
Chief Justice Of India: भारत के 53वें चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने देशभर के सभी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने आग्रह किया है कि वे अपनी नियुक्तियों में महिला कैंडिडेट्स को प्राथमिकता दे. इसके साथ ही चीफ जस्टिस ने अदालतों में न्यायपालिका के रिक्त पदों को भरने के लिए जल्द कदम उठाने की भी बात कही. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट कॉलेजियम जजों की नियुक्ति की सिफारिश समय पर भेजे ताकि उनकी नियुक्ति जल्द हो सके.
न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी
बता दें कि चीफ जस्टिस की और से यह पत्र ऐसे समय पर लिखा गया है जब ज्यूडिशियरी में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार सर्विस में शामिल कुल 813 जजों में से महिलाओं का प्रतिनिधित्व केवल 115 है, जो कुल संख्या का सिर्फ 14.27 फीसदी ही है. वहीं सुप्रीम कोर्ट में भी इस वक्त केवल एक ही महिला जज है.
महिलाओं की भागीदारी में नहीं दिखी बढ़ोत्तरी
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि हाई कोर्ट में कुल 1122 जजों में से 309 पद खाली है, जो लगभग 27.5 प्रतिशत है. वहीं डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में लगभग 36.3 प्रतिशत महिला जज हैं. इसका साफ अर्थ है कि न्यायपालिका में शुरुआती स्तर पर महिलाओं की संख्या ठीक-ठाक है, लेकिन बाद में जब हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में उनके जज बनाने की बारी आती है तो महिलाओं की संख्या उसी अनुपात में बढ़ती हुई नहीं दिखाई देती.
‘महिला वकीलों को अपवाद के तौर पर न देखें…’
इस समस्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अपने पत्र में कहा है कि जब न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति की बात हो तो योग्य महिला वकीलों को अपवाद के तौर तरह नहीं देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला योग्य है, तो उसे भी उतना ही मौका मिलना चाहिए जितना पुरुषों को मिलता है.






