर्ण गैरिक और मिश्री से बनी सितारी नाम की आयुर्वेदिक दवा का उपयोग मलेरिया, टाइफाइड, डेंगू, वायरल और दूसरे बुखारों में किया जाता है। ये दवा पसीना लाकर बुखार कम करने में मदद करती है और इम्यूनिटी को सपोर्ट करती है।

यूटीआई और जेनाइटल संक्रमण में है असरदार

महिलाओं में यूरिन इन्फेक्शन और गाइनिक संक्रमण की स्थिति में फिटकरी मिले पानी से बाहरी सफाई करने से राहत मिल सकती है। कुछ मामलों में डॉक्टर की सलाह से फिटकरी भस्म का सीमित मात्रा में सेवन भी बताया जाता है।

फिटकरी के नुकसान भी जानना जरूरी

विशेषज्ञों के मुताबिक फिटकरी की अधिक मात्रा शरीर में पित्त बढ़ा सकती है, जिससे जलन और गर्मी की समस्या हो सकती है। इसलिए फिटकरी का सेवन या प्रयोग हमेशा सीमित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए। एक्सपर्ट के मुताबिक फिटकरी का सेवन कभी भी आधा ग्राम से ज्यादा नहीं करना चाहिए।

निष्कर्ष

फिटकरी केवल एक साधारण एंटीसेप्टिक नहीं, बल्कि आयुर्वेद में इसे कई रोगों में उपयोगी माना गया है। हालांकि इसके फायदे तभी मिलते हैं जब इसका इस्तेमाल सही मात्रा और सही तरीके से किया जाए। किसी भी गंभीर समस्या में घरेलू उपाय अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

डिस्कलेमर:

इस लेख में साझा की गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। अपनी डाइट, एक्सरसाइज या दवाओं में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति के मामले में तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें

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