
ग्रेटर नोएडा: विकास की रफ्तार के आगे नियमों की दीवार भी छोटी पड़ गई। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। 150 किलोमीटर दूरी के नियम को पार करते हुए यह एयरपोर्ट अब उद्घाटन के करीब पहुंच चुका है। खास बात यह है कि यह दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) से महज 61 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
क्या है 150 किलोमीटर का नियम?
देश में सामान्य तौर पर किसी मौजूदा एयरपोर्ट के 150 किलोमीटर के दायरे में दूसरा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने की अनुमति नहीं दी जाती। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि दोनों एयरपोर्ट का एयर स्पेस आपस में टकराए नहीं और पहले से संचालित एयरपोर्ट पर नकारात्मक असर न पड़े।
कैसे मिली नियम से छूट?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी एयरपोर्ट पर यात्री भार उसकी अधिकतम क्षमता तक पहुंच जाता है, तो सरकार इस नियम में छूट दे सकती है। IGI एयरपोर्ट लगभग अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच चुका है, जिससे दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव काफी बढ़ गया था। इसी दबाव को कम करने के लिए जेवर एयरपोर्ट को मंजूरी दी गई, ताकि क्षेत्र में बढ़ती एयर ट्रैफिक की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
दो दशक पुराना है प्रोजेक्ट का सपना
जेवर एयरपोर्ट का विचार नया नहीं है। वर्ष 2001 में उत्तर प्रदेश में इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन 150 किमी नियम के कारण इसे मंजूरी नहीं मिल पाई। शुरुआत में इसे कार्गो एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की योजना बनी, लेकिन बाद में इसे पूर्ण यात्री एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया गया। इस दौरान कई बार इसे आगरा या राजस्थान शिफ्ट करने की चर्चाएं भी सामने आईं।
योगी सरकार में मिली रफ्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को नई गति मिली। किसानों से वार्ता कर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की गई और प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारा गया। स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के प्रयासों से यह प्रोजेक्ट अब साकार होने के करीब है।
डेवलपर चयन में कड़ी प्रतिस्पर्धा
एयरपोर्ट के विकास के लिए हुई बोली प्रक्रिया में कई बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया। अंततः Zurich Airport International AG ने 400.97 रुपये प्रति यात्री की सबसे ऊंची बोली लगाकर कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया। वहीं अदानी एंटरप्राइजेज ने 360 रुपये प्रति यात्री और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने करीब 351 रुपये प्रति यात्री की बोली लगाई थी। DIAL ही IGI एयरपोर्ट का संचालन करती है, इसलिए उसे वरीयता मिलने की भी चर्चा रही।
एयर स्पेस और क्षमता का संतुलन
विशेषज्ञों का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट और IGI के बीच एयर स्पेस का संतुलन बनाए रखने के लिए विशेष प्लानिंग की गई है। दोनों एयरपोर्ट के संचालन में टकराव न हो, इसके लिए तकनीकी स्तर पर कई व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं।
दिल्ली-एनसीआर को मिलेगा बड़ा फायदा
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चालू होने से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा। इसके साथ ही क्षेत्र में निवेश, रोजगार और कनेक्टिविटी के नए अवसर खुलेंगे। यह एयरपोर्ट न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए एक बड़ा एविएशन हब साबित हो सकता है।



