
Russia Sells Gold : रूस ने 25 साल में पहली बार अपने सेंट्रल बैंक के रिजर्व से फिजिकल सोना बेचना शुरू कर दिया है. ये कदम सरकार द्वारा बढ़ते बजट घाटे को पूरा करने के लिए उठाया गया है. रूस लगातार बढ़ते सैन्य खर्च के कारण दबाव में है. ये जानकारी बर्लिन स्थित मीडिया आउटलेट bne IntelliNews की रिपोर्ट में सामने आई है.
रेगुलेटरी आंकड़ों के मुताबिक, 2022 से 2025 के बीच रूस ने सोना और विदेशी मुद्रा मिलाकर 15 ट्रिलियन रूबल (करीब 150 अरब डॉलर) से अधिक की बिक्री की. इसके अलावा, 2026 के पहले दो महीनों में ही 3.5 ट्रिलियन रूबल (करीब 35 अरब डॉलर) की अतिरिक्त बिक्री की गई. सिर्फ जनवरी 2026 में रूस के सेंट्रल बैंक ने 3 लाख औंस सोना बेचा, जबकि फरवरी में 2 लाख औंस की बिक्री हुई. ये कदम रिजर्व मैनेजमेंट में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. पहले सोने के लेन-देन ज्यादातर कागजी होते थे. लेकिन, हाल के महीनों में सेंट्रल बैंक ने असली गोल्ड बार्स बाजार में बेचना शुरू कर दिया है.
इसका असर ये हुआ है कि रूस का कुल गोल्ड रिजर्व घटकर 74.3 मिलियन औंस रह गया है. ये पिछले चार साल का सबसे निचला लेवल है. जनवरी और फरवरी में कुल 14 टन सोने की बिक्री की गई. बता दें, 2002 की दूसरी तिमाही के बाद सबसे बड़ी दो महीने की बिक्री है. जब एक बार में 58 टन सोना बेचा गया था.
रूस की आर्थिक स्थिति पर दबाव
ये बिक्री ऐसे समय में हो रही है जब रूस की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है. 2025 में देश का बजट घाटा GDP का 2.6% रहा, जबकि शुरुआती अनुमान 0.5% था. अर्थशास्त्रियों के मुताबिक वास्तविक घाटा 3.4% तक हो सकता है, क्योंकि कुछ भुगतान 2026 तक टाल दिए गए हैं. साल के दूसरे हिस्से में तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों के कारण रूस की आय पर भी असर पड़ा है. तेल और गैस से मिलने वाला टैक्स अब कुल रेवेन्यू का सिर्फ 20% रह गया है. ये युद्ध से पहले के स्तर का लगभग आधा है.
सोने की बिक्री का एक कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों में तेज उछाल भी है. इस वक्त गोल्ड की कीमत 5,000 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई है. इसके चलते 28 फरवरी तक रूस के कुल विदेशी मुद्रा भंडार 809 अरब डॉलर से ज्यादा हो गए हैं. हालांकि, इनमें से करीब 300 अरब डॉलर की संपत्ति पश्चिमी देशों में फ्रीज है.
दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा गोल्ड होल्डर
वर्तमान में रूस के पास 2,000 टन से ज्यादा सोना है, जिससे वो दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा गोल्ड होल्डर बना हुआ है. रूस ने पिछले कई वर्षों में अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ाया था. ताकि डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके. 2022 के बाद से सरकार बजट दबाव को संभालने के लिए कई उपाय कर रही है. इसमें नेशनल वेलफेयर फंड से पैसा निकालना (जिसमें अभी करीब 4 ट्रिलियन रूबल बचे हैं), घरेलू बॉन्ड (OFZ) जारी करना और वैट (VAT) दरों में बढ़ोतरी शामिल है. ये सरकार की कुल आय का लगभग 40% हिस्सा है.
तेल पर हो रहा है फायदा
रूस को ईरान युद्ध से कुछ समय के लिए फायदा हुआ है. होर्मुज में तनाव के कारण तेल सप्लाई प्रभावित हुई और कीमतें बढ़ गईं. इसका लाभ उठाकर रूस ज्यादा दाम पर तेल बेच रहा है. भारत पहले मध्य पूर्व पर निर्भर था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। अब सुरक्षित सप्लाई के लिए फिर से रूस से तेल खरीद रहा है. ये फैसला सस्ता और भरोसेमंद विकल्प पाने के लिए लिया गया है.





