Saturday, March 28, 2026
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अमेरिका-NATO रिश्तों में दरार? ट्रंप के बयान से मचा हड़कंप, कहा- ‘हमें अब इसकी कोई जरूरत नहीं’!..

अमेरिका-NATO रिश्तों में दरार? ट्रंप के बयान से मचा हड़कंप, कहा- ‘हमें अब इसकी कोई जरूरत नहीं’!..
अमेरिका-NATO रिश्तों में दरार? ट्रंप के बयान से मचा हड़कंप, कहा- ‘हमें अब इसकी कोई जरूरत नहीं’!..

अमेरिका और नाटो के रिश्तों में इन दिनों खटास खुलकर सामने आ रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार NATO के सदस्य देशों पर निशाना साध रहे हैं और अपने बयान से साफ संकेत दे रहे हैं कि वह इस गठबंधन से खुश नहीं हैं. शुक्रवार (27 मार्च) को दिए गए एक बयान में ट्रंप ने दो टूक कहा कि अमेरिका के लिए हर हाल में नाटो के साथ खड़े रहना जरूरी नहीं है. उनके इस बयान ने ट्रांस-अटलांटिक गठबंधन की मजबूती पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं. पहले भी ट्रंप कई बार नाटो देशों पर रक्षा खर्च कम करने को लेकर नाराज़गी जता चुके हैं, लेकिन इस बार उनके तेवर कुछ ज्यादा ही सख्त नजर आए.

ट्रंप के बयान को इस रूप में देखा जा रहा है कि वह अमेरिका की भूमिका को सीमित करने या नाटो से दूरी बनाने का मन बना रहे हैं. अगर ऐसा होता है, तो यह न सिर्फ अमेरिका-यूरोप संबंधों के लिए बड़ा झटका होगा, बल्कि वैश्विक सुरक्षा ढांचे पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है. ट्रंप ने मियामी में एक इन्वेस्टमेंट फोरम के दौरान खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की. उनका गुस्सा सीधे तौर पर NATO और खासकर उसके यूरोपीय सदस्य देशों पर था.

नाटो देशों ने नहीं दिया ट्रंप का साथ
ट्रंप ने कहा कि जब अमेरिका ईरान के साथ जारी संघर्ष का एक महीना पूरा हो चुका है, तब भी यूरोपीय सहयोगियों ने खुलकर उसका साथ नहीं दिया. उन्होंने इस बात पर भी निराशा जताई कि जिन देशों को वे अपना साझेदार मानते हैं, वही इस मुश्किल वक्त में दूरी बनाए हुए हैं. असल में, अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई का फैसला अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ पहले से साझा नहीं किया था. यही वजह रही कि कई यूरोपीय नेताओं ने इस कदम का समर्थन करने के बजाय इसका विरोध किया. इस पूरे घटनाक्रम ने नाटो के भीतर एक बार फिर मतभेदों को उजागर कर दिया है, जिससे अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगियों के रिश्तों में तनाव साफ नजर आ रहा है.

क्या ये ब्रेकिंग न्यूज है?
ट्रंप ने एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज में सहयोगी देशों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका हमेशा उनके साथ खड़ा रहा है, लेकिन अब हालात ऐसे दिख रहे हैं कि शायद वहां बने रहने की जरूरत ही नहीं रह गई. ट्रंप ने बातचीत के दौरान तंज भरे अंदाज़ में कहा, ‘क्या यह ब्रेकिंग स्टोरी है? शायद हां… लेकिन सच यही है.’ उन्होंने दोहराया कि जब दूसरे देश अमेरिका के हितों का साथ नहीं देते, तो फिर अमेरिका को भी उनके लिए खड़े रहने की कोई मजबूरी नहीं होनी चाहिए. उनके बयान से साफ संकेत मिलता है कि वे पारंपरिक वैश्विक साझेदारियों पर पुनर्विचार के पक्ष में हैं और मानते हैं कि रिश्ते बराबरी के आधार पर होने चाहिए, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे के लिए खड़े हों.

क्यों बिगड़े नाटो से US के रिश्ते?
साल 2024 के चुनावी कैंपेन के दौरान डोनाल्ड ने एक बयान देकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा था कि जो यूरोपीय देश NATO के तहत अपनी रक्षा पर तय खर्च नहीं करते, उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए व्लादिमीर पुतिन को प्रोत्साहित किया जा सकता है. इस बयान ने ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में तनाव पैदा कर दिया था. हालांकि, 2025 में हालात कुछ हद तक सुधरते नजर आए. ट्रंप और कई यूरोपीय नेताओं के बीच संवाद बढ़ा और रिश्तों में नरमी आई. ऐसा लगा कि दोनों पक्ष पुराने मतभेद पीछे छोड़कर सहयोग की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. 2026 में ये संतुलन फिर से बिगड़ गया. वाशिंगटन और ब्रूसेल्स के बीच फिर तब तनाव बढ़ गया, जब ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपनी आक्रामक बयानबाजी तेज कर दी.

me.sumitji@gmail.com

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