Saturday, March 21, 2026
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बुरी खबरः ईरान-इजरायल युद्ध से भारत में फटेगी महंगाई! पेट्रोल-इंडस्ट्रियल डीजल, के…!..

बुरी खबरः ईरान-इजरायल युद्ध से भारत में फटेगी महंगाई! पेट्रोल-इंडस्ट्रियल डीजल, के…!..
बुरी खबरः ईरान-इजरायल युद्ध से भारत में फटेगी महंगाई! पेट्रोल-इंडस्ट्रियल डीजल, के…!..

भारत के पेट्रोल मार्केट में इसके प्रीमियम वैरिएंट की हिस्सेदारी बहुत कम है, केवल 2 से 4% तक। लेकिन, इसका 2.35 रुपये तक महंगा होना बताता है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से तेल-गैस पर दबाव बढ़ता जा रहा है और कंपनियों के लिए शायद बहुत देर तक इसे संभालना मुमकिन न रहे। इंडस्ट्रियल डीजल के दाम में भी बढ़ोत्तरी हुई है।

रिफाइनरी पर हमले। मौजूदा संघर्ष में तेल-गैस ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद से ग्लोबल मार्केट में अफरातफरी का माहौल है। कुवैत ने बताया कि शुक्रवार को भी ईरान ने उसकी मीना अल अहमदी रिफाइनरी पर हमला किया, जिसके बाद इसके कुछ हिस्सों को बंद करना पड़ा। सऊदी, UAE और कतर – इन सभी की उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है।

गिरता रुपया। संकट से निपटने के लिए भारत अपने आयात में विविधता ला रहा है। लेकिन, क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमत परेशानी बनी हुई है। क्रूड अब भी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर है, जबकि सऊदी अरब ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध जारी रहा तो दाम 180 डॉलर के पार भी जा सकता है। डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से भारत के लिए परेशानी और बढ़ गई है। उसे तेल की खरीद के लिए ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ रही है। शुक्रवार को रुपया टूटकर 93.71 पर पहुंच गया।

महंगाई का डर। ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। भारत में तेल की कीमतें बाजार स्थितियों के हिसाब से कंपनियां तय करती हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्टैंडर्ड पेट्रोल के दाम नहीं बढ़े हैं, लेकिन आखिरकार प्रीमियम पेट्रोल और इंडस्ट्रियल डीजल का बोझ उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा। इंडस्ट्रियल डीजल के दाम में करीब 21 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। इसका इस्तेमाल भारी उद्योगों और हेवी मशीनरी में किया जाता है। इसका दाम बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ सकती है, उद्योगों का मुनाफा घटेगा और कई सामान महंगे हो सकते हैं। कमर्शल LPG संकट की वजह से पहले ही काफी असर पड़ रहा है।

वास्तविक समाधान। जापान, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी समेत 6 देशों ने होर्मुज स्ट्रेट को आवाजाही के लिए सुरक्षित बनाने में सहयोग करने की बात कही है। यह बढ़ते ऊर्जा संकट का नतीजा है कि इन देशों को मजबूरी में इस मामले में उतरना पड़ रहा है। हालांकि वास्तविक समाधान अमेरिका-इस्राइल और ईरान के हाथ में है। दोनों पक्षों को शांति के लिए प्रयास करने चाहिए, यही पूरी दुनिया के हित में होगा।

me.sumitji@gmail.com

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