Saturday, March 21, 2026
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वाराणसी कॉलेज हत्याकांड: वर्चस्व की लड़ाई में बुझ गया घर का इकलौता चिराग, कौन था सूर्य प्रताप सिंह? जानें गाजीपुर कनेक्शन!

वाराणसी कॉलेज हत्याकांड: वर्चस्व की लड़ाई में बुझ गया घर का इकलौता चिराग, कौन था सूर्य प्रताप सिंह? जानें गाजीपुर कनेक्शन!
वाराणसी कॉलेज हत्याकांड: वर्चस्व की लड़ाई में बुझ गया घर का इकलौता चिराग, कौन था सूर्य प्रताप सिंह? जानें गाजीपुर कनेक्शन!

धर्म और शिक्षा की नगरी काशी के प्रतिष्ठित उदय प्रताप (यूपी) कॉलेज के कैंपस में गुरुवार को जो मंजर दिखा, उसने पूरे शहर को दहला दिया. परीक्षाओं के माहौल के बीच गोलियों की तड़तड़ाहट ने न केवल एक छात्र की जान ले ली, बल्कि कॉलेज प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए. आपसी रंजिश और वर्चस्व की इस खूनी जंग में गाजीपुर के एक साधारण परिवार का इकलौता बेटा, सूर्य प्रताप सिंह उर्फ पवन हमेशा के लिए खामोश हो गया.

सूर्य प्रताप सिंह (20), मूल रूप से गाजीपुर जिले के रामपुर माझा थाना क्षेत्र के दुबईथा गांव का रहने वाला था. वो यूपी कॉलेज में बीएससी (द्वितीय वर्ष) का छात्र था. सूर्य प्रताप के पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उसका परिवार पिछले काफी समय से वाराणसी में ही रह रहा था.

उसके पिता, ऋषि देव सिंह, वाराणसी के अतुलानंद कॉलेज में प्रिंसिपल की गाड़ी चलाते हैं और माता किरण सिंह उसी विद्यालय में वार्डन रह चुकी हैं. सूर्य प्रताप अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था (उनकी दो बेटियां भी हैं). परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी और पूरा परिवार अतुलानंद विद्यालय कैंपस में ही मिले एक कमरे में रहता था. उनके पैतृक ग्रामवासी तेज तिवार के अनुसार, सूर्य प्रताप एक शालीन परिवार से ताल्लुक रखता था, जिसके चाचा दिल्ली और मुंबई में निजी नौकरियां करते हैं. हाल ही में वह होली पर गांव गया था, लेकिन किसे पता था कि यह उसकी आखिरी होली होगी.

10 मिनट और 4 गोलियां

घटना शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे की है. ये खबर आप हिमाचल से में पढ़ रहे हैं। यूपी कॉलेज में इन दिनों असाइनमेंट और परीक्षाओं का दौर चल रहा है. सूर्य प्रताप और आरोपी मंजीत चौहान के बीच पुराना विवाद था. घटना से ठीक पहले प्रिंसिपल धर्मेंद्र कुमार सिंह ने दोनों को अपने ऑफिस बुलाकर समझाया था कि वे आपस में झगड़ा न करें. जैसे ही दोनों छात्र प्रिंसिपल के कमरे से बाहर निकले, आर्ट्स फैकल्टी के पास मंजीत चौहान और उसके साथी अनुज ने सूर्य प्रताप को घेर लिया.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद बढ़ते ही मंजीत ने पिस्टल निकाल ली. सूर्या जान बचाने के लिए भागा, लेकिन पहली गोली लगते ही वह जमीन पर गिर पड़ा. इसके बाद मंजीत ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं. सूर्या को चार गोलियां लगीं. हत्या को अंजाम देने के बाद मंजीत पहली मंजिल पर चढ़ा और पीछे की झाड़ियों में पिस्टल फेंककर दीवार फांदकर भाग निकला.

छात्रों का आक्रोश और भारी बवाल

जैसे ही सूर्या की मौत की खबर ट्रामा सेंटर से कॉलेज पहुंची, कैंपस युद्ध का मैदान बन गया. उग्र छात्रों ने आरोपी मंजीत की बाइक को चकनाचूर कर दिया और कॉलेज परिसर में जमकर तोड़फोड़ की. इस दौरान हुए पथराव में कुछ शिक्षक भी घायल हुए. छात्रों ने भोजूबीर मार्केट बंद करा दिया और धरने पर बैठ गए. उनकी मांग थी कि आरोपी का एनकाउंटर किया जाए और लापरवाही बरतने वाले प्रिंसिपल व चीफ प्रॉक्टर इस्तीफा दें.

पुलिस की कार्रवाई और मंत्री का बयान

वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला. गाजीपुर के प्रभारी मंत्री रविंद्र जायसवाल ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि यह छात्रों के आपसी विवाद (कपड़े पहनने को लेकर शुरू हुई रंजिश) का परिणाम है. उन्होंने पुलिस कमिश्नर को सख्त निर्देश दिए थे कि अपराधी को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए. देर शाम मुख्य आरोपी मंजीत चौहान को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि उसके साथी अनुज की तलाश जारी है.

क्यों नहीं रुकी रंजिश?

छात्रों का आरोप है कि मंजीत चौहान का आपराधिक इतिहास रहा है (शिवपुर थाने में दर्ज मुकदमे). सूर्या पिछले 10 दिनों से चिकन पॉक्स के कारण गांव में था, लेकिन प्रिंसिपल के बुलाने पर ही वह आज कॉलेज आया था. सवाल यह उठता है कि जब कॉलेज प्रशासन को दोनों के बीच पुरानी रंजिश का पता था, तो उन्हें सुरक्षा क्यों नहीं मुहैया कराई गई? फिलहाल, दुबईथा गांव से लेकर वाराणसी के कॉलेज कैंपस तक सन्नाटा है. एक मां ने अपना बेटा खो दिया और एक पिता ने अपनी बुढ़ापे की लाठी.

me.sumitji@gmail.com

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