Sunday, March 29, 2026
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तेल संकट से जूझती दुनिया, चीन चुपचाप खेल रहा लंबा दांव, भारत के लिए क्या सबक छिपा है?!..

तेल संकट से जूझती दुनिया, चीन चुपचाप खेल रहा लंबा दांव, भारत के लिए क्या सबक छिपा है?!..
तेल संकट से जूझती दुनिया, चीन चुपचाप खेल रहा लंबा दांव, भारत के लिए क्या सबक छिपा है?!..

Is China preparing for Taiwan War? पश्चिम एशिया में यूएस-इजरायल की ईरान के साथ चल रही जंग की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आवागमन लगभग ठप पड़ा हुआ है, जिससे दुनियाभर में तेल-गैस संकट फैला हुआ है. भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है. पूरी दुनिया एक अनिश्चितता के बीच इस युद्ध के थमने का बेसब्री से इंतजार कर रही है, जिससे हालात में सुधार हो और जनजीवन सामान्य हो सके. वहीं, दुनिया की नजरों से दूर चीन इस संकट को एक अवसर के रूप में बदलने में जुटा है. वह एक ऐसे मेगा प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिसके पूरा होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट जैसे तेल संकट के झटके उसे कभी हिला नहीं पाएंगे.

‘सुपरग्रिड’ बनाने में जुटा है चीन
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग हब है, जहां पर बने सामान दुनियाभर में बेचे जाते हैं. उन सामानों को बनाने के लिए चीन में लाखों छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां दिन-रात काम करती हैं. इन फैक्ट्रियों को चलाने के लिए चीन को दूसरे देशों से आने वाले पेट्रोलियम और गैस पर निर्भर रहना पड़ता है. अगर किसी भी वजह से उसकी तेल आपूर्ति में व्यावधान होता है तो पूरे मुल्क में उत्पादन ठप होने का खतरा बढ़ जाता है.

पहले रूस-यूक्रेन युद्ध और अब इजरायल-ईरान युद्ध ने चीन को सिखाया कि उसे अब पेट्रोलियम का विकल्प ढूंढना ही होगा, जिससे देश की फैक्ट्रियां सुचारू रूप से चल सकें. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इसके लिए चीन अब ‘सुपरग्रिड’ बनाने के मेगा प्रोजेक्ट को करने में लगा है. उसकी यह रणनीति न सिर्फ तात्कालिक संकट से बचाव करेगी, बल्कि भविष्य की ऊर्जा स्वतंत्रता की नींव भी रखेगी.

बिछाई जा रही हजारों किमी लंबी बिजी लाइनें
रिपोर्ट के मुताबिक , चीन के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में कोयला, पवन और सौर ऊर्जा भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं. वहां पर वैकल्पिक तरीको से बिजली बनाकर उन्हें हजारों किमी दूर चीन के पूर्वी हिस्से में पहुंचाया जाएगा,जहां पर देश की अधिकतर फैक्ट्रियां और कंपनियां हैं. यही मेगा प्रोजेक्ट चीन का ‘सुपरग्रिड’ है, जिसे देश की तकदीर बदलने वाला कहा जा रहा है.

चीन का यह सुपरग्रिड अल्ट्रा हाई वोल्टेज (UHV) ट्रांसमिशन लाइनों पर आधारित होगा. स्टेट ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना और चाइना सदर्न पावर ग्रिड मिलकर इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रहे हैं. इसके लिए 20230 तक 4 ट्रिलियन युआन (लगभग 574 अरब डॉलर) का निवेश करने की योजना है. इनसे प्रति वर्ष 200 गीगावाट प्रति घंटे नवीकरणीय ऊर्जा ग्रिड से जुड़ेगी और अंतर-प्रांतीय बिजली ट्रांसमिशन क्षमता में 35% की वृद्धि होगी. इससे बिजली की बर्बादी कम होगी और नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर उपयोग होगा. साथ ही, अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से को स्थिर बिजली भी मिलेगी.

जमा कर चुका है एक अरब से ज्यादा क्रूड ऑयल
इसे ग्रिड के साथ ही चीन ने चुपचाप विशाल क्रूड तेल भंडार भी जमा कर लिया है. अनुमानों के अनुसार, उसके रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार 1.2-1.3 अरब बैरल तक पहुंच गए हैं, जो कई महीनों की आयात जरूरतों के बराबर है. मौका देखकर उसने रूसी तेल से आयात भी बहुत बढ़ा दिया है. ऐसे में अगर वह ताइवान को लेकर जंग में जाने का फैसला करता है और किसी वजह से उसकी तेल आपूर्ति अटक जाती है तो भी वह कई महीनों तक युद्ध कर सकेगा.

चाइना इंस्टीट्यूट फॉर स्टडीज इन एनर्जी पॉलिसी के डायरेक्टर लिन बोक्रियांग चीन की इन पहलों को बेहद अहम बताते हैं. उनका कहना है कि चीन का ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ना सही रणनीतिक कदम है. संकट की स्थिति में वह अब दूसरे मुल्कों पर निर्भर नहीं रहेगा.

भारत के लिए सबक हैं चीन की तैयारियां
चीन की यह तैयारियां भारत के लिए एक बड़ा सबक है. भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयातित तेल और एलपीजी पर निर्भर है. इस सप्लाई में कोई भी बाधा आने पर देश में संकट पसर जाने का खतरा बना रहता है, जिससे आम लोगो को परेशानी होने के साथ-साथ उद्योग प्रभावित हो सकते हैं. ऐसे में भारत को भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की जरूरत है. इसके लिए उसे अपने नवीकरणीय ऊर्जा साधनों का विस्तार करना होगा, बिजली ग्रिड का आधुनिकीकरण करना होगा और तेल रणनीतिक भंडार बढ़ाना होगा. जिससे संकट के समय वह पंगु न हो सके और महीनों तक बिना आपूर्ति के भी देश का जनजीवन चलता रह सके.

me.sumitji@gmail.com

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