मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच हालात फिर से गंभीर होते दिख रहे हैं, जहां ईरान और इजराइल के बीच टकराव ने एक नया मोड़ ले लिया है। ताजा घटनाक्रम में ईरानी मिसाइलों ने इजराइल के दक्षिणी इलाकों को निशाना बनाया, जिससे कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं।
बता दें कि शनिवार देर रात ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलें इजराइल के दक्षिणी शहर डिमोना और अराद में गिरीं। मौजूद जानकारी के अनुसार इन हमलों में कम से कम 180 लोग घायल हुए हैं। इन दोनों शहरों की लोकेशन इजराइल के प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्र के काफी करीब मानी जाती है, जिससे इस घटना की गंभीरता और बढ़ जाती है।
गौरतलब है कि इससे पहले दिन में ईरान के नतांज स्थित परमाणु संवर्धन केंद्र पर भी हमला हुआ था। हालांकि इजराइल ने इस हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया है। नतांज पर हमला कोई पहली बार नहीं हुआ है, इससे पहले भी संघर्ष के शुरुआती दौर में यह केंद्र निशाने पर आ चुका है।
ईरान ने इसी के कुछ घंटों बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइल हमले किए। इजराइल की सेना के अनुसार इस बार कुछ मिसाइलें उनकी वायु रक्षा प्रणाली को भेदने में सफल रहीं, जो कि अब तक कम ही देखने को मिला था। खास तौर पर परमाणु केंद्र के आसपास के इलाके में यह पहली ऐसी घटना मानी जा रही है।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हमले को देश के लिए एक कठिन शाम बताया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है। रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने कहा कि ऐसे हमले पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में बड़े स्तर के खतरे को जन्म दे सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखी है। एजेंसी के मुताबिक फिलहाल डिमोना स्थित परमाणु केंद्र को किसी प्रकार का नुकसान या विकिरण के असामान्य स्तर की जानकारी नहीं मिली है।
जानकारों का मानना है कि इस तरह के हमले क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकते हैं। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। मध्य पूर्व पहले से ही ऊर्जा और सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है, ऐसे में परमाणु ठिकानों के आसपास बढ़ती गतिविधियां वैश्विक चिंता का कारण बन रही हैं।



